Thursday, April 10, 2014

शादी


सुनो, आपको याद है न कि आज शाम को राहुल की शादी में जाना है, टाइम से घर आ जाना, फार्म हाउस में शादी है, कम से कम एक घंटा तो वहां पहुंचने में लग ही जाएगा। सुकन्या ने सुरेश को नाश्ते की टेबल पर बैठते ही कहा।
मैं तो भूल ही गया था, अच्छा हुआ कि तुमने याद करवा दिया।सुरेश ने आलू का परांठा तोडते हुए कहा।
आजकल आप बातों को भूलने बहुत लगे हो, क्या बात है?” सुकन्या ने चाय की चुस्की लेते हुए कहा।
आफिस में काम बहुत ज्यादा हो गया है और कंपनी वाले कम स्टाफ से काम करना चाहते है। दम मारने की फुरसत नही होती है। तुम सुबह जो कहती हो, आफिस में घुसते ही भूल जाता हूं। अच्छा सुनो, एक काम करना, पांच बजे मुझे फोन करना। मैं समय से आ जाऊंगा।
क्या कहते हो, पांच बजे, फिर घर कब आऔगे, आफिस से घर आने में एक घंटा लग जाता है। तैयार होना है, फिर आगे शादी में जाना है। सुकन्या ने आश्चर्य से कहा। आज आफिस से जल्दी निकलना। पांच बजे तक घर आ जाना।
अच्छा कोशिश करूंगा। सुरेश ने आफिस जाने के लिए ब्रीफकेस उठाते हुए कहा। आफिस पहुंच कर सुरेश हैरान रह गया कि स्टाफ की उपस्थिति नाममात्र की थी। आफिस में हर किसी को शादी में जाना था। आधा स्टाफ छुट्टी पर था और बाकी हाफ डे करके लंच के बाद छुट्टी करने की सोच रहे थे। पूरे आफिस में कोई काम नही कर रहा था। हर किसी की जबान पर बस यही चर्चा थी कि आज जबरदस्त शादियों का मुहर्त है, जिसकी शादी का मुहर्त नहीं निकल रहा है, उसकी शादी बिना मुहर्त के आज हो सकती है, इसलिए आज शहर में दस हजार शादियां हैं। सुरेश अपनी कुर्सी पर बैठ कर फाइलें देख रहा था तभी मैंनेजर वर्मा सुरेश के सामने कुर्सी खींच कर बैठ गए और गला साफ करके बोले, “आज तो गजब का मुर्हत है, सुना है कि आज शहर में दस हजार शादियां है, हर कोई छुट्टी मांग रहा है, लंच के बाद तो पूरा आफिस लगभग खाली हो जाएगा।  छुट्टी तो घोषित कर नही सकते सुरेश जी, लेकिन मजबूरी है, किसी को रोक भी नही सकते। आप को भी किसी शादी में तो जरूर जाना होगा।
वर्मा जी आप तो जबरदस्त ज्ञानी हैं, आप को कैसे मालूम कि मैंने भी आज शादी में जाना है।सुरेश ने फाइल बंद करके एक तरफ रख दी और वर्मा जी को ऊपर से नीचे तक देखते हुए पूछा।
यह भी कोई पूछने की बात है, आज तो हर आदमी, बच्चे से लेकर बूढ़े तक सभी बाराती बनेगें। आखिर दस हजार शादियां जो हैं। वर्मा जी ने अपनी अंगुली में कार की चाबी घुमाते हुए कहा। आखिर मैं भी तो आज एक बाराती हूं।
वर्मा जी एक बात समझ नही आ रही, कि क्या वाकई में पूरे स्टाफ ने शादी में जाना है या फिर दस हजार शादियों की खबर सुन कर आफिस से छुट्टी का एक बहाना मिल गया है। सुरेश ने बात को आगे बढाते हुए कहा।
 “लगता है, कि आपको आज किसी शादी का न्योता नही मिला है, घर पर भाभी जी के साथ कैंडल लाइट डिनर करने का ईरादा है। तभी इस तरीके की बातें कर रहे हो, वरना घर जल्दी जाने की सोच रहे होते, सुरेश बाबू। वर्मा ने चुटकी लेते हुए कहा।
नहीं वर्मा जी एैसी कोई बात नही है। शादी का न्योता तो है, लेकिन जाने का मन नही है, पत्नी चलने को कह रही है। लगता है जाना पढेगा।
क्या भाभी जी के माएके में शादी है। वर्मा जी ने आंख मारते हुए कहा।
एैसी कोई बात नही है, वर्मा जी। पडोसी की शादी में जाना है। ऊपर वाले फ्लैट में नंदकिशोर रहते हैं, उनके लडके राहुल की शादी है। मन इसलिए नही कर रहा कि बहुत दूर फार्म हाउस में शादी है। पहले तो एक घंटा आफिस से घर पहुंचने में लगेगा, फिर घर से कम से कम एक घंटा तो फार्म हाउस पहुंचने में लगेगा। थक जाऊंगा। यदि आप कल की छुट्टी दे दे तो शादी में चला जाऊंगा।
अरे सुरेश बाबू आप डरते बहुत हैं, आज शादी में जाईए, कल की कल देखेंगे। कह कर वर्मा जी चले गए।
मुझे डरपोक कहता है, खुद जल्दी जाने के चक्कर में मेरे कंधे पर बन्दूक चलाना चाहता है। सुरेश मन ही मन बुदबुदाया और काम में व्यस्त हो गया।
