Wednesday, February 27, 2013

गणेशवन्दना


गणेशवन्दना

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ
निर्विघ्नं कुरू मे देव सर्व-कार्येषु सर्वदा

हे टेढी सूंड और विशाल शरीर धारी (गणपति महाराज) आप का तेज करोडों सूर्यों के समान है। हे देव (परमेश्वर) मेरे सभी कार्यों को सदा विघ्न (बाधायों) से (कृपापूर्वक) रहित कीजिए।

O, Lord Ganesha! Of curved trunk, of large body and with the brilliance of a million of suns. O God! (Ganesha) ward off obstacles from all ventures that I perform.
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हुए हैं जब से शरण तुम्हारी

हुए हैं जब से शरण तुम्हारी , खुशी की घड़ियां मना रहे हैं करें बयां क्या सिफ़त तुम्हारी , जबां में ताले पड़े हैं। सु...