Monday, April 07, 2014

जन्म लिया


जन्म लिया मेरे रघुराई, अवधपुरी मैं बहार आई।
कलियों ने घूंघट खोला भवरें भी हंस हंस बोले,
वर्षा ने रिमझिम लाई हृदय बसो मेरे रघुराई,
जन्म लिया मेरे रघुराई, अवधपुरी मैं बहार आई।

बालक रूप निराला है मन को मोहने वाला है,
राम लखन दो भाई, अवधपुरी मैं बहार आई।

मात कौशल्या बडभागी दशरत की किस्मत जागी,
प्रगट भए श्री रघुराई, अवधपुरी मैं बहार आई।

राम मेरे मन का मोती इन नैनन की ज्योती है,
राम लखन दो भाई, अवधपुरी मैं बहार आई।

राम ने धनुष तोडा है सीता संग नाता जोडा है,
सीता ने जयमाला पाई, अवधपुरी मैं बहार आई।

जनक ने दशरथ को बुलाया है सखियों ने मंगल गाया है,
ब्याह लाए चारों भाई, अवधपुरी मैं बहार आई।

दासी अरज यह करती है चरण कमल पर पडती है,
चरणों में रखो रघुराई, अवधपुरी मैं बहार आई।

जन्म लिया मेरे रघुराई, अवधपुरी मैं बहार आई।

(परंपरागत भजन)
Post a Comment

जगमग

दिये जलें जगमग दूर करें अंधियारा अमावस की रात बने पूनम रात यह भव्य दिवस देता खुशियां अनेक सबको होता इंतजार ...