Sunday, September 29, 2013

तबीयत

गर्मी के दो महीने, मई और जून में स्कूल बंद हैं। सूरज और सरिता सारा दिन खेलने, कूदने में ही व्यतीत कर रहे हैं। पिता चंदगी राम तो व्यापार, दुकान में ही उलझे रहते हैं। मां चंपावती के लिए सारा दिन बच्चों को संभालना ही मुश्किल पढता है। पति चंदगीराम को इतने बडे व्यापार के उतार चढाव में अकेले जूझते देख चंपावती परेशान हो जाती थी। बच्चों को संभालना, बडी हवेली की देखभाल, नौकरों के साथ झिकझिक में खुद सारा दिन उलझी रहती थी।

सेठ चंदगीराम व्यापार की उलझनों के बीच घर से लगभग बेखबर ही थे। व्यापार को संगठित करने के लिए दूसरे शहरों में व्यापारियों से मिलने, रकम वसूली के लिए बाहर अधिक रहने लगे। स्कूल में पढने वाले बच्चों को व्यापार से कोई सरोकार नही। उनकी हर जरूरत का ध्यान जरूरत से अधिक चंदगीराम रखते थे। व्यापार में उलझे चंदगीराम को घर और परिवार की भी उतनी चिन्ता रहती थी, जितनी व्यापार की। बिना लक्ष्मी घर सूना, चंदगीराम बखूबी जानता था। इसीलिए घर, बच्चों को चंपावती के हवाले करके खुद निश्चिन्त रहते थे। चंपावती पति को कभी कभी परेशान देख कर चिन्तित हो जाती थी। एक सप्ताह टूर पर रहने के बाद चंदगीराम जब देर रात घर पहुंचे, तो काफी थकान महसूस हुई। चंपावती नें पति को पानी देने के बाद कहा।

मैं खाना लगाती हूं, कुछ आराम करो। अपनी सेहत की चिन्ता आपने छोड रखी है।
चंपा, व्यापार जरूरी है। उस की देखभाल और परवरिश मैंने करनी है।
वह तो ठीक है, लेकिन उतना करो, जितना संभाल सकते हो। सेहत के साथ खिलवाड नही करने दूंगी। आप कुछ दिन घर पर रह कर आराम करो। बाहर नही जाना है।

रात में चंदगीराम पानी पीने के लिए उठे। कमजोरी के कारण लडखडा गए। चंपा की नींद खुल गई और नाराज हुई कि उसको आवाज क्यों नही दी।
चंपा, कुछ नही है, तुम तो बेकार में नाराज हो रही हो। प्यास लगी, पानी पीने के लिए उठा।
बात पानी पीने की नही, बल्कि तबीयत की है। मुझे चिन्ता हो रही है। बहुत कमजोर लग रहे हो। ठीक तरीके से खडे भी नही हो पा रहे हो। आप बस आराम करो। सुबह डाक्टर दिखाना है, सबसे पहले। अब सो जाऔ। किसी भी चीज की जरूरत हो, मुझे उठाऔ।

चंदगीराम कमजोरी महसूस कर रहे थे। चुपचाप बिस्तर पर लेट गए। आंखों में नींद नही थी, अजीब अजीब से ख्याल आ रहे थे, दिमाग में उलझनों की बारात आ चुकी थी। व्यापार की उलझनें सेहत पर असर आज दिखा गई। भोर बेला में उलझनों के बीच चंदगीराम को नींद आई।

सुबह चंपावती ने बिस्तर छोडा। पति को गहरी नींद में सोया देख जगाया नही। चंपावती गृहकार्यों में व्यस्त हो गई, परन्तु दिमाग चंदगीराम की ओर ही था। करीब दस बजे चंपावती ने पति के माथे पर हाथ रखा। चंदगीराम का शरीर पसीने से तरबतर था। चंदगीराम ने धीरे से आंखे खोली।
कैसो हो?
ठीक हूं।
नही, तबीयत ठीक नही है। मैने डाक्टर को फोन कर दिया है, अभी क्लीनिक में कुछ मरीज हैं, थोडी देर में आप को देखने आ रहे हैं।
डाक्टर की कोई जरूरत नही है. मुझे कुछ नही हुआ है। नहा कर फ्रेश होता हूं।
कोई जरूरत नही हैं, बिस्तर से उठने की। आपकी शक्ल दर्शा रही है तबीयत। जब तक डाक्टर आपका मुआइना नही करता, में आपको कहीं नही जाने दूंगी।चंपावती ने पति को बिस्तर पर लिटा दिया।

थोडी देर में डाक्टर ने आकर चंदगीराम का चेकअप किया। डाक्टर थोडा मजाकिया था, परिवार से बहुत हिला मिला था। फैमिली डाक्टर परिवार का एक हिस्सा था।
चंदगी, एक चेक पर साईन कर दे।
क्या हुआ, पैसो की तंगी आ गई है?”
भई, ज्यादा कमाने लगे हो, कुछ दोस्तों का भी भला कर दो।
चंपा दोनों की बाते सुन कर मुसकुरा दी।
जो लक्षण नजर आ रहे है, वो तो रईसों को ही होते हैं। मैं लैब को बोल देता हूं, ब्लड, यूरीन के सैंपल घर से ले जाएगा। ईसीजी कर दी है। बिस्तर से उठोगे तो कल एक्स रे और स्कैन भी करवाने हैं।
"हुआ क्या है, डाक्टर,, पहेलियां कयों बूझ रहे हो?”
भाभीजी, पति का पूरा ध्यान रखना शुरू कर दो, पल्लू से बांध कर रखने का समय आ गया है। ब्लडप्ररेशर अधिक है, अभी से ध्यान न रखा तो सीधे दिल के मरीज बन जाऔगे। मेरी बात सुन, थोडा आराम कर। यहां रह कर तो तू कर नहीं सकेगा। हिल स्टेशन चलते है। मजा आएगा, जब एक साथ वादियों का हसीन मजा लेगें, दो यार।
कौन से दो यार।
हम और तुम, और कौन। बिजनेस से दूर। मैं रहूंगा, तब कम से कम मेरे सामने बिजनेस की तरफ तो नही झाकेंगा।कह कर डाक्टर हंसने लगा।
डाक्टर फ्री में जाएगा।
फीस भी लूंगा और फ्री में हिल स्टेशन की सैर भी करूंगा। हा, हा, हा....कह कर डाक्टर कमरे से बाहर आकर चंपा से बोला भाभी जी, मेरी बातों को गौर से सुनो, जो कहा, वह गंभीर है। वह काम करे, लेकिन बोझ न ले, इसका आपको ध्यान रखना है।

डाक्टर चला गया। दो दिन में सभी टेस्टों के नतीजे आ गए। डाक्टर का अनुमान सही निकला। चंदगीराम को आराम की सख्त जरूरत थी। बॉर्डर लाईन पर टेस्टों के रिजल्ट थे। चंपावती ने एक सप्ताह के बाद मसूरी जाने के लिए सभी प्रबंध करे। बच्चे सूरज और सरिता की खुशियों से ओतप्रोत थे, कि वे मसूरी जा रहे है।  
Post a Comment

मौसम

कुछ मौसम ने ली करवट दिन सुहाना हो गया रिमझिम बूंदें पड़ने लगी आषाढ़ में सावन आ गया गर्म पानी भाप बन कर उड़ गया ...