Monday, August 22, 2011

भ्रष्टाचार

देश से भ्रष्टाचार विदेश रवाना हो जाए, यही देश की आम जनता चाहती है। अण्णा हजारे भी कुछ इसी दिशा में काम कर रहे हैं। सरकार इलजाम लगा रही है, कि अण्णा हजारे खुद भ्रष्ट हैं, उनका दामन साफ नही है, इसलिए अण्णा से सरकार दूर रहना चाहती है। प्रश्न यह उठता है, कि भ्रष्टाचार समाप्त होना चाहिए, या नही। जनता चाहती है, पर सरकार नही चाहती है।

आदमी गलतियों का पुतला है, कभी न कभी कोई गलती कर ही बैठता है। इसका यह मतलब तो नही, कि वह आदमी भ्रष्टाचार समाप्त करने का मोर्चा ही नही संभाल सकता। बाल्मिकी की कहानी सब जानते है। रामाणय लिखी। सरकार से डर लगता है, कहीं बाल्मिकी रामाणय पर कोई प्रतिबंध न लगा दे, कि बाल्मिकी का अतीत खराब था। तुलसीदास पर भी सवाल उठा सकती है, कि पत्नी की फटकार के बाद बुद्धि आई, इसलिए अतीत में खराबी थी, वे भी रामचरित मानस लिखने लायक नही। इस आधार पर अण्णा को कोई अधिकार नही, कि भ्रष्टाचार समाप्त करने की मुहिम उठाए।

कल टीवी पर देवआनन्द की फिल्म गाईड देख रहा था। देवआनन्द ने राजू गाईड का रोल किया, जो जालसाजी के कारण जेल की हवा खाकर दर दर की ठाकरें खा रहे थे। गांव के भोले भाले निवासियों की आस्था ने जालसाज राजू गाईड को स्वामी बना दिया. राजू स्वामी ने अपने जीवन का बलिदान दिया, किन्तु गांव वासियों की आस्था की लाज रखी।

सरकार को अण्णा या फिर उनकी टीम के किसी भी सदस्य पर आरोप नही लगाने चाहिए, कि उनका अतीत साफ नही है, गलती तो कोई भी कभी भी कर सकता है, लेकिन इसका यह मतलब नही, कि वह जनता या देश के लिए कोई भी नेक काम नही कर सकता है। अण्णा जब नेक रास्ते पर चल रहे है, तो हम सबका साथ उनके साथ है। सरकार को भ्रष्टाचार का 100 प्रतिशत निर्यात कर देना चाहिए। देश में इतना अभाव हो जाए, कि शब्दकोष में भी ढूंढने से भी नही मिले। यदि सरकार यह करने में सफल होती है, तो अण्णा से एक अनुरोध हे, कि वह श्रैय न ले, सरकार को दे दें। सरकार श्रैय लेना चाहती है, तो दे दो। हम तो भ्रष्टाचार की जडे मिटाना चाहते हैं।

Post a Comment

हुए हैं जब से शरण तुम्हारी

हुए हैं जब से शरण तुम्हारी , खुशी की घड़ियां मना रहे हैं करें बयां क्या सिफ़त तुम्हारी , जबां में ताले पड़े हैं। सु...