Sunday, November 11, 2012

शादी

रविवार के दिन ताऊ सुबह सुबह चाय पी रहे थे। चाय की चुस्कियों के बीच अखबार भी पढा जा रहा था। तभी आंख मलता हुआ ताऊ का लाड़ला भतीजा रणबीर ताऊ के पास खाट पर बैठ गया। 
क्यूं आंखें मल रहा है? रणबीर नींद नहीं खुली क्या?”
ताऊ देर रात तक मैं फिल्म देख रहा था टीवी पर। क्या बताऊं बड़ी ज़ोरदार फिल्म थी ताऊ।
तभी नींद नहीं खुल रही है तेरी। कितनी बार बोला हैरात को टाइम से सो जाया कर। सुबह-सुबह सैर करने जाया कर ,लेकिन तू तो सुनता ही कहां है। एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकाल देता है। रात को देर से सोएगा तो सुबह नींद भी देर से ही खुलेगी नबहुत बिगड़ गया है तू।
देख ताऊ अब एक शनिवार की रात तो मैं फ़िल्म देखता हूं। बाकी दिन तो जल्दी सो जाता हूं। कभी देर नहीं करता ताऊ, तू तो जानता हैरोज़ स्कूल जाता हूं और कभी छुट्टी भी नहीं करता मैं। अब शनिवार की रात तो बापू भी मना नहीं करता हैफिर तू क्यों चिढ़ता है?
मुझे तो सारी फ़िल्मों की स्टोरी एक जैसी लगती है। बात वही बस घुमा-फिरा कर कहते है। फाइटिंग होती हैबिना मतलब के। क्या कोई एक आदमीदस-दस आदमियों से लड़ सकता हैयह देखकर दिमाग तो खराब होता ही है और साथ में टाइम भी। इसलिए मैं तो कोई फिल्म-सिल्म नहीं देखता।

तभी रणबीर ने ताऊ से अख़बार का एक पन्ना लिया और पढ़ते हुए बोला, “ताऊ तूने यह खबर पढ़ी क्याटीवी वालों ने तो हंगामा मचा रखा है।
कौन सी खबर रणबीर?”
वही एक हिंदुस्तानी मेम से शादी कर रहा है।
तू कौन सी नई बात बता रहा हैबहुत सारे हिंदुस्तानियों ने ऐसी शादी रचाई है।
यह तो बहुत बड़ी स्पेशल खबर है ताऊ। पहले तो उस हिन्दुस्तानी ने मेम से विलायत में शादी की और अब हिन्दुस्तान में आकर उसी मेम से फिर शादी रचा रहा है। करोड़ों रुपए खर्च कर रहा है।
रणबीरतू खबर ठीक तरीके से नहीं पढ़ रहा हैबड़ा चालाक है वो हिन्दुस्तानी। लगता है विलायत में रहकर गोरे लोगों से चालाकी सीख गया वह। अपनी जेब से एक पैसा भी खर्च नहीं किया।

सारा पैसा विडियो राइट्स बेचकर निकाल लिया। पैसा दूसरों का और शादी अपनीवह भी राजाओं-महाराजाओं की तरह। हम तो पड़ोसियों और रिश्तेदारों की शादी से जलते हैं कि उसने इतने पैसे खर्च कर दिए। नाक का सवाल बना लेते हैंहम हिन्दुस्तानी। सोचते हैं कि फलाने की शादी से ज्यादा खर्च करेंगे। ऐसे में हम हिंदुस्तानियों को उस विलायती हिन्दुस्तानी से सबक लेना चाहिए।

