Friday, August 10, 2012

रक्षा


रक्षा

सुईवालान की तंग गली में नगमा तेज कदमों के साथ फराटे दार चाल से चल रही थी। सामने रास्ता रोक कर रहमान खडा हो गया। नगमा कुछ नही बोली, साईड से निकलने की नाकाम कोशिश की। रहमान ने नगमा का हाथ पकड लिया।
जानेमन, कब से इंतजार कर रहे है, दिल हथेली पर रखा हुआ है, तडपा कर कहां चली जा रही हो।
नगमा कुछ नही बोली और मौका पा कर साईड से निकल कर भागी, सांस फूल गई, लेकिन भागना नही छोडा। रास्ते में तीन, चार जन से टकरा भी गई। घर पहुंच कर चौखट पकड कर खडी हो गई। सांस फूल रही थी, हांफते हुए दो पल रूकी, फिर घर में प्रवेश किया। घडे में गिलास डाल कर पानी निकाला और गट से पी गई। सलमा राखियां बना रही थी। इस बार अच्छा ऑर्डर मिला। सलमा खुश है, कि ईद अच्छी मनाएगी। नगमा को गुमसुम देख कर पूछा कॉलिज से आ गई, क्या खाएगी।
अभी कुछ नही खाना है, तुम क्या कर रही हो।
इस साल राखियां बनाने का बडा ऑर्डर मिला है। ईद अच्छी जाएगी, बता क्या लेगी ईद पर।
मां को खुश देख कर अपना दर्द भूल गई। सुईवालान की एक पुरानी हवेली के एक छोटे से कमरे में सब कुछ है। कमरा भी, एक तरफ रसोई। बाथरूम, टॉएलेट कॉमन है, सब के साथ। तीन छोटे भाई बहन बाहर उछल कूद कर रहे होगें। अब्बा जुम्मन को घर परिवार से कोई ताल्लुक नही है। दिन में जो कमाना, शाम को शराब में उडाना। बीवी, बच्चों की परवाह किए जमाना बीत गया था। घर का खर्च सलमा छोटे मोटे काम करके बस पूरा कर ही लेती है। रात में जुम्मन ने घर क्या प्रवेश किया, हंगामा खडा कर दिया, एक तो खराब का नशा, ऊपर से गली के लोगों ने नमक मिर्च लगा कर रहमान का किस्सा सुना दिया।
जानती नही, रहमान को, उससे उलझ गई, सुईवालान में रहना दूभर कर देगा। कह देता हूं, अगर रहमान से कोई पंगा लिया, चुपचाप बात मान ले रहमान की।होश था नही, धम से चारपाई पर औंधा लेट गया।
बाप की बात सुन कर नगमा का तन बदन आग से सुलग गया। ऐसे बाप होते हैं, एक नंबर का आवारा, बदमाश लडकी को छेडता है, बाप कहता है, कि उसकी मान ले, रख कर एक देना था उसको।
सलमा ने टोका चुप कर, कोई फायदा नही है, चारपाई पर औंधा पडा है।
मां बेटी रात को रहमान के बर्ताव पर चर्चा करती रही। नगमा ने दो टूक कह दिया, कि वह रहमान के आगे नही झुकेगी, वह सलमा से पूरा सहयोग चाहती है। उसका सपना पढ लिख कर कुछ करने का है। उसके निकाह की बात दिल से ही निकाल दे। सलमा भी सोचने लगी, उसको क्या मिला, छोटी उम्र मे निकाह, चूहले और बच्चों की परवरिश की सारी जिम्मेवारी उठा रही है, पति से क्या मिला, सिर्फ चार बच्चे। बेटी कुछ बन जाए, वही अच्छा है। उसका जमाना कुछ और था, लेकिन अब मुसलमान परिवारों से लडकियां टीवी रिपोर्टर, जर्लनलिस्ट बन रही है। समाज में इज्जत है।

