Friday, November 16, 2018

परी (भाग-3)


दिल्ली पहुंच कर डॉक्टर अली बहन के घर नही रुके। वे होटल में रुके और अगले दिन बहन-बहनोई के घर फराश खाना पहुंचे।
"भाई जान आपका समान कहाँ है?" बहन ने अली और शायरा से पूछा।
डॉक्टर अली ने गंभीरता से अब्दुल के बारे में पूछताछ शुरू की तब बहन ने अली और शायरा को घूर कर ऊपर से नीचे तक देख कर कहा। "भाई जान कोई चाय पानी नही, खैरियत नही सीधे अब्दुल पर उतर आए। अरे अब्दुल दुबई में है। अच्छा खा कमा रहा है। हमें उसके बारे में कोई चिंता नही है। हमारे खानदान में एक तुम लंदन गए और दूसरा अब्दुल दुबई। दोनों ने खानदान का नाम रोशन किया है।"

बहन के मुख से इतना सुनकर अली ने एक जोरदार ठहाका लगाया और शायरा की ओर देख कर बोले "शायरा बेगम हमे अपने बारे में कोई इल्म नही है कि हमने खानदान का नाम रोशन किया या नही अलबत्ता अब्दुल मियां जरूर रोशन कर रहे होंगे।"
"यह क्या हो गया भाई जान आपको? कोई दुआ सलाम नही। कैसे बात कर रहे हो? बहन औऱ बहनोई ने अली और शायरा से पूछा।
"आप ब्दुल के बारे में सही खुलासा कीजिए।"
"अब्दुल मजे में है। दो दिन पहले ही बात हुई है। कोई लंदन की लड़की बताइए उसके लिए। दुबई से लंदन ज्यादा बढिया है।"
"हाँ यह तो है। लंदन बढिया तो है लेकिन पहले दुबई से बाहर तो आने दीजिए।"
"अजी आप बात सेट कीजिए। तुरंत दुबई से लंदन चला जाएगा।"

अब डॉक्टर अली को गुस्सा गया। "झूठ मत बोलिए। मैं कल शाम को अब्दुल से मिलने दुबई गया था। दस साल से पहले तो बाहर आता नही। कुछ तो अल्लाह से डरो। बहन-बहनोई के कत्ल में तिहाड़ जेल में बंद है। हाई कोर्ट फिर सुप्रीम कोर्ट। कम से कम उम्र कैद या फिर सीधे अल्लाह के पास। क्या जरूरत थी परी से भी खूबसूरत हिना के कत्ल करने की। बस हिन्दू से शादी की थी। उसे जीने देते। कम से कम दोनों बच जाते। हिना भी और अब्दुल भी।"
"तुमको किसने बोला?" अली के बहनोई ने गंभीर होते हुए पूछा।
"मैं धनोल्टी में तुम्हारी नातिन परी से मिल कर रहा हूँ। बिल्कुल हूबहू हिना और हिना जैसी खूबसूरत। एकदम परी लगती है औऱ नाम भी परी है।"
"एक काफिर से बिहा देते। हमारे लड़के मर गए थे क्या?"
"बहन के कत्ल में भाई जेल में है और तुम लोगों को कोई फर्क ही नही पड़ता है।"
"लंदन में रह कर तुम्हारा दिमाग फिर गया है। एक काफ़िर से शादी? हरगिज नही।"
"तुमसे मैं बहस नही कर सकता हूँ। जोड़ियाँ खुदा बना कर हमें यहाँ भेजता है। कम से कम खुदा के फैसले की इज्जत तो रखते।"
"भाई जान अगर तुमने उन काफिरों का साथ देना है तो हमारे घर में तुम्हारी कोई जगह नही।"
"लो शायरा चलते हैं। मुझे नही मालूम था कि मेरे बहन-बहनोई आदमी नही बल्कि हैवान है।"

डॉक्टर अली और शायरा वहां से रुक्सत करते हैं। बाजार से परी के लिए ढेरों कपड़े, खिलौने और दुनिया भर के उपहार लेकर परी से मिलने उसके घर पहुंचते हैं। राहुल और रिया ऑफिस गए हुए थे। घर मे वह अपनी दादी संग थी। डॉक्टर अली को देखते ही परी खुशी से उछल पड़ती है।
"दादी देखो डॉक्टर अंकल आए हैं। इन्होंने मुझे इंजेक्शन लगा कर ठीक किया था।"

परी की दादी डॉक्टर अली और शायरा का स्वागत करती है। अली और शायरा बहुत प्रेम से परी और उसकी दादी से मिलते हैं और परी को उपहार देते हैं। दादी राहुल, रिया को फोन करती है। परी के दादा, राहुल और रिया घर पहुंचते हैं। सभी डॉक्टर अली और शायरा संग डिनर करते हैं। डॉक्टर अली इस बात का विशेष ध्यान रखते हैं कि उनका हिना के साथ रिश्ता जाहिर हो। परी संग शाम बिताने के बाद डॉक्टर अली और शायरा अगले दिन लंदन वापिस चले जाते हैं।

ब्दुल और रहमान को हिना और रोहन के कत्ल के केस में उम्रकैद मिलती है। हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी अपील हार गए।

