Monday, June 21, 2010

बोझ

सुबह है तैयारी का बोझ।
दिन में है काम का बोझ।
शाम को है तेरे इंतज़ार का बोझ।
रात में है ग़म का बोझ।
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हुए हैं जब से शरण तुम्हारी

हुए हैं जब से शरण तुम्हारी , खुशी की घड़ियां मना रहे हैं करें बयां क्या सिफ़त तुम्हारी , जबां में ताले पड़े हैं। सु...