Sunday, May 29, 2011

गर्मी और बारिश

उफ यह गर्मी का मौसम, बदन से निकलती पसीने की र्दुगंध

निकलती र्दुगंध मन के विचार दूषित कर जाती है

यह मौसम की मार है, कुछ नही सुहाता है

आह यह सावन की रिमझिम

जलते तपते झुलझते बदन को भिगो कर ताजा अहसास कराती है

तुमहारी याद ताजा हो जाती है

वो बारिश में भीगना, ठिठोली करना

बदलता मौसम रिश्तों के मायने बदल देता है

कुछ करने की चाहत को जगाता है

उफ यह मौसम तुमहारी याद दिलाता है

फुहारे प्यार के अहसास को मधुर बनाती हैं

धरती को स्वर्ग बनाती हैं

गर्मी या बारिश दोनों कुछ पल के मेहमान हैं

आते रहते जाते रिश्तो के मायने बदला जाते हैं

गर्मी जरूरी है बारिश को बुलाने के लिए

बारिश जरूरी है, बदन की तपिश मिटाने के लिए

अब चले भी आऔ, भूल जाऔ पुराने गिले शिक्वे

बारिश के मौसम में भीग कर तुमहारी याद सताती है

तुमहारी याद सताती है

बुढापा

कुछ उम्र में बढ़ गया कुछ जिस्म ढल गया कुछ पुराना हो गया कुछ बुढापा आ गया कुछ अनुभव आ गया कुछ कद्र भी पा गया...