Monday, June 16, 2014

मन की शक्ति

हम को मन की शक्ति देना, मन विजय करें
दूसरों की जय से पहले, खुद को जय करें।

भेदभाव अपने दिल से साफ करें
दोस्तों से भूल हो तो माफ कर सके।

झूठ से बचे रहें, सच के कदम भरें
दूसरों की जय से पहले, खुद को जय करें।

मुश्किलें पडे तो हम पे इतना करम कर
साथ दे धर्म का, चले धर्म पर
खुद पे हौसला रहे, बडे से न डरें
दूसरों की जय से पहले, खुद को जय करें।

हम को मन की शक्ति देना, मन विजय करे
दूसरों की जय से पहले, खुद को जय करें।



औंकार

औंकार प्रभु तेरा नाम, गुन गावे संसार तमाम
प्राण स्वरूप प्राणों से प्यारे, दुःख दूर करन वाले।
सुख स्वरूप सुखों के दाता, अंत ना कोई तुम्हारा पाता।
सारे जग को पैदा करता, सबसे उत्तम आप रहता।
हे ईश्वर हम तुझे ध्यावे, पाप के पास ना जावे।

बुद्धी करो हमारी उज्वल, जीवन हो हमारा निर्मल।

Sunday, June 08, 2014

किताब



राजकमल प्रकाशन की डॉ. राजकुमार सम्पादिक पुस्तक "कहानियां रिश्तों की - दादा-दादी नाना-नानी"  में मेरी कहानी "बडी दादी" शामिल है। मुझे अति हर्ष है कि पुस्तक में मुंशी प्रेम चन्द की "ईदगाह", जैनेन्द्र कुमार की "रामू की दादी", दीपक श्रीवास्तव की "लघुत्तम समापवर्तक", शिवशंकर मिश्र की "बाबा की उघन्नी", नीलाक्षी सिंह की "ऐसा ही...कुछ भी", हरीचरन प्रकाश की "चश्मे की वैतरणी", कामतानाथ की "बच्चा", शैलेन्द्र सागर की "ब्रंच", सूर्य बाला की "दादी और रिमोट", शिवप्रसाद सिंह की "दादी मां" और कृष्णा सोबती की "दादी अम्मा" के साथ मेरी कहानी "बडी दादी" प्रकाशित हैं।



मतभेद

पांच वर्षीय अचिंत घर के बाहर पड़ोस के बच्चों के साथ खेल रहा था। खेलते - खेलते दो बच्चे अचिंत की मां के पास शिकायत ...