देख रणबीर चाहे अपनी हैसियत हो या ना हो, पर शादी में हम दिल खोल कर खर्च करते हैं। पहले लडके लडकी का रिश्ता पक्का करते हैं, फिर सगाई और फिर शादी की रस्में। ये धूम धाम कम से कम चार पांच दिनों तक तो चलते ही हैं। धूम धडाके, घोडी, बैंडबाजे का खर्च, रिश्तेदारों को उपहार का खर्च। सारी जिंदगी हम इस बात को सोचकर परेशान होते रहते हैं कि बच्चा पैदा तो हो गयाअब शादी का खर्चा कहां से पूरा होगा।
कैसे ताऊ?”
जेब में पैसे हों या ना होंशादी में खर्चा पूरा होगाचाहे इसके लिए पैसे उधार ही क्यों न लेना पड़ जाए।
देख रणबीरयदि तू बच्चों की शादी के लिए उधार लेगा तो चुकाएगा कबपूरी जिंदगी तो बचा नहीं पायाअब कमाने की उम्र बीत गई तो घर का खर्च पूरा करेगा या बचाकर उधार वापस करेगा। जब सारी उम्र नहीं बचा सका तो बुढ़ापे में क्या बचाएगा रणबीर।
हां ताऊ तूने सही कहालेकिन कुछ ज्यादा समझ में नहीं आया।
रणबीर जब पूरी जिंदगी घर का खर्च पूरा न कर सकातो बचेगा कैसेयही हाल शादी के बाद भी जारी रहेगा। कैसे बचाएगा और कैसे शादी का कर्ज़ उतारेगाखुद तो कर्ज़ में डूब गयाबच्चे भी पूरी जिंदगी क़र्ज़ में डूब जाएंगे।
ताऊतेरे कहने का मतलब यह है कि शादी में खर्चा नहीं करना चाहिए।
बिल्कुल ठीक सुन रहा है तूशादी में खर्च करने का क्या फायदालोग आएंगे और खा पीकर इधर उधर की बातें कर के चले जाएगें। कुछ उल्टा सीधा कमेंट पास कर जाएगे, जिसे सुन कर हमारा दिल दुखेगा। बाराती तो चले जाएगें, घर में क्लेश छोड जाएगें।
मुझे समझ नहीं आ रहा है ताऊज़रा ठीक से समझा।
सुन रणबीरजब शादी होती है तब सारे रिश्तेदारोंयार-दोस्तोंपड़ोसियों को न्योता देते हैं कि शादी में आकर शान बढ़ाइए। सब आते हैं और सब यही चाहते हैं कि लाटसाहबों की तरह उनकी खातिरदारी हो। अगर दस पांच मिन्ट की भी देरी हो जाए तो उल्टा सीधा बोल कर आसमान सर पर उठा लेगें और घर में महाभारत का युद्ध करवा देगें। कुछ नाराज़ होकर चले जाएंगे तो कुछ मुंह बनाते नज़र आएंगे। शादी के वक्त हमसबको पैसे और कपड़े देकर विदा करने की रस्म पूरी करते हैं। किसी को कितना भी दे दोपर खुश कोई नहीं होता। कानाफूसी करते रहेंगे कि फलाने को ज्यादा और अच्छा दियाहमें कम और बेकार दिया। बस इसी बात पर नाराज़ हो जाएंगे सभी के सभी। कपड़ों को देखकर कहेंगे कि इससे अच्छा तो लोग भिखारियों को देते हैं। हम कोई मंदिर के आगे बैठे हैं कि कुछ भी हाथ में थमा दिया।
बस ताऊमेरी खोपड़ी में ये बातें अच्छी तरह से घुस गई हैं और तुझे वचन देता हूं कि अपनी शादी में किसी को भी नही बुलाऊंगा।
मुझे भी नहीं?“
अब ताऊमेरी शादी तेरे बिना कैसे हो सकती है?

ये सारी बातें ताई रसोई में बैठी सुन रही थी। कढ़ाई में पकौड़े तलते हुए आवाज़ लगाई, “अबकी बार कौन सी खिचड़ी पक रही है ताऊ और भतीजे के बीच?”
तेरे समझ की बात नहीं हैतू चुपचाप नाश्ता बना।
बात नहीं बताई तो जले हुए पकौड़े दूंगी नाश्ते में।
इससे ज्यादा मुझे तुझसे उम्मीद भी नही है।

नाश्ता करना है कि नहींताऊ से पूछकर बता दे रणबीर मुझे फटाफट।
ओहो ताऊ तू फिर ताई से उलझ रहा है।
और तेरे ताऊ को आता ही क्या हैजबसे रिटायर हुआ है आराम करता रहता है। लगता है सठिया गया है। रसोई से नाश्ते की थाली लाकर ताई ने ताऊ के सामने रख दी।
तू तो कह रही थी कि जले हुए पकौड़े खिलाएगी। मुझे नहीं खाने तेरे जले हुए पकौड़े।
रणबीर ने एक पकौड़ा मुंह में डालते हुए कहा, “ताऊ जादू है ताई के हाथों में है। ताई जैसे पकौड़े कोई नहीं बना सकता है। जान डाल दी है पकौड़ों में। मज़ा आ गया।
ताऊ ने मुस्कुराते हुए कहा, “ला रणबीर मुझे भी खिला दे ये जादू वाले पकौड़े।

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