शाम को ठीक पांच बजे सुकन्या ने फोन करके सुरेश को शादी में जाने का याद दिलाया, कि सोसाइटी में लगभग सभी को नंदकिशोर जी ने शादी का न्योता दिया है और सभी शादी में जाएगें। आफिस में एक के बाद सभी जल्दी चले गए। सुरेश काम में डूबा रहा, तभी चपरासी ने कहा साब जी पूरा आफिस खाली हो गया है, मुझे भी शादी में जाना है, आप कितनी देर तक बैठेगें।
चपरासी की बात सुन कर सुरेश ने काम बंद किया और हल्के से मुस्कुरा के कहा, “मैंने भी शादी में जाना है, आफिस बंद कर दो।
सुरेश की बात सुन कर चपरासी का हौसला बुलंद हो गया और हंसते हुए बोला साब जी सुना है आज शहर में दस हजार शादियां है, इसलिए पूरा आफिस इतनी जल्दी खाली हो गया, मैं तो पहले ही समझ गया था कि आपको भी शादी में जरूर जाना है।
अरे थोड़ा पहले याद दिलाते तो तुम भी जल्दी जा सकते थे। चपरासी को कह कर सुरेश ने कार स्टार्ट की। रास्ते में सोचने लगा, माना कि दिल्ली एक महानगर है और एक करोड से ऊपर की आबादी है, लेकिन एक दिन में दस हजार शादियां कहां हो सकती हैं। घोडी़, बैंड, हलवाई, वेटर, बसों के साथ होटल, पार्क, गली मुहल्ले, इतना सब इंतजाम मुश्किल लगता है, रास्ते में ट्रैफिक भी कोई ज्यादा नही है, आम दिनो की तरह भीड़ भाड़ है। आफिस से घर की दूरी तीस किलोमीटर तय करने में एक सवा घंटा लग जाता है और लगभग आधी दिल्ली का सफर हो जाता है, अगर पूरी दिल्ली में दस हजार शादियां हैं तो आधी दिल्ली में पांच हजार तो अवश्य होनी चाहिए, लेकिन लगता है लोगों को बढ़ा चढ़ा कर बाते करने की आदत है और ऊपर से टीवी चैनल वाले खबरें इस तरह से पेश करते हैं कि लोगों को विश्वास हो ही जाता है। खबर पेश करने से पहले सर्वे ही कर लेते कि कहां कितनी शादियां है। बिना टेंट के शादी हो नही सकती। पूरे रास्ते पचास टेंट नही मिले। होटल, धर्मशाला भी मिला ले तो एक दो हजार तक भी गिनती नही जाएगी। कुल मिला कर मुश्किल से दस एक टैंट ही नजर आए। यही बातों को सोचते सुरेश घर पहुंच गया।
घर पर सुकन्या ने फौरन चाय के साथ समोसे देते हुए कहा, “टाइम से तैयार हो जाऔ। सोसाइटी से सभी शादी में जा रहे हैं, जिनको नंदकिशोर ने न्योता दिया है।
बच्चे भी चलेगें?”
बच्चे अब बडे हो गए हैं, हमारे साथ कहां जाएगें?”
हमारा जाना क्या जरूरी है?”
जाना बहुत जरूरी है, एक तो ऊपर वाले फ्लैट में रहते हैं और फिर नंद किशोरनी तो किटी पार्टी की मेंम्बर है। जो नही जाएगा, कच्चा चबा जाएगी।
इतना डरती क्यों हो, उससे? ऊपर वाले फ्लैट में जरूर रहते हैं, लेकिन साल छः महीने में एक आद बार ही दुआ सलाम होती है, जाने न जाने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। सुरेश ने चाय की चुस्कियों के बीच कहा।
डरे मेरी जूती। मैं नही डरती नंद किशोरनी से। शादी में जाने की तमन्ना सिर्फ इसलिए है कि घर में तो आम आदमियों की तरह रहते हैं, बातें बडी़ बडी़ करती है, जैसे कोई रईस अरबपत्नी हो। हम सोसाइटी की औरते तो उसकी शान शौकत का जायजा लेने जा रही हैं। किटी पार्टी का हर मेंबर शादी की हर गतिविधी और बारीक से बारीक पहलू पर नजर रखेगा। इसलिए जाना जरूरी है, चाहे कितना ही आंधी तूफान आ जाए। सुकन्या की इस बात को उनकी बेटी रोहिणी ने काटी।
पापा आपको मालूम नहीं है, जेम्स बांड 007 की पूरी टीम साडियां पहन कर जासूसी करनें में लग गई हैं। इनके वार से कोई नहीं बच सकता है।
सुकन्या ने बीच में बात काटते हुए कहा, “तुम लोगों के खाने का क्या हिसाब रहेगा। मुझे कम से कम बेफ्रिकी तो हो।
क्या मम्मा अब हम बच्चे नही हैं, भाई पीजा और बर्गर लेकर आएगा। हमारा डिनर का मीनू तो¨ छोटा सा है, आपका तो लम्बा चौडा होगा, आखिर नंदकिशोरनी के लाडले राहुल बाबा की जो शादी है।कह कर रोहिणी खिलखिला कर हंस पडी। फिर चौंक कर बोली यह क्या मां ये साडी पहनोगी। नही नही, शादी में नंदकिशोरनी से इक्कीस लगना है, मैं साडी सेलेक्ट करती हूं। कहते कहते रोहिणी ने एक साडी निकाली और मां के ऊपर लपेट कर बोली पापा इधर देख कर बताऔ कि मां कैसी लग रही है?”
