Sunday, February 24, 2013

नन्ही

नवजात शिशु के रोने की आवाज के साथ सीमा लेबर पेन को भूल गई। शिशु के जन्म होते डाक्टर ने नर्स को टाइम देखने को कहा। लडकी हुई है। यही बातें डाक्टर की सुनाई दी। थोडी देर बाद लेबर रूम के बाहर सुधीर प्रतीक्षा कर रहा था। नर्स के हाथों में नवजात शिशु को देख कर सुधीर तन कर खडा हो गया। लडकी हुई है। जहां सीमा लडकी के जन्म पर कुछ मायूस हुई थी, वहां सुधीर का चेहरा खुशियों से दमक गया। जेब से रूपये निकाल कर नवजात शिशु पर न्योछावर कर नर्स, वार्ड बाए, मेड को दिए।

एक राहत की सांस लेकर कुर्सी पर बैठ गया। मस्तिषक कुछ बीते दिनों का विशलेषण करने लगा। जिन्दगी के अजीबो गरीब रंग देख कर आज उसे किसी से कोई नाराजगी नही थी, बस हैरानी थी। उम्र कोई अठाईस साल में ही अनुभवों का खजाना हासिल कर लिया था। परिवार में सब को दौलत, गहनें, संपति मिली, उसे क्या मिला, सिर्फ शहर से दूर लगभग जंगल सी जगह में, एक गांव में जगह। बचपन में दादा जी के साथ नवगांव की कोठी में अक्सर गर्मियों की छुट्टियों में रहने आता था। दादा जी ने शहर से दूर एक छोटे से गांव में कोठी बनवाई थी, एक सैर गाह, आराम की जगह। प्रकृति के समीप सुधीर को बहुत अच्छा लगता था। दादा, पोता में एक सामानता थी, वह प्रकृति से प्रेम। इस कोठी में परिवार को और कोई स्दस्य रहने में रूचि नही दिखाता था। दादा जी एक साथ राशन डाल कर पोते सुधीर और एक रसोईये के साथ पूरी गर्मियों की दो महीने की छुट्टियां बिताते थे। दादा जी मरते समय कुटिया पोते सुधीर के नाम लिख गए, इसलिए सुधीर को एक आशियाना मिल गया। वरना कोई एक पाई भी सुधीर को देने को तैयार हुआ। सारे दोष मढ दिए, व्यापार में सब हिस्सा लेते थे। जब तक मुनाफा होता रहा, सुधीर सबसे अच्छा था, एक दो टेंडर हाथ से क्या निकले, सुधीर को निक्कमा घोषित कर दिया। दादा जी रहे नही, बडे भाई, बहनों ने सारा दोष सुधीर पर मढना शुरू किया, थोडे समय में माता पिता भी उसके विरूध हो गए। कमाऊ पूत सबको प्यारा लगता है। कमाऊ तो आज भी है, क्षमता पूरी है, लेकिन व्यापार में कभी मुनाफा, तो कभी घाटा। नुकसान उसके माथे मढना सुधीर के आत्म सम्मान पर चोट कर गया और उसने परिवारिक व्यवसाय से अलग होना ही उचित समझा। उसके हिस्से कुछ नही आया। खैरात पसन्द न थी। एक बार सोचा, कि मुकदमा कर दे, सबको नानी याद आ जाएगी। भगवान कृष्ण ने अर्जन को यही कहा था। कोर्ट कहचरी में सालों लग जाते है, फैसले आने में, समय और पैसे की बर्बादी अलग। वकील चांदी काटेगें। अगर वह उतना समय और पैसा व्यापार में लगा दें, तो अच्छा रहेगा। माता पिता को कोर्ट में घसीटना नही चाहता था। दूघ का कर्ज मुकदमा नही, नमस्तक हो कर अलग होने में ही है।

पुरानी यादों का सिलसिला दस मिन्टों बाद नर्स ने तोडा। आप रूम लीजिए, थौडी देर में रूम में शिफ्ट करेगें। रिसेप्शन में जाकर कमरा अलॉट करवाया। रूम में आकर गिलास उठाया, फ्रिज में से पानी की बोतल निकाली। पानी के दो गिलास पिए और फिर से कुर्सी पर धम से बैठ गया। फिर यादों में खो गया। निकम्मा है, सुधीर, कोई हक नही है, घर में उसके रहने का। जब बटवारा हो गया, तो कहो इसे घर से जाए। देर किस बात की। रहने को अलग घर दे तो दिया है। बडे भाईयों की बात पर मां बाप ने भी सहमति जताई और कहा, कि प्रस्थान का समय आ गया है।

पापा, अठाईस साल आपके साथ रहा हूं, दो तीन महीने और रहने की अनुमति चाहता हूं। सीमा गर्भवती है, बच्चे के जन्म तक रहने की इजाजत चाहता हूं, बच्चे के जन्म के बाद मैं चला जाऊंगा।

भाई बहने तो उसे उसी समय रूकसत कराने पर तुले थे, पर सुधीर ने दो टूक कह दिया कि जोर जबरदस्ती से वह डरने वाला नही है। जब सबका एक तरफा नाइंसाफी फैसला स्वीकार कर लिया है, वो भी यह स्वीकर कर लें। सुधीर के तेवर देख कर सब चुप हो गए।

आज सुबह अस्पताल आए। सीमा ने लक्ष्मी जैसी लडकी को जन्म दिया। सुधीर के सीने से एक चट्टान का बोझ उतर गया, कि आज के बाद एक स्वत्रंत जीवन व्यतीत होगा। आजाद पंक्षी की तरह आकाश में विचरण होगा। किसी के आधीन काम नही करना होगा, जो निर्णय होगा, उसका परिणाम, फल उसको मिलेगा। अच्छा, बुरा, नफा, नुकसान उसी का होगा। वह तो परिवार के साथ रहना चाहता था, लेकिन सब खिलाफ हो गए। खैर, जो प्रभु की इच्छा।
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