Sunday, December 25, 2011

Knowledge ज्ञान


Knowledge, association with goodness, love, happiness, mercy, devotion and faith. All this can be attained after being in the service at the feet of a good preceptor

ज्ञान समागम प्रेम सुख
दया भक्ति विश्वास
गुरू सेवा ते पाइये
सतगुरू चरण निवास

Saturday, December 24, 2011


Swami Vivekanand said:
Thy love I fear.
Thy knowledge, man! I value not.
It is Thy love that shakes my throne.
Brings God to human tear
For love, behold the Lord of all
The formless, ever free.
Is made to take the human form
To play and play with thee
What learning, they of Vrinda’s groves
The herdsman, ever got?
What science, girls that milked the kine?
They loved and me they bought.

Let us be righteous, courageous and love him and his creatures. God alone knows his mysterious divine play. We are part of that play. Let us drink the wine of love of God instead of alcohol and drugs as God dwells in everyone to test the truth of it. Each one has to eat and drink for oneself; much more think for oneself, so one has to think, feel and enjoy the bliss of God.

Saturday, December 17, 2011

अब तो सोच बदलिए

नवभारत टाइम्स के 16 दिसम्बर के संपादकीय “अब तो सोच बदलिए” पढ कर एक सोच उतपन्न हुई, कि कौन सी सोच बदलें और कौन बदले। किस विचारधारा का अनुसरण करें। कौन सही है। प्रश्न कई हैं, परन्तु कोई उत्तर नही मिल रहा है। उत्तर मिलना मुश्किल भी है और नामुमकिन भी। यह ठीक है कि 15 वर्ष की उम्र की छात्रा ने गर्भ को गिराने के बजाए बच्चे को जन्म देने के साथ उसकी परवरिश भी करने का निर्णय लिया है। निर्णय बेशक साहसी है, क्योंकि इस उम्र की लडकियां या तो अनचाहे गर्भ को समाप्त करती हैं, या फिर जन्म के पश्चात बच्चे को त्याग दिया जाता है। कोई भी कह सकता है कि स्टीव जॉब्स, कबीर या कुंती पुत्र कर्ण का उदहारण दे कर कह सकते है, कि ऐसे बच्चे प्रतिभाशाली होते है। आप खुद गिनती किजिए, कि लाखों ऐसे बच्चों में कुछ अपवादों को छोड कर बाकी का हाल कोई सोच सकता है, कि क्या हुआ होगा।

मूल प्रश्न है, कि क्या विवाह से पहले सेक्स उचित है। भारतीय समाज इसको मना करता है। सेक्स विवाह के पवित्र बंधन के पश्चात ही उचित है, इसलिए उचित उम्र में विवाह होना जरूरी है। आज के आधुनिक समाज में, विशेषकर शहरों में बढी उम्र तक विवाह नही करते। लिवइन रिलेशनशिप या फिर बिना किसी रिलेशन के भी सेक्स के बंधन में गिरफ्त हो जाते हैं। चाहै या अनचाहे गर्भ के बाद बच्चों का क्या भविष्य?

मुंबई की 15 साल की एक प्रेगनेंट छात्रा का बच्चे को जन्म देने का निर्णय सहासीय है। दसवीं में पढ़ने वाली छात्रा को इसके लिए अपनी परीक्षाएं भी छोड़नी पढ रही है। 17 साल के उसका वह दोस्त, जिसे वह बच्चे का पिता कहती है, सारी जिम्मेवारी से अपने को मुक्त कर लडकी से किनारा कर चुका है। उस लडकी से शादी भी नही करना चाहता है। शादी के नाम पर फिर एक प्रश्न उठता है, कि दोनो सरकार द्वारा तय उम्र से छोटे है। सरकार यह तो तय करती है, कि एक तय उम्र से पहले विवाह नही हो सकता है, परन्तु सेक्स करने से रोक नही पाती है। जो लडका अभी से मुकर रहा है, यदि विवाह हो भी गया, तो क्या पूरा जीवन लडकी और बच्चे को अपनाएगा? प्रश्न कई है, जिसका उत्तर देना आसान नही है। विवाहपूर्व सेक्स और विवाह की जिम्मेदारी में बहुत अंतर है। निसंदेह विवाह के पश्चात परिवार की जिम्मेदारी गंभीर विषय है, जो विवाहपूर्व सेक्स से आनन्द पाने से जुदा और विपरीत है।

लडकी साहसपूर्ण बच्चे को पालना चाहती है और अपने बच्चे को उसके पिता को सौंपने और उसे शादी के लिए मनाने की कोशिश करना चाहती है। उसे उम्मीद है कि सब कुछ ठीक हो जाएगा। बावजूद इसके, ऐसी स्थिति की किसी भी सूरत में तारीफ तो नहीं की जा सकती। हो सकता है, कि मीडिया में बात आने पर लडका झुक कर शादी कर ले, फिर भी लडकी की आने वाली जिन्दगी चुनौतियों से भरी हुई होगी।

हमारे देश में अभी भी दबे-ढंके तौर पर लड़कियों की कम उम्र में शादी काफी समय से होती चली आ रही है। वे कम उम्र में ही मां बनने के खतरे भी उठाती चली आ रही हैं। लेकिन विवाह का ठप्पा वगा होता है, परिवार साथ देता है, लडकी और बच्चे को अपनाता है। समय से पहले बनने वाले इस तरह के असुरक्षित यौन संबंध बता रहे हैं कि अब जरूरत इसे गंभीरता से समझने और नई पीढ़ी को समझाने की है कि किस तरह एक छोटी सी भूल उनकी पूरी जिंदगी को बदल डालती है। इस केस में भी लड़की का कहना है कि उसे प्रेगनेंसी रोकने के उपायों के बारे में जानकारी नहीं थी। कुछ हजम नही होती। टीवी हर कोई देखता है, चाहे गरीब हो, इस विषय पर विज्ञापन भरपूर दिखाए जाते है। मुंबई जैसे महानगर में चाहे कोठी में रहे या झुग्गी में, टीवी हर जगह मौजूद है। सोच बदलिए, जी हां असुरक्षित यौन संबंध बनाने वालों को अपनी सोच बदलनी पढेगी।

Friday, December 16, 2011

मंहगाई दर

मंहगाई दर के आंकडे घोषित हुए। कहते हें कि चार साल के रिकार्ड निचले स्तर पर मंहगाई दर है, वो भी सिर्फ 4.29 प्रतिशत। रिटेल में तो दूध, घी, दालों, अनाज, आटा के रेट तो पुराने रिकार्ड स्तर पर हैं। सरकार मालूम नही, क्यों अपनी पीठ खुद धपधपा रही है। जनता सोचती है, यह मंहगाई दर और आंकडे किस चिडिया का नाम है, कि वह फुर से उड जाती है और आम जनता परेशान रहती है। कम से कम रिटेल में तो मंहगाई कोई कम करे।

बुढापा

कुछ उम्र में बढ़ गया कुछ जिस्म ढल गया कुछ पुराना हो गया कुछ बुढापा आ गया कुछ अनुभव आ गया कुछ कद्र भी पा गया...