दस वर्ष बीत गए हैं। डॉक्टर अली परी के जन्म दिन पर हर वर्ष उपहार भेजते। परी संग डॉक्टर अली और शायरा का अनोखा रिश्ता आज तक परी के परिवार के लिए एक राज ही है। इन दस वर्षों में अली भारत नही सके। दस वर्ष बाद जब भारत आना हुआ तब परी से धनोल्टी में मिलने का अनुरोध किया। अब परी का पूरा परिवार धनोल्टी में एकत्रित हुआ। परी, दादा-दादी, राहुल-रिया और उनके दो बच्चे।
"परी सबसे पहले तबियत बताओ? पहले छोटा सा इंजेक्शन लगा कर ठीक किया था, अब तो बड़ा सा लगाना पड़ेगा।"
डॉक्टर अली के मजाकिया अंदाज पर सभी ठहाके लगाने लगे।
परी की खूबसूरती हिना से भी अधिक हो गई थी। डॉक्टर अली ने उच्च पढ़ाई के लिए लंदन आने को कहा कि सारा खर्च वे उठाने को तैयार हैं। परी के दादा ने डॉक्टर अली से पहली बार प्रश्न पूछा।
"डॉक्टर साब, आपके साथ कोई रिश्ता तो नही है लेकिन हर वर्ष परी के जन्म दिन पर लंदन से उपहार भेजते हैं और अब पढ़ाई का सारा खर्च उठाने को तत्पर हैं। कोई बात अवश्य है जो आपने पिछले दस वर्षों से नही बताई है।"
"दादा जी कभी-कभी इंसानियत का रिश्ता बहुत बड़ा होता है। बस वही निभा रहा हूँ।" डॉक्टर अली ने अपनी जुबान पर असलियत नही आने दी। "दादा जी, मेरा बस नही चला, एक बार तो सोचा कि परी को गोद ले लूं लेकिन मैं ऐसा कर नही सका क्योंकि राहुल ने परी के माता-पिता के अमर प्रेम के बारे में मुझे विस्तार से बताया था और अमर प्रेम की निशानी आपकी है। मैं परी को आपसे दूर नही रखना चाहता।"
"डॉक्टर अली मेरी आँखें बूढ़ी हो गयी हैं लेकिन जितना दिखाई देता है वह पूरा साफ दिखाई देता है।" दादाजी ने डॉक्टर अली की ओर आँखों में आँखें डाल कर देखा।
"दादाजी चलिए एकांत में बात करते हैं।"
"हीं अभी कोई नही है।"
"भी भी कोई सकता है। दीवारों के भी कान होते हैं। बाहर थोड़ा एकांत में बात करते हैं।"
पेड़ों की झुरमुट में यहां हल्की धूप छन कर रही थी उस स्थान पर दादाजी डॉक्टर अली संग एक बेंच पर बैठ गए।
"डॉक्टर अली परी की शक्ल हिना से हूबहू मिलती है। मुझे पक्का यकीन है कि आपका हिना के परिवार से घनिष्ठता है तभी आप ने हमारे साथ नजदीकियां बना रखी हैं।"
"दादाजी हिना मेरी भांजी है। हिना की मां का मैं भाई हूँ। मैं हिना का मामा हूँ। हिना और रोहन के साथ अन्याय हुआ है। मैं आपसे माफी भी नही मांग सकता हूँ फिर भी आपने चुप रह कर मुझे प्रायश्चित करने का अवसर दिया है।"
"डॉक्टर अली जो होना था उस पर हमारा कोई बस नही था। मुझे अच्छा लग रहा है कि आप अपना हिना के प्रति फर्ज परी पर वात्सल्य से पूरा कर रहे हो।"
बहुत देर तक बातें करने के पश्चात दादाजी और डॉक्टर अली वापिस लौटते हैं।

उच्च शिक्षा के लिए परी लंदन नही गई। भारत मे रह कर उसने इंजिनीरिंग औऱ एमबीए की पढ़ाई पूरी की। आज दस वर्ष और बीत गए। डॉक्टर अली फिर दस वर्ष बाद भारत परी के विवाह पर रहे हैं। दादा-दादी परलोक सिधार चुके थे। राहुल और रिया ने डॉक्टर अली से एक प्रश्न पूछा।
"डॉक्टर अंकल परी का कन्यादान आप करेंगे?"
"परी के कन्यादान का हक सिर्फ तुम्हे है। परी ने आँख खोलते ही तुम्हे अपना माँ-बाप समझा। मैं यह हक तुमसे नही खींच सकता हूँ हाँ अपना फर्ज जरूर पूरा करूंगा। दुल्हन का चूड़ा उसके मामा के घर से आता है। मैं हिना का मामा अपना फर्ज पूरा करूंगा।"
डॉक्टर अली के इतना कहने पर सबकी आँखें नम थी।

समाप्त 



परी (भाग-3)

दिल्ली पहुंच कर डॉक्टर अली बहन के घर नही रुके। वे होटल में रुके और अगले दिन बहन - बहनोई के घर फराश खाना पहुंचे। &...