एक बात तो माननी पडेगी कि बेटी मां से अधिक स्यानी हो गई है। नंद किशोरनी तो आज गश खा कर गिर जाएगी।
तभी रोहन पीजा और बर्गर लेकर आ गया, “अरे आज तो कमाल हो गया, मां तो दुल्हन लग रही है। पूरी बारात में अलग से नजर आऔगी।
बच्चों की बात सुन कर सुकन्या गर्व से फूल गई और तैयार होने लगी। दोनों बच्चे रोहिणी और रोहन पीजा, बर्गर से पेट पूजा करने लगे। तैयार हो कर सुरेश और सुकन्या जैसे ही कार में बैठने के लिए सोसाइटी के कंपाउंड में आए, सुरेश हैरानी के साथ बोल पड़ा, “लगता है कि आज पूरी सोसाइटी शादियों में जा रही है, सारे चमक धमक रहे हैं। वर्मा, शर्मा, रस्तोगी, साहनी, भसीन, गुप्ता, अग्रवाल सभी कारे निकाल रहे हैं, आज तो सोसाइटी कार विहीन हो जाएगी।
मुस्कराते हुए सुकन्या ने कहा, “सारे अलग शादियों में नही बल्कि नंद किशोर के लाडले राहुल की शादी में जा रहे हैं।
दिल खोल कर न्योता दिया है, नंद किशोर ने।
दिल की मत पूछो, फार्म हाउस में शादी की खर्च वधू पक्ष का होगा, इसलिए पूरी सोसाइटी को निमंत्रण दे दिया, अपने घर तो नंद किशोरनी ने किसी को भी नही बुलाया। एक नंबर के कंजूस है दोनों पति पत्नी। हम तो उसे किटी पार्टी का मेंबर बनाने को राजी नहीं होते है। जबरदस्ती हर साल मेंबर बन जाती है, किसी न किसी बहाने। पडो़स का मामला है, हम शर्म करके मेंबर बना लेते है, जब इसकी बारी होती है, इतनी निक्कमी पार्टी देती है, एैसा लगता है, बासी खाना हमें खिलाती है।सुकन्या ने मुंह बना कर कहा।
इतनी नाराजगी भी अच्छी नही की मेकअप ही खराब हो जाए।सुरेश ने कार स्टार्ट करते हुए कहा।
कितनी देर लगेगी फार्म हाउस पहुंचने में।सुकन्या ने पूछा।
एक से दो घंटे।
यह क्या जवाब हुआ। एक से दो घंटे।
यह तो ट्रैफिक पर निर्भर है कितना समय लगेगा, एक भी लग सकता है, डेढ़ भी और दो भी।
सीधे जवाब तो देना नही है, घुमा फिरा के बोलने में मजा ज्यादा आता है, क्या?”
बेगम मैं मजे नही ले रहा, सीधी बात कर रहा हूं। अपने आप देख लेना।


आपसे से तो बात करना ही गुनाह है, छोडो इस बात को, मैं एफएम रेडियो सुन कर ट्रैफिक का हाल सुन लेती हूं। कह कर सुकन्या ने रेडियो चालू किया, “यह टनाटन एफएम अच्छा है, एक दम लेटस्ट गाने बजते हैं और साथ में चटपटी मसालेदार गपशप भी खूब होती है। थोडी थोडी देर बाद ट्रैफिक का हाल भी बताते हैं।
रेडियो स्टेशन पर बैठे बैठे ट्रैफिक का हाल सुनाते है। इस दिल्ली नगरी में दिन में अठारह घंटे तो अच्छा खाता पीता ट्रैफिक रहता है।
खाते पीते ट्रैफिक की बात पर सुकन्या खिलखिला के हंस पडी। सीरियस बातों के बीच फुलझडी छोडने की आदत अच्छी है, मिस्टर सीरियस।
चलो कुछ तो समझा मुझे।
तभी रेडियो जौकी यानी के उदघोषिका ने शहर में दस हजार शादियों का जिक्र छेड़ दिया, कि आज हर दिल्ली वासी किसी न किसी शादी में जा रहा है और चारों तरफ शादियों की धूम है। यह सुन कर सुरेश ने सुकन्या से पूछा क्या उसे लगता है कि आज शहर में दस हजार शादियां होंगी।
आप तो एैसे पूछ रहो हो, जैसे मैं कोई पंडित हूं और पूरी दस हजार शादियों का मुर्हत मैंने ही निकाला हैं। अच्छा आप बताईए कि कितनी शादियां होंगी।
एक बात जरूर है कि आज शादियां अधिक है, लेकिन कितनी पता नही, हां एक बात पर मैं अडिग हूं कि दस हजार नही होंगी। दो तीन हजार को दस हजार बनाने में लोगों को कोई अधिक समय नहीं लगता। बात का बतंगड बनाने में फालतू आदमी विशेषज्ञ होते हैं।
तभी रेडियो टनाटन ने ट्रैफिक का हाल सुनाना शुरू किया, यदि आप वहां जा रहे हैं तो अपना रूट बदल ले, यह सुन कर सुरेश ने कहा। रेडियो स्टेशन पर बैठ कर कहना आसान है कि रूट बदल लें, लेकिन जाए तो कहां से, दिल्ली की हर दूसरी सड़क पर ट्रैफिक होता है। हर रोज सुबह शाम दो घंटो की ड्राईविंग हो जाती है। आराम से चलते चलो, स्रब और संयम के साथ। बातों ही बातों में कार की रफ्तार धीरे हो गई, सड़क पर ट्रैफिक कुछ ज्यादा हो गया था। तभी आगे वाली कार रूक गई और वाहन चालक ने कार से बाहर गर्दन निकाल कर कहा, “ भाई साब कार थोडी पीछे करना, वापिस मोडनी है, आगे ट्रैफिक जाम है, एफ एम रेडियो भी यही कह रहा है। उसको देखते ही कई स्कूटर , बाईक वाले पलट कर चलने लगे। कार वालों ने भी कारें वापिस घुमानी शुरू कर दी। यह देख कर सुकन्या ने कहा आप क्या देख रहै हो, जब सब वापिस मुड रहे हैं तो आप भी इन के साथ मुड जाईए। सुरेश ने कार वापिस नही मोडी, उसने वापिस मुडी कारों की जगह धीरे धीरे आगे बढानी शुरू की।
