Sunday, October 05, 2014

जरूरत

नाराज़ होने की ज़रुरत नही है
कोप भवन जाने की ज़रुरत नही है
गिले शिकवे करने की जरूरत नही है
झगडा करने की ज़रुरत नही है
जीवन है अनमोल

यहाँ हँसने हँसाने की ज़रुरत है।।
Post a Comment

जगमग

दिये जलें जगमग दूर करें अंधियारा अमावस की रात बने पूनम रात यह भव्य दिवस देता खुशियां अनेक सबको होता इंतजार ...