Sunday, January 05, 2014

श्रेष्ठ मनुष्य

महर्षि व्यास ने श्रेष्ठ मनुष्य में आठ गुणों की प्रधानता बताई है।
1.       शांत – जो व्यक्ति अनावश्यक क्रोध न करता हो।
2.       सहनशीलता – जो व्यक्ति प्रत्येक स्थिति में सम रहते हुए कभी उत्तेजित नही होता है।
3.       दानशीलता – दान केवल धन का नही, अपितु ज्ञान, श्रम और भावना का भी होता है।
4.       स्थिर – व्यक्ति का स्थिर चित होना आवश्यक है।
5.       सत्यवाद – सत्य बहुआयामी है। अत: ऋषियों ने सम्यक सत्य का ग्रहण करने का आहवान किया है।
6.       जितेन्द्रिय – व्यक्ति को आपनी इंद्रियों को नियंत्रित करना चाहिए।
7.       दयावान – मानव मन में प्रत्येक प्राणियों के प्रति उत्पन्न होने वाला करूण भाव से किया व्यवहार दया है।

8.       विनम्रता – जब मनुष्य अहंकार रहित होकर भेजकारी भावना से मुक्त हो जाता है, तो वह विनम्रता ही होती है।
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