Wednesday, October 22, 2014

गुरूजी खोलो दया के

गुरूजी खोलो दया के द्वार गुरूजी खोलो दया के द्वार।
जन्म जन्म से भटक रहा हूं मत करना इन्कार।।

तेरा मेरा साथ पुराना तू दाता मैं भिखारी,
प्रेम की भिक्षा दान दो अब तो खड़ा मैं झोली पसार,
गुरूजी खोलो दया के द्वार गुरूजी खोलो दया के द्वार।
जन्म जन्म से भटक रहा हूँ मत करना इन्कार।।

तुम भी अगर प्रभु ठुकराओगे कहां मिलेगा ठिकाना,
सब द्वारों को छोड़ के मैंने पकड़ा तेरा द्वारा,
गुरूजी खोलो दया के द्वार गुरूजी खोलो दया के द्वार।
जन्म जन्म से भटक रहा हूँ मत करना इन्कार।।

मत ठुकराना दीन को भगवन पतित फिर मैं तेरा,
या तो कह दो पतित का तुमने किया न कभी उद्धार,
गुरूजी खोलो दया के द्वार गुरूजी खोलो दया के द्वार।
जन्म जन्म से भटक रहा हूँ मत करना इन्कार।।

करुणा सिन्धु कहलाते हो करो कृपा अब स्वामी,
बांह पकड़ लो अब दो माफ़ी नैया पड़ी मझदार,
गुरूजी खोलो दया के द्वार गुरूजी खोलो दया के द्वार।

जन्म जन्म से भटक रहा हूँ मत करना इन्कार।।

(परंपरागत भजन)
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