Monday, March 17, 2014

रंग बरसे

रंग बरसे रंग बरसे दरबार गुरूआं दे मेरे रंग बरसे।
मेरे गुरू की शोभा न्यारी, गाते गुण इन के नर नारी।
रंगते लाल गुलाल गुरूआं दे मेरे, रंग बरसे रंग बरसे।
गुरूवर रंग से होली खेले, भक्तों के दुख संकट लेले।
करते सब को पार, गुरू दे मेरे रंग बरसे।

रंग बरसाया गुरूदेव ने, नाम जपाया गुरूदेव ने।
जग दा कीता उद्धार, गुरू दे मेरे रंग बरसे।

मेरे गुरू दी मधुर हे वाणी, मेरे गुरू हैं ब्रह्म ज्ञानी।
महिमा है अपरम्पार, गुरू दे मेरे रंग बरसे।

श्रीलाल जी दी लीला न्यारी, सूरत इन्हा दी प्यारी प्यारी।
रंग दो लाल गुलाल, गुरू दे मेरे रंग बरसे।

रंग बरसे रंग बरसे दरबार गुरूआं दे मेरे रंग बरसे।

(पंरपरागत भजन)

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