Sunday, April 06, 2014

मुख सोहणां


मुख सोहणां बंसरी निराली तेरी चाल वे,
सखियां विच खेढण गियों मदन गोपाल वे।
साडा बेडा बन्ने लावी मदन गोपाल वे।।

नचदा ते हसदा शाम मेरा आया है,
श्रीलाल जी दी गद्दी ते मैंने शाम दा दर्शन पाया है,
भोली भाली सूरत नाले घुंघराले बाल वे,
मुख सोहणां बंसरी निराली तेरी चाल वे,
सखियां विच खेढण गियों मदन गोपाल वे।
साडा बेडा बन्ने लावी मदन गोपाल वे।।

यमुना दे कण्डे कण्डे बंसी वजावंदा है,
ठुमक ठुमक चाल चले कुण्डल लश्कावंदा है,
बछडे चरावंदा है संग लै के ग्वाल बाल वे,
मुख सोहणां बंसरी निराली तेरी चाल वे,
सखियां विच खेढण गियों मदन गोपाल वे।
साडा बेडा बन्ने लावी मदन गोपाल वे।।

बंसी बजा के मन मेरा मोह लया
खाणां ते पीणा की हसणा वी खेह लिया,
चारों तरफ आवाज आवे जय़ गिरधर गोपाल दी,
मुख सोहणां बंसरी निराली तेरी चाल वे,
सखियां विच खेढण गियों मदन गोपाल वे।

साडा बेडा बन्ने लावी मदन गोपाल वे।।

(परंपरागत भजन)
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