Sunday, April 13, 2014

मिल कर खुशियां


मिल कर खुशियां मनाए हम कि अज दिन खुशियों वाला आया है,
झूमे नाचें गाए हम कि अज दिन खुशियों वाला आया आया,
मिलकर सगन मनाए हम कि अज दिन भागा वाला आया।

झूम रहा है गगन, खुशी से नाच रही धरती,
बांधके घुंधुरू घर में आई खुशियां झम झम करती,
फूले नहीं समाये हम कि अज दिन खुशियों वाला आया आया।

सदके जावां उन्हां सत्तगुरूआं ते जिसने खुशी दिलाई,
पूरी हो गई हो गई चाह सभी दी मन दी मुराद पाई,
लख लख शुक्र सत्तगुरूआं दां अज दिन खुशियां वाला दिखाया।

बिन पंखां दे उडते जाये पडे ना पांव जमी पर,
कैसे खुशी छुपाए कि अज दिन खुशियों वाला आया,
लख लख शुक्र सत्तगुरूआं दां अज दिन खुशियां वाला दिखाया।

अठ पहर दस्तक देती है खुशियां जिनके दर पर,
तीनों लोक के इस साहिब का हाथ है मेरे सिर पर,
सच्ची बात बताएं सत्तगुरूआं ने अज दिन खुशियां वाला दिखाया।

मिल कर खुशियां मनाए हम कि अज दिन खुशियां वाला आया,
झूमे नाचें गाए हम कि अज दिन खुशियों वाला आया आया,

मिलकर सगन मनाए हम कि अज दिन सत्तगुरूआं ने भागा वाला बणाया।

(परंपरागत भजन)
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