यह क्या कर रहे हो, ट्रैफिक जाम में फंस जाएगें।सुकन्या ने हडबडा कर सुरेश की ओर देखते हुए कहा।
कुछ नही होगा, यह तो रोज की कहानी है, दिल्ली की सड़को पर। जो कारें बाईक वापिस मुड रही है, सड़क की दूसरी लेन जो इस समय खाली है, वहां जाएगें। सड़क इसलिए खाली है कि आगे चैराहे पर ट्रैफिक होगा, ये सब आगे पहुंच कर दूसरी लेन का भी ट्रैफिक जाम करेंगें। धीरे धीरे सुरेश कार को अपनी लेन में रख कर आगे बढाता रहा। चैराहे पर एक टेम्पो खराब खडा था, जिस कारण ट्रैफिक का बुरा हाल था।
यहां तो काफी बुरा हाल है, देर न हो जाए। सुकन्या थोडी परेशान हो गई।
कुछ नही होगा, दस एक मिन्ट जरूर लग सकते है। यहां संयम की आवश्कता है। रेंगते हुए आगे बढ़ते जाएगे। ये जो आगे दो तीन आदमी सीटी बजा कर ट्रैफिक संभाल रहे हैं, ये प्राईवेट बसों के हेलपर, कंडक्टर है, जो अपना रास्ता बनाने के चक्कर में लगे हैं, इनके पीछे हम भी आराम से निकल जाएगें। बस थोडा सा संयम रख कर इंतजार करना है। ये बातें तो रोजमर्रा का हिस्सा है। देश की राजधानी दिल्ली के जीवन का एक छोटा सा रंग। इन बातों से परेशान नहीं होना चाहिए। बातों बातों में दस मिन्ट में चैराहे को पार कर लिया और कार ने थोडी रफ्तार पकडी। थोडी थोडी दूरी पर कभी कोई बारात मिलती, तो कार की रफ्तार सुस्त हो जाती तो कहीं बीच सड़क पर प्राईवेट बस वाले बस रोक कर सवारियों का उतारने, चढाने का काम करते मिले। एक बात की दाद देनी पडेगी, चाहे कोई पीछे से आता हुआ, बस से टक्कर मार दे या अचानक ब्रेक मारनी पडे। किसी का एक्सीडे़ट हो जाए, इनकी बला से, ये तो सड़क को अपने बाप की जागीर समझते है, जहां दिल करेगा, वही खटोला बिछा देगें। कहीं सड़क पर खुदाई, कहीं टूटी फूटी सड़क, कहीं कोई जल्सा जुलूस के कारण, ट्रैफिक कहीं जाम तो कहीं सुस्त और कहीं रफ्तार में चलता रहता है। यह तो राजधानी दिल्ली में रहने का टैक्स समझ लो, तो अतिउत्तम, वरना दिमाग में टेंशन। संयम रखो तो बिना थकान, चिंता के गंतव्य पर पहुंच जाएगें। बातों बातों में फार्म हाउस भी आ गया। बारात अभी बाहर सड़क पर नाच रही थी, बारातियों नें अंदर फार्म हाउस जाना शुरू कर दिया। सोसाइटी निवासी पहले ही पहुंच गये थे और चाट के स्टाल पर मशगूल थे।
लगता है, हम ही देर से पहुंचे, सोसाइटी निवासी तो चले तो हमारे साथ थे, लेकिन पहले आ गये। सुरेश ने चारों तरफ नजर दोडाते हुए सुकन्या से कहा।
इतनी धीरे कार चलाते हो, जल्दी कैसे पहुंच सकते थे।इतना कह कर सुकन्या बोली हाए मिसेज वर्मा, आज तो बहुत जंच रही हो।
अरे कहां, तुम्हारे आगे तो आज सब फीके हैं।मिसेज गुप्ता बोली। देखो तो कितना खूबसूरत नेकलेस है, छोटा जरूर है लेकिन डिजाइन लाजवाब है, हीरे कितने चमक रहे हैं, जरूर महंगा होगा।
पहले कभी देखा नही, अभी लिया, कभी लिया, कहां से लिया, देखो साथ के मैचिंग टाप्स भी लाजवाब हैं। एक के बाद एक प्रश्नों की छडी लग गई, साथ ही सभी सोसाइटी महिलायों ने सुकन्या को घेर लिया। सुकन्या मंद मंद मन में इठलाने लगी। केन्द्र बिन्दु बनी सुकन्या एक कुर्सी में बैठ गई, बाकी महिलायों ने चारों तरफ से घेर लिया। महिलायों के बीच घिरने के बाद सुकन्या व्यस्त हो गई, लेकिन सुरेश एक तरफ कोने में अलग कुर्सी पर बैठ सोचने लगा, महिलायों को बात करने के लिए कई विषय मिल जाते हैं, कपडे, गहने, मेकअप के अलावा सैंडल, चप्पल पर ही चर्चायें शुरू हो गई और उसके पास बात करने का कोई विषय नही, कोई बात नही, महिलायों की बातें ही सुनी जाए और यह सोच कर सुरेश नें कुर्सी थोडी आगे सरका ली, तभी रस्तोगी ने कंधे पर हाथ मारते हुए कहा, “क्या
