Monday, December 17, 2007

क्रिकेट मैच

रविवार की सुबह ताऊ हुक्का गुड्गुडा रहा था। इधर उधर नज़र दौड कर बोला क्या बात है रणबीर नज़र नही आ रहा है, कहाँ गया है। आज तो स्कूल की भी छुटी होगी। दूसरी तरफ़ से कोई ज़वाब नही आया। कहाँ मर गई, मैं क्या पागल हूँ जो कि बोले जा रहा हूँ, कुछ तो मुँह से बोल।

ताऊ की यह बात सुन कर ताई की आवाज़ दूसरी तरफ़ से आई मुझे क्या पता अब कौन पागल है और कौन सियाना।

यह सुन कर ताऊ भडक गया, मुझे बकवास सुनने की कोई आदत नही है, सीधे सीधे मुँह से बोल की रणबीर कहाँ गया है या नही गया या फिर घर मैं है।

मुझे नही मालूम कहाँ है वो, उसकी माँ से पूछ लो।
माँ से पूछ लूं, तेरे से क्यों नही पूछुं। तू ताई है उसकी, घर में तू सबसे बड़ी है, पूरे घर की ख़बर होनी चाहिए तेरे को।

यह सुन कर दूसरी तरफ़ से ताई चिल्लाई, तेरे साथ बात करने के चक्कर में पूरियां जल जाएगीं। फिर उनको खा कर घर की सारी ख़बर अपने भेजे में रखिओ। तेरे को कोई काम तो है नही, सुबह सुबह हुक्का ले कर बैठ जाता है और शोर मचाने के अलावा कोई काम नही है। जब से रिटायर हुआ है, सारा दिन ख़ाली बैठ कर हुकुम चलाता रहता है।

यह सुन कर ताऊ कड़ाई में तलती पूरियों से भी ज़यादा गरम हो गया। क्या कहा मैं निकम्मा हूँ मैं सारी उम्र सरकारी नौकरी की है, किसी की हिम्मत नही हुई मेरे ऊपर उंगली उठाने की। मेरे जैसा काम कोई ऑफीस मे नही करता था। सबसे ज़यादा ऑफीस में काम करने वाला आदमी था। दो दो मेडल मिले हैं मुझको अच्छा काम करने के लिए।

तो क्या करूं उन मेडलों का, पूरियों की जगह तल दूं।

ताऊ और ताई की नौक झोंक से रणबीर की आँख खुल गई और जमहाई लेता हुआ और आँखें मलता हुआ रणबीर ताऊ के साथ खाट पर बैठ गया। रणबीर को नींद में देख कर ताऊ बोला ये कोई टाइम हुआ है तेरे उठने का। रविवार का दिन है क्रिकेट खेलने भी नही गया, आज सवेरे।

ताऊ की बात सुन कर रणबीर उखडे स्वर में बोला मैं नही जाऊंगा क्रिकेट खेलने।

रणबीर को कुछ उदास देख कर ताऊ परेशान हो गया, अब क्या हो गया, आँख तो तेरी खुली नही और ऐसी बेकार की बातें क्यों कर रहा है, रणबीर को पुच्कार ताऊ ने पूछा।

जले पर नमक मत छिडक ताऊ तू सवेरे सवेरे। आज मुझे बहुत ग़ुस्सा आ रहा है, जी कर रहा है कि सबके सिर फोड दूं। पूरी रात खराब कर दी सालों ने। पूरे के पूरे एक नंबर के हराम खोर हैं, कोई काम का नही है, ख़ुद तो करोडो कमाते हैं। ताऊ एक एक मैच का लाखों कमाते हैं फिर भी हार जाते हैं, पूरी रात जागा ताऊ, अब तो नीद भी नही खुल रही है, ऊपर से पूरे महीने की जेब ख़र्चा भी हार गया रात को।

वो कैसे, ताऊ ने हुक्के पर एक लंबा कश लगाया।

सौ रूपये की शर्त लगाई थी, टीम इंडिया पर। साले मैच हार गये। मेरे सौ रूपये डूब गये।

हार जीत तो गेम में लगी रहती है। रणबीर तू भी मैच खेले, कभी मैच जीते और कभी मैच हार जाता है। जब तू हार के आता है, मैने कभी तेरे को बोला, कि मैच क्यों हार के आया है।

मेरी बात और है, मैं तो छोटा सा बालक हूँ। अभी नौवी क्लास में पढता हूँ। अभी तो गेम सीख रहा हूँ, इसलिए मैच हार जाता हूँ। अरे ताऊ वो तो सीखे सिखाए हैं, दो दो तीन तीन वर्ल्ड कप के मैच खेल चुके हैं, मालूम है किससे मैच हारे हैं।

मुझे क्रिकेट का कोई शोंक तो है नही, मुझे क्या मालूम।

अपनी टीम बांगला देश से हार गयी।

क्या वो भी क्रिकेट खेलते हैं?

