Saturday, November 02, 2013

धनोलटी

दो टैक्सियां हवेली के दरवाजे पर खडी है। चंपावती ने एक टैक्सी में सामान रखवाया। सामान के साथ दो नौकर मसूरी के पास धनोलटी के लिए रवाना हुई। दूसरी टैक्सी में चंदगीराम, चंपावती, सूरज, सरिता और डाक्टर घोष रवाना हुए। देहरादून के बाद घुमावदार छोटी छोटी पहाडियों के बीच से गुजरते हुए मसूरी होते हुए धनोल्टी पहुंचे। रिजार्ट में एक बंगला बुक था। नौकरों ने सारा सामान पहले ही कमरों में लगा दिया था। एक कमरा चंदगीराम और चंपावती के लिए। एक बच्चों सूरज और सरिता के लिए और एक डाक्टर घोष के लिए।

शाम हो चुकी थी, सफर की थकान के कारण चंदगीराम आराम करने के लिए बिस्तर पर लेट गए। कुछ देर के लिए गहरी नींद आ गई। चंदगीराम को सोता देख डाक्टर ने कहा भाभी जी, चंदगी जितना आराम करेगा, उतना ही अच्छा है, इसी कारण यहां एकान्त में कुछ दिन रहने का कार्यक्रम बनाया। आप चंदगी से बातों बातों में जानने की कोशिश करना, कि किस कारण चंदगी के जीवन में तनाव है। उस तनाव को दूर करना जरूरी है। उस को तनाव नही आना चाहिए। तनाव से तबीयत बिगड सकती है।

रात को आठ बजे के आसपास चंदगीराम की आंख खुली। काफी दिनों के बाद आज चंदगीराम हलका महसूस कर रहा था। शोरगुल से दूर सर्द हवा हलके हलके चल रही थी। शाल ओढ कर चंदगीराम कमरे से बाहर आया। लॉन में डाक्टर घोष ने बोनफायर का प्रबंध कर लिया था। चंदगी को देखते कहा आऔ यारो के यार हमारे हमदम, एक प्याला, एक नवाला, सब आपके लिए ही है।
क्यों शायरी कर रहे हो, मेरी शायरी तो मेरे साथ है, एक बात बता, शायरी तो खूब करता है, शादी क्यों नही की।
लडकी तो बता, शादी तो अभी कर लूं।
बुठ्डे से शादी करके किस्मत को कौन फोडेगा। किसको इंजेक्शन लगाया है, तुमने, जो तुम से शादी करने को तैयार हो जाएगी।  
कल मसूरी के माल रोड पर घूमने जाऊंगा, गर्मियों की छुट्टियों में बहुत खूबसूरत लडकियां मसूरी सैर सपाटा करने आई है। किसी को तो इंजेक्शन लगा ही दूंगा।

डाक्टर घोष की बातों पर चंदगीराम खिलखिला कर हंस दिया। पति को बहुत दिनों के बाद हंसते देख चंपावती की चिन्ता दूर हुई, कि डाक्टर का बताया इलाज काम कर रहा है। पति को तनाव से दूर रखने के लिए कुछ पल व्यापार से दूर रखना भी आवश्यक है।

लॉन में बोनफायर के ईर्द गिर्द कुर्सियां बिछा कर सब गपशप में मशगूल हो गए। सूरज और सरिता अंताक्षरी खेलने लगे। बीच बीच में चंदगाराम भी उनका साथ देने लगे। यह देख कर डाक्टर घोष और चंपावती भी अंताक्षरी में शामिल हो गए। धीरे धीरे रात का कोहरा घना होने लगा। आग की ताप से ठंड से राहत मिल रही थी। वहीं रात का खाना समाप्त करने के बाद भी किसी का दिल कमरों मे लौटने का नही था। जब आग की तपिश कम हो गई, तब आधी रात को सभी उठे और सोने के लिए बिस्तरों में दुबके।