यार सुरेश यहां छुप कर चुपके से महिलायों की बातों में कान अडाये बैठे हो, उठ आ उधर मर्दो की महफिल लगी है। सब इंतजाम है, आ जा।
सुरेश कुर्सी छोडते हुए कहने लगा, “रस्तोगी, मैं पीता नहीं हूं, तुझे पता है, क्या करूंगा महफिल में जा कर।
आ तो सही, गपशप ही सही, मैं कौन सा पियकड हूं। जलजीरा, सॉफ्ट ड्रिकंस सब कुछ है। महफिल को रौशन करते हैं, यार मिल कर। कह कर रस्तोगी ने सुरेश का हाथ पकड़ कर खींचा और दोनों महफिल में शरीक हो गए, जहां जाम के बीच में ठहाके लग रहे थे।
यार नंदकिशोर ने हाथ लम्बा मारा हैं। खुद की हैसियत तो मांग कर पानी पीने की है, सब कुछ लडकी पक्ष वाले कर रहे है। फार्महाउस में शादी, पीने का खाने का इंतजाम तो देखो।अग्रवाल ने कहा।
अंदर की बात बताता हूं, सब प्यार मोहब्बत का मामला है।साहनी बोला।
अमा यार तुम्हारी पहेलियां हमारी समझ के बाहर हैं, जरा खुलकर बता। गुप्ता ने पूछा।
क्या नाम है, नंदू के लडके का?” साहनी सोचने लगा तो गुप्ता बोला, “नाम का आचार डालना है। राहुल है यार आगे बोल।
वोही न राहुल, कालेज में एक साथ पढते थे, वहीं प्यार व्यार हो गया। जब लडका लडकी राजी तो क्या करेगा काजी, थक हार कर लड़की के बाप को मानना पडा। साहनी चटकारे लेकर प्यार के किस्से सुनाने लगा, किस्से सुनाते मुड कर सुरेश से कहने लगे, “अरे वाह आप तो मंद मंद मुस्कुरा रहे हैं, क्या बात है, कुछ तो फरमाइए।
मैं यह सोच रहा हूं, क्या जरूरत हैं, शादियों में फिजूल का पैसा लगाने का, इसी शादी को देख लो, फार्म हाउस का किराया, साज सजावट, खाने पीने का खर्चा, लेन देन, गहने और न जाने क्या क्या खर्चा होता है।सुरेश ने दार्शनिक भाव से कहा।
छोड यार, जब बच्चों की शादी करेगा तब पता चल जाएगा। साहनी ने ठहाका लगा कर कहा तो गुप्ता बोला, “गुरू जी, यहीं सब देख लो, अभी से अनुभव ले लो।
देखो जो मैं कह रहा हूं, उसे बारीकी से सोचो, लाखों, करोडो रुपये खर्च करते हैं, देखा जाए तो फूंक देते हैं। सुरेश ने समझाते हुए कहा।
यार जिसके पास जितना धन होता है, शादी में खर्च करता है, समझने की क्या बात है, आखिर धन को संचित ही इस कारण करते हैं।अग्रवाल ने बीच में बात काटते हुए कहा।
नहीं धन का संचय शादियों के लिए नहीं, बल्कि कठिन समय के लिए भी किया जाता हैं, भविष्य में काम आएगा। हम शादियों मैं पैसा अपनी झूठी शान दिखाने के लिए करते है, उस धन का हम सदुपयोग कर सकते है। सुरेश की बात बीच में काटते हुए गुप्ता बोला, “देख लडकी वालों के पास धन की कोई कमी नहीं है। समुन्दर में से दो चार लोटे निकल जाएगें, कुछ फर्क नहीं होगा।
यह सोच गलत है, सुरेश ने बात आगे बढाते हुए कहा। हम पैसे का दिखावा कर रहे हैं, यहां। जितना पैसा शादियों में खर्च करते हैं, उस धन को हम यदि भविष्य के लिए वर वधु के लिए बैंक में फिक्सड डिपोजिट में रख लों, तो उनके बुरे आर्थिक दिनों में काम आएगे। शादी हम सादगी से कर सकते है। यहां जितने बाराती आए हैं, कोई न कोई नुक्स निकाल कर जाएगे, रिश्तेदारों की जितनी आव भगत की जाए, गलतियां ही निकालेगें, कुछ तो लड झगड कर बुराई ही करेंगें। जलन के कारण। सारा मूड खराब कर दिया, साहनी ने बीच में बात काटते हुए कहा। यहां हम जश्न कर रहे हैं, स्वामी जी ने प्रवचन शुरू कर दिया, बाई गाड रस्तोगी जहां से इसे लाया था, वहीं छोड आ।
सुरेश ने शराबियों से उलझना उचित नहीं समझा और चुपचाप वहां से प्रस्थान किया और सुकन्या को ढूंढने लगा। क्या बात है, भाई साहब, कहां नैन मटक्का कर रहे हैं।मिसेज साहनी ने कहा, जो सुकन्या के साथ गोल गप्पे के स्टाल पर खट्टा मिठ्ठा पानी पी रही थी और साथ कह रही थी, “सुकन्या बडा बकवास पानी है, इतना बडी पार्टी और चाट पकोडी तो एकदम थर्ड क्लास।
सुन कर सुकन्या मुस्करा दी, खाए जा रही है और मीन मेख भी कर रही है, छोड खाने को, मैं तो कुछ नही खाऊगीं।
मेरे से भूखा नही रहा जाता। शगुन दिया है, डबल तो वसूल करने हैं।
