Sunday, April 28, 2013

मृत्युन्जय मन्त्र



मृत्युन्जय मन्त्र

ओम त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिम पुष्टिवर्धनम
उर्वारूकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात

तीन नेत्रो वाले, सुगन्ध से युक्त तथा उत्तम स्वास्थय प्रदान करने वाले शिव जी की हम पूजा करते हैं। जैसे ककडी जो पकने के पश्चात बेल से स्वत: ही अलग हो जाती है उसी प्रकार हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करवा कर अमरत्व प्रदान करें।

Mrtyunjaya Mantra

Om! (O, God)
We worship Lord Shiva having three eyes, who is full of fragrance and who gives good health to all. May He liberate me from death granting me immortality just as the ripe fruit cucumber (kakri) is severed automatically from its creeper.

बुढापा

कुछ उम्र में बढ़ गया कुछ जिस्म ढल गया कुछ पुराना हो गया कुछ बुढापा आ गया कुछ अनुभव आ गया कुछ कद्र भी पा गया...