Saturday, December 17, 2011

अब तो सोच बदलिए

नवभारत टाइम्स के 16 दिसम्बर के संपादकीय “अब तो सोच बदलिए” पढ कर एक सोच उतपन्न हुई, कि कौन सी सोच बदलें और कौन बदले। किस विचारधारा का अनुसरण करें। कौन सही है। प्रश्न कई हैं, परन्तु कोई उत्तर नही मिल रहा है। उत्तर मिलना मुश्किल भी है और नामुमकिन भी। यह ठीक है कि 15 वर्ष की उम्र की छात्रा ने गर्भ को गिराने के बजाए बच्चे को जन्म देने के साथ उसकी परवरिश भी करने का निर्णय लिया है। निर्णय बेशक साहसी है, क्योंकि इस उम्र की लडकियां या तो अनचाहे गर्भ को समाप्त करती हैं, या फिर जन्म के पश्चात बच्चे को त्याग दिया जाता है। कोई भी कह सकता है कि स्टीव जॉब्स, कबीर या कुंती पुत्र कर्ण का उदहारण दे कर कह सकते है, कि ऐसे बच्चे प्रतिभाशाली होते है। आप खुद गिनती किजिए, कि लाखों ऐसे बच्चों में कुछ अपवादों को छोड कर बाकी का हाल कोई सोच सकता है, कि क्या हुआ होगा।

मूल प्रश्न है, कि क्या विवाह से पहले सेक्स उचित है। भारतीय समाज इसको मना करता है। सेक्स विवाह के पवित्र बंधन के पश्चात ही उचित है, इसलिए उचित उम्र में विवाह होना जरूरी है। आज के आधुनिक समाज में, विशेषकर शहरों में बढी उम्र तक विवाह नही करते। लिवइन रिलेशनशिप या फिर बिना किसी रिलेशन के भी सेक्स के बंधन में गिरफ्त हो जाते हैं। चाहै या अनचाहे गर्भ के बाद बच्चों का क्या भविष्य?

मुंबई की 15 साल की एक प्रेगनेंट छात्रा का बच्चे को जन्म देने का निर्णय सहासीय है। दसवीं में पढ़ने वाली छात्रा को इसके लिए अपनी परीक्षाएं भी छोड़नी पढ रही है। 17 साल के उसका वह दोस्त, जिसे वह बच्चे का पिता कहती है, सारी जिम्मेवारी से अपने को मुक्त कर लडकी से किनारा कर चुका है। उस लडकी से शादी भी नही करना चाहता है। शादी के नाम पर फिर एक प्रश्न उठता है, कि दोनो सरकार द्वारा तय उम्र से छोटे है। सरकार यह तो तय करती है, कि एक तय उम्र से पहले विवाह नही हो सकता है, परन्तु सेक्स करने से रोक नही पाती है। जो लडका अभी से मुकर रहा है, यदि विवाह हो भी गया, तो क्या पूरा जीवन लडकी और बच्चे को अपनाएगा? प्रश्न कई है, जिसका उत्तर देना आसान नही है। विवाहपूर्व सेक्स और विवाह की जिम्मेदारी में बहुत अंतर है। निसंदेह विवाह के पश्चात परिवार की जिम्मेदारी गंभीर विषय है, जो विवाहपूर्व सेक्स से आनन्द पाने से जुदा और विपरीत है।

लडकी साहसपूर्ण बच्चे को पालना चाहती है और अपने बच्चे को उसके पिता को सौंपने और उसे शादी के लिए मनाने की कोशिश करना चाहती है। उसे उम्मीद है कि सब कुछ ठीक हो जाएगा। बावजूद इसके, ऐसी स्थिति की किसी भी सूरत में तारीफ तो नहीं की जा सकती। हो सकता है, कि मीडिया में बात आने पर लडका झुक कर शादी कर ले, फिर भी लडकी की आने वाली जिन्दगी चुनौतियों से भरी हुई होगी।

हमारे देश में अभी भी दबे-ढंके तौर पर लड़कियों की कम उम्र में शादी काफी समय से होती चली आ रही है। वे कम उम्र में ही मां बनने के खतरे भी उठाती चली आ रही हैं। लेकिन विवाह का ठप्पा वगा होता है, परिवार साथ देता है, लडकी और बच्चे को अपनाता है। समय से पहले बनने वाले इस तरह के असुरक्षित यौन संबंध बता रहे हैं कि अब जरूरत इसे गंभीरता से समझने और नई पीढ़ी को समझाने की है कि किस तरह एक छोटी सी भूल उनकी पूरी जिंदगी को बदल डालती है। इस केस में भी लड़की का कहना है कि उसे प्रेगनेंसी रोकने के उपायों के बारे में जानकारी नहीं थी। कुछ हजम नही होती। टीवी हर कोई देखता है, चाहे गरीब हो, इस विषय पर विज्ञापन भरपूर दिखाए जाते है। मुंबई जैसे महानगर में चाहे कोठी में रहे या झुग्गी में, टीवी हर जगह मौजूद है। सोच बदलिए, जी हां असुरक्षित यौन संबंध बनाने वालों को अपनी सोच बदलनी पढेगी।

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