मिसेज साहनी की बाते सुन कर सुरेश मुस्कुरा दिया। दोनों मिंया बीवी एक ही थैली के हैं। मिंया ज्यादा पैग लगा कर होश खो बैठा है कि किसके साथ क्या बात करनी है और बीवी मीन मेंख के बावजूद खाए जा रही हैं। कुछ लिया क्या, स्नैक्स, चाट तो एकदम बेस्वाद हैं। सुकन्या साडी को ठीक करते हुए बोली।
अपना फार्मूला सही है, घर से निकलने से पहले थोडा सा खा लिया जाए, तभी ठीक रहता है, शादियों में ग्यारह बारह बजे से पहले खाना शुरू नहीं करते। यह भी नहीं सोचते कि बारातियों ने तो अगले दिन काम पर जाना है। आफिस लेट पहुंचे तो मालिक नाराज हो जाएगा। घडी देखते ही बोलेगा। शादी तुम्हारी थी जो लेट आए हो। डोली निबटना जरूरी था, जल्दी निकल नहीं सकते थे। सुरेश ने सुकन्या से कहा, “खाना शुरू हुआ है, तो थोडा खा लेते है, नहीं तो निकलने की करते हैं।
इतनी जल्दी क्या है, अभी तो कोई भी नहीं जा रहा है।
पूरा दिन काम की थकान, फिर फार्म हाउस आने का थकान भरा सफर और अब खाने का लम्बा इंतजार, बेगम साहिबा घर वापिस जाने में भी कम से कम एक घंटा तो अवश्य लग जाएगा। चलते हैं, आंखें नींद से बोझल हो रही हैं, ड्राईवर महोदय पर भी कुछ तरस करो।
तुम भी बच्चों की तरह मचल जाते हो और रट लगा लेते हो कि घर चलो, घर चलो।
मैं फिर उधर सोफे पर थोडा़ आराम कर लेता हूं, अभी तो वहां कोई नहीं है।
ठीक है कह कर सुकन्या सोसाइटी की अन्य महिलाऔं के साथ बतियानें लगी। सुरेश एकान्त के लिए कोने में एक खाली सोफे पर आराम से पैर फैला कर अधलेटा हो गया। आंखें बंद कर के कुछ आराम की तलाश में जुटा, लेकिन सब व्यर्थ। दो मिन्ट बाद एक जोर का हाथ कंधे पर लगा, “सुरेश बाबू यह अच्छी बात नहीं है, अकेले अकेले सो रहो हो। जश्न मनाने के बजाए सुस्ती फैला रहे हो।सुरेश ने आंखें खोल कर देखा, गुप्ता जी दांत फाड़ कर मुस्कुरा रहे थे। मन ही मन में दो भद्दी गाली निकाल कर बोला साले दो मिन्ट चैन से सोने भी नही देते हैं, लेकिन हल्के से मुसकुरा कर कहा, “गुप्ता जी, आफिस में कुछ अधिक काम की वजह से थक गया था, सोचा कि पांच मिन्ट आराम कर लूं, आधी रात हो गई है, सवा बारह हो गए हैं, घर में तो इस समय घोड़े बेच कर खर्राटे भर रहे होते हैं। घर ड्राईव करके वापस घर भी जाना है, यही सोच कर आंखें मूंद कर आराम करने की कोशिश कर रहा था।
उठ यार यह मौका जश्न देखने का है, सोने का नहीं।गुप्ता हाथ पकड़ कर सुरेश को डीजे फ्लोर पर ले गया जहां डीजे के शोर में उल्टे सीधे हाथ पैर मार कर वर और वधू पक्ष के नजदीकी नाच रहे थे। देख नंदकिशोर के ठुमके। सुरेश का ध्यान सुकन्या को ढूंढने में था, कि किस तरीके से अलविदा कह कर वापस घर रवानगी की जाए। पूरे दिन की थकान के बाद सुरेश की हिम्मत जवाब दे चुकी थी। सुकन्या सोसाइटी की महिलाऔं के साथ गपशप में व्यस्त थी। सुरेश को नजदीक आता देख मिसेज रस्तोगी ने सुकन्या को कहा, “भाई साहब को कहो, आज तो मंडराना छोडे़, मर्द पार्टी में जाए, बार बार महिला पार्टी में आ जाते हैं।
भाभी जी, कल मैं आफिस से छुट्टी नहीं ले सकता, जरूरी काम है, घर भी जाना हैं, रात की नींद पूरी नहीं होगी तो, आफिस में काम कैसे करूंगा। अब तो आप सुकन्या को मेरे हवाले कीजिए, नहीं तो उठा के ले जाना पड़ेगा।सुरेश के इतना कहते ही पूरी महिला पार्टी ठहाके में डूब गई, जा सुकन्या, नही तो भाई साहब तेरा अपहरण कर लेंगे।
क्या बचपना करते हो, थोड़ी देर इंतजार करो, सब के साथ चलेंगें। पार्टी का आनन्द उठाऔ। थोडा़ सा सुस्ता लो, देखो उस कोने में सोफे खाली हैं, आप थोड़ा आराम करो, मैं अभी वहीं आती हूं।