सुबह जुम्मन उठा, नशा टूटा, पडोसियों की कानाफूसी से क्रोध बढ गया। कमरे में घुस कर आसमां सिर पर चढा लिया। दो चार लात जमा कर बर्तनों को तहस नहस किया, शोर मचाया। पडोसी बाहर जमा होकर तमाशा देखने लगे। नगमा ने मां से कहा अब्बा से कहो, घर से चले जाए, ऐसे घर का समान तोडने से कोई इज्जत नही बढेगी। बीवी की कमाई पर शराब उडाने वालों की कोई परवाह नही करता है। मेरे बारे में कुछ न बोले। मैं अपना रास्ता खुद बना रही हूं। अगर मेरे रास्ते में टांग अडाई, तो अच्छा नही होगा।कह कर किताबे उठाई, अम्मी कॉलेज जा रही हूं।
नाश्ता।सलमा ने पूछा।
कॉलेज केंटीन में।
रूक जा। दस मिन्ट में नाश्ता बन जाएगा।
नगमा रूकी नही। कॉलेज की ओर रवाना हुई। सुईवालान से जाकिर हुसैन कॉलेज दो किलोमीटर का सफर कूंचे, गलियां से पैदल ही पूरा होता है। उदास मन से क्लास छोड कर कैंटीन में एक कोने की टेबल पर बैठ गई। भूख लग रही थी, लेकिन खाने का दिल नही कर रहा था। प्रकाश कैंटीन में नगमा को देख कर उसके पास कुर्सी खींच कर बोला। आज क्लास नही है, क्या?”
नगमा ने अपना दुखडा छुपा कर पढाई की बातें शुरू की। प्रकाश नगमा की क्लास में पढता था। रिहाईश भी सुईवालान के समीप बाजार सीताराम में थी। प्रकाश पढने के साथ ट्यूशन भी करता था, इससे वह अपनी पढाई का खर्च पूरा करके कुछ घर में योगदान भी कर देता था। प्रकाश को देख कर नगमा ने भी ट्यूशन करके अम्मी का कुछ बोझ कम करने की ठान ली। समस्या अब्बा, अडोस पडोस की थी। अब उसने ठान ली, कोई कुछ भी कहे, समाज ने सिर्फ ताने ही मारने हैं। कहने के अलावा कुछ नही करना है। उसने अपना रास्ता खुद ही बनाना है। उसने प्रकाश से कुछ ट्यूशन दिलवाने को कहा। पांच दिन बाद प्रकाश ने दो छोटे बच्चों की ट्यूशन की बात की। बच्चे कूचा पातीराम में रहते थे। नगमा ने हामी भर दी। शाम को अम्मी से बात की। सलमा ने हामी दी। वह खुद कामकाजी महिला, जिस का पति, सिर्फ कमाई को शराब में फूंकना जानता था। जुम्मन को पता चला, तो बवाल मचाया। मेरी लडकी हिन्दू घर में बच्चे पढाने नही जाएगी। हवेली जमा हो गई। सब तमाशबीन, आग में घी डालने के अलावा कुछ विशेष नही किया। सलमा ने मोर्चा सम्भाला। जुम्मन की ओर ईशारा कर के कहा।
ऑटो चलाते हो, सवारी को पूछ कर बिठाते हो, वो हिन्दू है या मुसलमान। मैं कपडे सिलती हूं, कौन पहनेगा। मैं नही सोचती। घर चलाने के लिए राखियां बना रही हूं, सब जानते है, कोई मुसलमान नही खरीदेगा, मेरा तो चूल्हा जलता है, इन राखियों से। ये कपडे देखो, भगवान कृष्ण के। सिलती हूं, ताकी मेरे घर का चूहला जलता रहे, बच्चों की स्कूल फीस जाती रहे।
जुम्मन की बोलती बंद हो गई। सलमा ने एक मिंया को कहा। तुम तो बडाई हो, कभी किसी हिन्दू का काम नही किया? और फिर दूसरे मियां से कहा तुम सफेदी करते हो, क्या कभी किसी हिन्दू के घर सफेदी नही की?”
सलमा के प्रश्नों का किसी के पास कोई उत्तर नही था। सब खिसक गए। सलमा की बातों में सोलह आने सच्चाई है।  जब कमाई की बात होती है, कोई जात पात, धर्म नही सोचता, सोचता है, सिर्फ रूपयों की। रूपया कमाने के बाद दूसरों को धर्म का पाठ पढाता है। नगमा ने ट्यूशन शुरू कर दी। अपनी पढाई का खर्च निकाल कर सलमा के हाथ में बाकी रूपये रखे तो सलमा गद गद हो गई।

