Wednesday, November 15, 2017

मतभेद


पांच वर्षीय अचिंत घर के बाहर पड़ोस के बच्चों के साथ खेल रहा था। खेलते-खेलते दो बच्चे अचिंत की मां के पास शिकायत करने पहुंच गए कि आंटी अचिंत खेल बिगाड़ रहा है।
"क्यों खेल बिगाड़ा?"
"मम्मी मुझे नही खिला रहे हैं।"
"नही खिला रहे हैं तो मेरे पास आता। खेल क्यों बिगाड़ा।" कह कर रीटा ने अचिंत को पीट दिया। कस कर चार-पांच चांटे नन्हे मासूम अचिंत को लगा दिए। हाथ के निशान कोमल गालों पर छप गए। दर्द से अचिंत कराह उठा।
"मम्मी क्यों मार रहे हो?"
"मेरे से जुबान लड़ाता है।" कह कर रीटा ने दो थप्पड़ और नन्हे मासूम के गाल पर जड़ दिए।
"दादी बचाओ।" अचिंत ने पुकार लगाई
दादी कमरे से बाहर दौड़ी चली आई और छाती से अचिंत को लगा लिया।
"मम्मी इसको छोड़ो। आपके प्यार में बिगड़ता जा रहा है। इसको मैं बाथरूम में बंद करती हूं तब सीखेगा।" रीटा ने दादी के हाथ से अचिंत को छुड़ाया और घसीट कर बाथरूम में बंद कर दिया। अचिंत चिल्लाने लगा मुझे बाहर निकालो। मैं शैतानी नही करूंगा। मम्मी मुझे बाहर निकालो। दादी मुझे बाहर निकालो।
नन्हे मासूम अचिंत के चिल्लाने और गिड़गिड़ाने पर रीटा ने कठोर शब्दों में दादी को चेतावनी दी कि बाथरूम से अचिंत को निकाला तो खैर नही। दादी चुपचाप कमरे में जाकर रोने लगी। तभी अचिंत के दादा ऑफिस से आए। बाथरूम से अचिंत के रोने की आवाज रही थी। कमरे में दादी रो रही थी।
"क्या हुआ?"
"मेरे से बर्दास्त नही होता। नन्हे को बाथरूम से निकालो।"

दादा ने बाथरूम का दरवाजा खोल कर अचिंत को बाहर निकाला। सहमा अचिंत दादा से चिपक गया। रीटा ने अचिंत को दादा के हाथ से खींच कर कमरे में ले गई और एक थप्पड़ और जड़ दिया।
"मेरी शिकायत करेगा।"
दादा ने रीटा को अचिंत को पीटने से मना किया तभी ऑफिस से रमेश गया और अपने पिता पर बिगड़ पड़ा।
"पापा आप हमारे बीच नही आओगे। हम जैसे चाहेगे वैसी परवरिश करेंगे। बहुत बिगड़ गया है।"
"बेटे परवरिश तुम अपने हिसाब से करो पर बिना बात के अचिंत को मत मारा करो।"
"हर रोज खेल बिगाड़ देता है और रोज शिकायत आती है।"
"बेटे पड़ोस में इसकी उम्र का कोई बच्चा नही है। अचिंत पांच वर्ष का है और पड़ोस में बाकी बच्चे सात से नौ वर्ष के है। टीम बनाने के लिए अचिंत को बुलाते हैं और बारी नही देते तब निराश हो कर खेल बिगाड़ देता है।"
"हमारी निराशा तो नजर आती नही।" रीटा और रमेश दादा पर बरस पड़े।
"मैं मानता हूं कि मेरे और तुम्हारे बीच वैचारिक मतभेद हैं और बोलचाल भी कम है और अपनी निराशा मासूम बच्चे पर मत निकालो। मुझे अच्छा नही लगता। तुम प्यार से बच्चों को समझाओ। बच्चे प्यार के भूखे होते हैं। मार से बच्चे ढीठ हो जाते हैं और बिगड़ जाते हैं।"
"बच्चा हमारा है हम प्यार करें या मारे। आप बीच मे नही बोलोगे।" रीटा औऱ रमेश ने दो टूक बोल दिया।
दादा चुपचाप दादी के पास गए। "हमारे मतभेद के कारण अपनी हताशा और निराशा से मासूम पिट गया।"


मतभेद

पांच वर्षीय अचिंत घर के बाहर पड़ोस के बच्चों के साथ खेल रहा था। खेलते - खेलते दो बच्चे अचिंत की मां के पास शिकायत ...