मुंह लटका कर सुरेश फिर खाली सोफे पर अधलेटा हो गया और बीस पच्चीस मिन्टों की नींद ले ली। अधलेटे सुरेश ने नींद में करवट बदली तो सोफे से नीचे गिरने लगा और बचने के चक्कर में नींद खुली। चांद मिन्टों की गहरी नींद ने सुरेश की थकान दूर कर दी थी और शरीर हल्का महसूस  कर रहा था। तभी सुकन्या आई, “तुम बड़े अच्छे हो, नींद भी मार ली, डीजे के शोर हल्ले में भी नींद आ जाती है, चलो खाना शुरू हो गया है। सुरेश ने घड़ी देखी, रात का एक बजा था, अमीर आदमियों के चोंचले भी अजीब होते हैं। रात के एक बजे खाना परोस रहे हैं। यहां तो रात दस बजे सोने वालों में हैं। रात की शादियों में तो शरीर टूट जाता हैं, कोई सोचता नही कि अगले दिन काम पर भी जाना है। खाना खाते और फिर मिलते अलविदा लेते ढाई बज गए। कार स्टार्ट करके सुरेश बोला। आज रात लॉग ड्राईव होगी, घर पहुंचते साढे तीन पौने चार बज जाऐंगें। मैं सोचता हूं कि उस समय सोने की बजाए चाय पी जाए और सुबह की सैर की जाए, मजा आ जाएगा।
तुम तो सो लिए थे, मैं बुरी तरह थक चुकी हूं, मैंने तो नींद जरूर लेनी हैं, आप अकेले सैर पर जाना। लेकिन आप इतनी धीरे कार क्यों चला रहे हो।
लॉग ड्राईव में कार की रफ्तार धीरे रखते हैं, ताकी पूरा आनन्द मिल सके।
सबके साथ चलो, इस समय खाली सड़के हैं, सब की रफ्तार तेज है, हमारी रफ्तार तो बैलगाड़ी की सी लग रही है।
तेज रफ्तार ही दुर्घटना का कारण है। रात की खाली सड़कों पर तेज रफ्तार की वजह से ही भयानक दुर्घटनाएं होती हैं। रोज अखबारों में पढ़ते है, सारे बहुचर्चित केस रात के इसी समय हुए हैं, पार्टियों से वापस आते हुए शराब के नशे में तेज रफ्तार के कारण कार को न संभाल पाना ही मुख्य कारण हैंसड़कों पर रोशनी पूरी नहीं होती, सामने से आने वाले वाहनों की हाईबीम हैडलाईट से आंखों में चौंध पड़ती है, पटरी और रोड़ डिवाईडर नजर नहीं आते है, दुर्घटना के आसार अधिक होते हैं, इसलिए जब देरी हो गई है तो आधा घंटा और सही, तुमने सोना है और मैंने सैर पर जाना है। धीरे धीरे चलो मोरे साजना।
बडे रोमांटिक हो रहे हो। लगता है कि इस रफ्तार में तो मेरी नींद खुल गई है, तुम्हारे साथ सैर पर चलना पडेगा।
यह बात हुई न, अब कार की रफ्तार बैलगाड़ी से स्कूटर वाली करता हूं। पौने चार बजे घर पहुंचे, लाईट खोली तो रोहिणी उठ गई, “क्या बात है पापा, पूरी रात शादी में बिता दी। कल आफिस की छुट्टी करोगे क्या?”
सुरेश ने हंसते हुए कहा, “कल नहीं, आज। अब तो तारीख भी बदल गई है। आज आफिस में जरूरी काम है, छुट्टी का मतलब ही नहीं। अगर अब सो गया तो समझ लो, दोपहर से पहले उठना ही नहीं होगा। बेटे अब तो एक कप चाय पी कर सुबह की सैर पर जाऊंगा।
पापा आप कपड़े बदलिए, मैं चाय बनाती हूं।रोहिणी ने आंखें मलते हुए कहा।
तुम सो जाऔ, बेटे, हमारी नींद तो खराब हो गई है, मैं चाय बनाती हूं।सुकन्या ने रोहिणी ने कहा।
जब नींद खुल गई है तो मैं भी जॉगिंग पर चलती हूं आपके साथ, आप चेंज कीजिए, मैं चाय बनाती हूं।
डैटस दी स्पिरीट, बेबी, लेट्स एन्जाय मार्निंग वाक।
इतना सुन कर सुकन्या ने कहा, “अंग्रेज कब से बन गये, अपनी बेटी को बेबी कह रहे हो। सैर को छोडो, नींद लो और दिमाग को आराम दो, तभी हिन्दुस्तानी बनोगें।
इतने में रोहिणी चाय और बिस्कुट ले कर आ गई, “आप मम्मी पापा के पीछे लगी रहती हो, इसमें बुरा ही क्या है।
चाय पीने के बाद सुरेश, सुकन्या और रोहिणी सुबह की सैर के लिए पार्क में गए। आज असली आनन्द आएगा, सैर करने का, पूरा पार्क खाली, एैसे लगता है, कि हमारा प्राईवेट पार्क हो, हम आलसिसों की तरह सोते रहते है। सुबह सैर का अपना अलग ही आनन्द है, जैसे जीवन का रस पा लिया है। सुरेश बांहे फैला कर गहरी सांस खींचता हुआ बोला।
आज क्या बात है, बडे दार्शनिक बन कर बातें कर रहे होश।
बात दार्शनिकता की नहीं, बल्कि जीवन की सच्चाई की है, कल रात शादी में देखा। दिखावा ही दिखावा है, क्या हम शादियां सादगी से नहीं कर सकते। अगर सच कहे तो सारा शादी खर्च व्यर्थ है, फिजूल का है, जिसका कोई अर्थ नही है।
तभी रोहिणी जॉगिंग का चक्कर लगा कर समीप पहुंच कर बोली, “पापा बिल्कुल ठीक है, शादियों पर सारा व्यर्थ का खर्चा होता है।कह कर वह आगे बढ गई।
सुकन्या सुरेश के चेहरे को ताकते हुए कुछ समझने की कोशिश करने लगी।
चौंक क्यों गई, सैर करने का आज आनन्द ही कुछ अलग है।
हूं, वो तो मैं कुछ कुछ समझने की कोशिश कर रही हूं।
इसमें समझने की कोई आवश्कता नहीं है, जरूरत है सिर्फ अमल करने की।
क्या अमल करना है?”
