Sunday, January 26, 2014

सुखी रहे संसार

सुखी रहे संसार सब, दुखी रहे न कोई
यह अभिलाषा हम सब की, भगवान पूरी होए
विद्या बुद्धी तेजबल, सबके भीतर होए
दूध पूत धन धान्य से वंचित रहे न कोई
आप की भक्ति प्रेम से मन होए भरपूर
रोग द्वेश से चित मेरा भागे कोसों दूर
मिले भरोसा नाम का सदा रहे जगदीश
आशा तेरे नाम की बनी रहे जगदीश
पाप से हमे बचाईए करके दया दयाल
अपना भक्त बना कर हमको करो निहाल
दिल में दया उतारता मन में प्रेम और प्यार
देह हृदय में वीरता, सबको दो करतार
नाराण्य तुम आप हो प्रेम के विमोचन हार
क्षमा करो अपराध सब, कर दो भव से पार
हाथ जोड विनती करूं सुनिए कृपा निधान

सद संगत सुख दीजिए दया नमृता दान

(परंपरागत भजन)
Post a Comment

जगमग

दिये जलें जगमग दूर करें अंधियारा अमावस की रात बने पूनम रात यह भव्य दिवस देता खुशियां अनेक सबको होता इंतजार ...