एक शाम नगमा ट्यूशन पढा कर घर वापिस आ रही थी। गली में रहमान अपने कुछ छुटभईयों के साथ पनवाडी की दुकान पर खडा रौब झाड रहा था। नगमा को देख कर तन कर नगमा के आगे खडा हो गया। फिल्मी अंदाज में नगमा का हाथ पकड लिया जानी, रहमान नाम है, हमारा, रहमान।
छुटभईयों ने ठहाका लगाया भाई जान बोबी के प्रेम चोपडा की याद दिला दी। नगमा भाभी किसी डिम्पल से कम नही है।
नगमा ने हाथ छुडाने की नाकाम कोशिश की। रहमान ने नगमा को अपनी ओर खींचा और सीने से लगा लिया। नगमा हतप्रभ हो गई। छटपटाने लगी। छुटभईये ठहाके लगा रहे थे। गली में भीड थी, लेकिन छटे हुए बदमाश रहमान का सामना करने की कोई हिम्मत नही कर पाया। प्रकाश ट्यूशन खत्म करके वहीं से गुजरा। भीड को देख कर ठिठक गया। बेबस भीड को देख कर रहमान की हिम्मत बढ गई। सुन लो सुईवालान वालों, आज से नगमा मेरी बेगम, शरीकेहयात हुई। किसी को कुछ कहना है। कुछ नही कहना न, शाबाश, सुईवालान वालों, शाबाश।
रहमान शेखी बखार रहा था, बंधन से मुक्त हो नगमा हडबडाई और भागने का प्रयत्न किया। प्रयास असफल रहा, वह गिर पडी। भीड से निकल कर प्रकाश ने कुछ हिम्मत दिखा कर कहा। नगमा को छोड दो।
क्यों तेरी बहन है, क्या?” कह कर रहमान ने ठहाका लगाया।
सलमा तभी राखियां सप्लाई करने के लिए गुजरी, नगमा अम्मी से लिपट गई और हाथ से थैले में से एक राखी निकाल कर प्रकाश के हाथ पर बांध दी।
चितौड की रानी करनावती ने हुमांऊ को रक्षा के लिए सिर्फ राखी भेजी थी। मैंने बांध दी है।
तेरा हुंमाऊ कुछ नही कर सकेगा।कह कर जोर से ठहाका लगाया। रहमान घमंड के नशे में झूम रहा था। हाथ में राखी बांधे प्रकाश में बिजली से भी अधिक तेजी और बल आ गया। हाथ की किताबों को रहमान के मुंह पर दे मारा। अचानक हमले से रहमान संभल नही सका और पास पढे ठेले से जा टकराया। प्रकाश ने दो चार घूंसे उसके पेट और मुंह पर दे मारे। बिना किसी प्रतिरोध के रहमान धाराशाही हो गया। उसके छुटभईये बगलें झाकने लगे। रहमान को चित देख सलमा और नगमा ने भी पिटाई शुरू कर दी। बहती गंगा में सब हाथ धोते हैं। दो चार राहगीर भी रहमान की पिटाई में शामिल हो गए। भीड से धिरा देख छुटभईये भाग खडे हुए। रहमान कहारता रहा, कोई मदद को नही आया। नगमा और सलमा वीरागंना की तरह गर्व से सीना ताने भरी गली में प्रकाश का हाथ थामे कहने लगी। हमारे भाई ने लाज रख ली।
नगमा और सलमा की आंखे नम थी। प्रकाश ने हाथ जोड कर कहा मैंने नगमा की बांधी राखी का मान रखा है।     
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