यही शादियां सिर्फ सादगी से होनी चाहिए। क्या परिवार के कुछ सदस्य शादी संपन्न नहीं कर सकते हैं। बिल्कुल कर सकते हैं। क्या फायदा है शादी में खर्चा करने का है। लोग आते हैं, खा पी कर शोर मचा कर, इधर उधर की बांते करके चले जाते हैं, कुछ उल्टा सीधा कमेंट पास कर जातें हैं, जिनकों सुन कर दिल हमारा दुखता है, बाराती तो चले जातें हैं पीछे घर में क्लेश छोड़ जाते हैं।
तभी रोहिणी जॉगिंग का चक्कर पूरा करके समीप आई और बोल कर दोड़ने की रफ्तार में तेजी लाई, “बिल्कुल सही, पापा सादगी से करनी चाहिए शादियां।
मेरी समझ में कुछ नही आ रहा हैं, आज सुबह बाप बेटी को क्या हो गया है।
बहुत आसान सी बात है, शादी में सारे रिश्तेदारों को, यारों को, पडोसियों को, मिलने जुलने वालों को न्योता दिया जाता है, कि शादी में आकर शान बढाऔ। सब आते है, कुछ काम धंधा तो करते नही आज के समय, सब यही चाहते हैं की उनकी लाट साहबों जैसी खातिरदारी हो, अगर नाश्ते पानी में दस मिन्टों की भी देर हो जाए तो सारा आसमान सर पर उठा लेते हैं, कि खातिर नही हो रही है। उल्टा सीधा बोलेगें, जैसे कि नंदकिशोर के बेटे की शादी में सब बारातियों को देखा, हम सब सोसाइटी के लोग खाए पीए जा रहे थे और कमिंयां भी निकाल रहे थे, हुई न यह झूठी शान के लिए बेकार का शादी खर्चा।
तभी रोहिणी जॉगिंग का एक और चक्कर पूरा करके समीप आई और बोल कर दोड़ने की रफ्तार में तेजी लाई और आगे निकल गई, “बिल्कुल सही झूठी शान है, सब रिश्तेदार तमाशा देखते हैं, शादी न हुई, कोई फिल्म हो गईं। समीछक बन कर टिप्पणी करते फिरते हैं।
यही टिप्पणियां फिर शादी वाले घर में महाभारत के युध का कारण बनती हैं। कुछ रिश्तेदार नाराज हो जाते हैं, कुछ तो सामान उठा के वापस हो जाते हैं। शादी के टाइम सबको पैसे, कपडे लत्ते दे कर बिदा करने का रिवाज है। जितने पैसे दे दो, कोई रिश्तेदार खुश नही होता है। सब खुसर फुसर करते हैं, कि फलाने को ज्यादा दिए, हमारे को कम, बस इसी बात पर नाराज हो जातें हैं। कपडे़ लत्तो पर नाक चिडाएगें, कि इससे ज्यादा अच्छे कपडे तो लोग भिखारियों को दे देते हैं, हम कोई मंदिर के आगे बैठे है, सडे हुऐ कपडे थमा दिये।
तभी रोहिणी जॉगिंग का एक और चक्कर पूरा करके समीप आई और रुक कर बोलनें लगी तो सुकन्या ने टोक दिया, “आप की कोई विशेष टिप्पणी। यह सुन कर रोहिणी ने हांफते हुए कहा, “पापा ने बिल्कुल सही विशलेषण किया है, शादी का। शादी हमारी, बिरादरी को खुश करते फिरे, यह कहां की अक्लमंदी है, और तुर्रा यह कि खुश फिर भी कोई नही होता आखिर शादी को हम तमाशा बनाते ही क्यों हैं। अगर कोई शादी में किसी कारण से नहीं पहुंचा तो हम भी गिला रखते हैं, कि आया नहीं। कोई किसी को नहीं छोड़ता। शादी करनी हैं तो घर परिवार के सदस्यों में ही संपन्न हो जाए, जितना खर्चा शादी में हम करते हैं, अगर वह बचा कर बैंक में जमा करवा ले तो बुढापे की पेंशन बन सकती है।
देखा सुकन्या हमारी बेटी कितनी समझदार हो गई हैं, मुझे रोहिणी पर गर्व है। कितनी अच्छी तरह से भविष्य की सोच रही है। हम अपनी सारी जमा पूंजी शादियों में खर्च कर देते है, अक्सर तो उधार भी लेते है, जिसको चुकाना भी कई बार मुश्किल हो जाता है। अपनी चादर से अधिक खर्च करते हैं।
क्या बाप बेटी को किसी प्रतियोगिता में भाग लेना है, जो वहां देने वाले भाषण का अभ्यास हो रहा है या कोई निबंध लिखना हैं।
काश भारत का हर व्यक्ति मेरे साथ प्रतियोगिता में शामिल हो, कितनी बुराईयां दूर हो सकती हैं।सुरेश ने मुस्कुराते हुए कहा।
आफिस नहीं जाना क्या?”
जाना हैं, तभी तो नींद छोड़ कर सैर पर आया था।
फिर घर चले।
अवश्य।
प्रतियोगिता में कब जाना है।
दो प्रतियोगिताऔं में हिस्सा लेना है।
कौन सी दो।
अपने दो बच्चों की शादी पर प्रतियोगिता पक्की है।
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