सुबह चंदगीराम तरोताजा सवा छ बजे उठ गए। शाल ओढ कर कमरे से बाहर आ कर लॉन में टहलने लगे। डाक्टर के कमरे में दस्तक दी। डाक्टर, सोता रहेगा, या फिर उठेगा।
डाक्टर कमरे से बाहर आकर बोला एक ही रात में शेर हो गए। मेरा नुक्सा काम आ गया। रूक अभी आ रहा हूं।
कैसा महसूस कर रहे हो।
ऐसा लगता है, कि एक ही रात में काया पलट हो गई है। डाक्टर पहले अपना नुक्सा क्यों नही बताया?”
फीस लगती है, मुफ्त में इलाज नही होते। पहले फीस दी होती, तब इस से भी अच्छा बताता, लेकिन देर से आए, लेकिन दुरूस्त आए।
कितनी फीस लेगा।
भई, कोई ज्यादा तो लेनी नही है। सबसे पहले यह मसूरी, धनोल्टी का ट्रिप फ्री। बाकी वापिस सहारनपुर चल के कर लेगें। जल्दी किस को है।
"हां डाक्टर कम से कम मुझे तो जल्दी नही है।
हां, भाई, तेरे को क्यों होगी, फीस जो देनी है।
फिर दोनो जोर से खिलखिला कर हंस दिए। चंपा पति को हंसता, खिलखिलाते देख बेफ्रिक हो गई। जान है तो जहान है। खुद इलायची, अदरक वाली चाय बना कर चंपा लॉन में गई। कुर्सियां खींच कर सभी बैठे। चाय की चुस्कियों के बीच डाक्टर घोष और चंदगीराम की नौक झौंक चलती रही।

धनोलटी की आबोहवा चंदगीराम को रास आई। दो दिनों में वह एकदम भला चंगा नजर आने लगे। हल्की गुनगुनी ठंड में चार दिन कैसे बीत गए, किसी को पता नही चला। दोपहर को पास की छोटी झील के पास बैठ कर प्रकृति को निहारते। दरखतों के बीच से सूरज की छटती किरणों का लुत्फ उठाते गप्प शप्प में काटते चंदगीराम की सेहत तंदरूसती की ओर अग्रसर थी। चंपावती पति की सुधरती सेहत पर खुश थी। बच्चे सूरज और सरिता आराम, सैर और मौज मस्ती में समय व्यतीत कर रहे थे।

आज शनिवार है, चंदगी, कैम्टीफाल चलते है, वहां नहाने का लुत्फ ही कुछ और है।डाक्टर घोष ने सुबह सुबह ऐलान कर दिया। फटाफट तैयार हो जाऔ, सब लोग।
हल्का फुल्का नाशता करने के बाद सभी कैम्टीफाल की ओर रवाना हुए। रास्ते में चिप्स खाते, जूस पीते नौंक झोंक करते रहे। कैम्टीफाल पहुंच कर डाक्टर घोष ने कहा चंदगी, अब उतर जा सीडियां, नीचे जन्नत है भाई।
डाक्टर नीचे यदि जन्नत है, तो क्या हूरे भी मिलेगी?” चंदगी ने घोष के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा।
तभी तो कह रहा हूं, जन्नत है तो हूरे भी हैं।
मजाक करने की आदत नही गई, तेरी डाक्टर।
मजाक नही कर रहा हूं, देख ले जन्नत और हूरें।सीडियां उतरते हुए चंदगी और घोष कैम्टीफाल तक पहुंच गए और घोष ने फॉल में नहाती लडकियों और महिलाऔं की ओर इशारा करते हुए कहा।
बुढापे में जवानी आ रही है। कुछ तो शर्म कर।
तू शर्म कर, मेरी तो शादी भी नही हुई है। अभी तो मैं जवान हूं।कह कर डाक्टर घोष और चंदगीराम एक तरफ बैठ कर प्रकृति की सुंदरता निहार रहे थे। ऊपर से गिरता झमाझम पानी और पानी में इठलाते बच्चे, युवा, प्रोढ और वृद्ध। कोल्ड ड्रिंक्स बेचने वालों ने बोतलों के क्रेट्स फॉल के नीचे ठंडे होने के लिए रखे थे। डाक्टर घोष ने कपडे उतारे, सिर्फ कच्छे में ही नहाने फॉल में गया और वहीं से आवाज दी अबे आ भी जा, शर्मा मत।

चंदगीराम आगे सिर्फ पानी तक गया, अंदर फॉल तक नही गया। पायजामा घुटनों तक ऊपर किया और पानी में पलने लगा। जो नहा नही रहे थे, वे चंदगीराम की तरह पानी में चल रहे थे। कुछ देर बाद चंदगीराम और चंपावती एक पत्थर के ऊपर बैठ गए। सूरज, सरिता, डाक्टर घोष और नौकर सभी चट्टानों के पास फॉल का मजा ले रहे थे। सभी प्रसन्न थे। दोपहर को सभी ने कपडे बदले और खाना खाने के लिए एकत्रित हुए। तीन बजे सभी धनोलटी के लिए रवाना हुए। रात में रोज की भांती अलाव के आस पास सभी बैठे और खाना का लुत्फ लेने लगे। सभी ने निर्णय लिया कि एक सप्ताह धनेलटी रहने के बाद कल मसूरी के लिए रवाना हुआ जाए।  
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