Wednesday, December 25, 2013

इक झोली में फूल भरे हैं

इक झोली में फूल भरे हैं इक झोली में कांटें, रे कोई कारण होगा।
तेरे बस में कुछ भी नही ये तो बांटने वाला बांटे, रे कोई कारण होगा।।

पहले बनती हैं तकदीरे, फिर बनते हैं शरीर।
यह तो प्रभु की कारीगरी, तू क्यों गम्भीर।।
अरे कोई कारण होगा

नाग भी डस ले तो मिल जाये, किसी को जीवन दान।
चींटी से भी मिट सकता है, किसी का नामों निशान।
अरे कोई कारण होगा

धन का बिस्तर मिल जाये पर, नींद को तरसे नैन।
कांटों पर भी सो कर, आये किसी के मन को चैन।।
अरे कोई कारण होगा

सागर  से भी बुझ नहीं सकती, कभी किसी की प्यास।
कभी एक ही बूंद से पूर्ण, हो जाती है प्यास।।
अरे कोई कारण होगा

इक झोली में फूल भरे हैं इक झोली में कांटें, रे कोई कारण होगा।

तेरे बस में कुछ भी नही ये तो बांटने वाला बांटे, रे कोई कारण होगा।।

(परंपरागत भजन)
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