खेलते हैं क्या हमें खिला गये। उन्होने तो अपना हारने का रेकॉर्ड तोड़ दिया। आज तक कभी मैच नही जीता था, कल रात इंडिया को पेल गये। हमारे खिलाड़ी तो खडे खडे पिलते रहे। ऐसा लग रहा था मेरे से भी गये गुज़रे टीम इंडिया के खिलाडी हैं। कोई ना खेल सका और हार गये और साथ में मैं भी पूरे सौ रूपये की शर्त हार गया। मैं जीतू से पूरे सौ रूपये क़ी शर्त हार गया।

अरे तेरे को तो जेब ख़र्च ही सौ रूपये मिलता है, पूरे के पूरे शर्त में झोंक दिए। अब बाक़ी का महीना क्या करेगा?

क्या करूँ, ताऊ तू मेरे लिए सिफारिश कर ना बापू से, एक गाँधी वाला पत्ता दिला दे ना ताऊ।

सौ से पाँच पर पहुँच गया। क्या करेगा।

अब के अगले मैच में पूरे पाँच की शर्त लगाऊंगा, डबल करूँगा।

इस उम्र में जुआरी बनेंगा। पढने लिखने में ध्यान लगा, में तेरी कोई सिफारिश नही करनी तेरे बापू से।

वो तेरा छोटा भाई है। एक डाँट मार कर गाँधी वाला निकलवा लेगा। ताऊ तू मेरे वास्ते इतना छोटा सा काम नही कर सकता। फिर सारा दिन रणबीर रणबीर की आवाज़ लगाना छोड़ दे।

देख रणबीर जुआ खेलना बहुत ग़लत बात है। मैं ग़लत बात में तेरा साथ बिल्कुल नही दूँगा। तू मेरे असूल जानता हैं ना।

वो कौन था, धर्मराज युधिस्टर, वो भी तो जुआ खेलता था। वो खेले तो धर्म, मैं खेलूँ तो ग़लत। मैं कुछ नही जानता, सही और ग़लत। मुझे तू फटाफट एक गाँधी वाला दिला दे।

ना भाई ना मैं ना दिलाऊ कोई गाँधी वाला। मैं ना तो जुआ खेलता हूँ और ना तेरे को खेलने दूँगा।

फिर तू मेरा ताऊ ना है। अब मैं जान गया हूँ।

देख रणबीर धर्मराज ने जुआ खेला था, वो अपना राज पाट हार गया, यहाँ तक की वो अपने भाई हार गया और तो और वो तो अपनी बीवी भी जुआ में हार गया था। इसलिए मैं तो जुआ के एकदम खिलाफ़ हूँ। मैं तेरी कोई सिफारिश नही करूँगा।

तभी रणबीर का बापू आ गया। अब कौन सी सिफारिश की बात कर रहा है रणबीर तू अपने ताऊ से।

रणबीर ने टेडी आँख से ताऊ को देख कर सिफारिश की माँग की।

रणबीर को एक गाँधी वाला चाहिए।

क्या करेगा रणबीर तू गाँधी वाले से?

मैच देखूँगा वर्ल्ड कप के।

मैच तो टेलीविज़न पर आ रहे हैं। तुझे पैसे क्यों चाहिए?

शर्त लगाने के वास्ते।

जुआरी बनेगा क्या?

बापू शर्त लगा कर क्या मैं जुआरी बन जाऊंगा।

और क्या? हम भी तो मैच देख रहें हैं मैच की तरह। कभी शर्त नही लगाते। कोई जीते या कोई हारे। अब जब मैच होगा तो एक टीम जीतेगी और एक हार जाएगी।
ना बापू, अब टाइम बदल गया है। बिना शर्त के अब कोई मैच नही देखता है। और तो और कोई मज़ा भी तो नही आता है। ताऊ तू मेरे लिए सिफारिश कर ना।

देख माना की तू मेरा लाडला है, लेकिन मैं तो जुए के एक दम खिलाफ़ हूँ। मैं तेरी कभी भी सिफारिश नही कर सकता। तू बिना शर्त मैच देख नही तो मैं तेरे बापू से सिफारिश करूँगा कि वो तेरी जेब ख़र्ची बंद कर दे, बहुत बिगड गया है।


यह सुन कर रणबीर मुँह लटका कर अपने कमरे में चला गया।

अकेलापन

सुबह के सात बजे सुरिंदर कमरे में समाचारपत्र पढ़ रहे थे उनके पुत्र ने एक वर्षीय पौत्र को सुरिंदर की गोद मे दिया। ...