Monday, October 13, 2014

लाख अपनों को


लाख अपनों को मैंने पुकारा, सब के सब कर गए किनारा,
और कोई न देता दिखाई, सिर्फ तेरा ही अब तो सहारा।
कौन तुझ बिन भंवर से निकले, मेरी नैया है तेरे हवाले।।
डूबतों को बचा लेने वाले, मेरी नैया है तेरे हवाले।।

जिस समय तू बचाने पे आये, आग में भी बचा कर दिखाए,
जिस पे तेरी दया दृष्टी होवे, कैसे उस पे कोई आंच आये।
आंधियों में भी तू ही उसे संभाले, मेरी नैया है तेरे हवाले।।
डूबतों को बचा लेने वाले, मेरी नैया है तेरे हवाले।।

पृथ्वी सागर व पर्वत बनाये, तूने धरती पे दरिया बहाए,
चांद सितारे करोड़ों सितारे, फूल आकाश में भी दिखाए।
तेरे सब काम जग से निराले, मेरी नैया है तेरे हवाले।।
डूबतों को बचा लेने वाले, मेरी नैया है तेरे हवाले।।

बिन तेरे चैन नहीं मिलता है, फूल आशा का नहीं खिलता है,
तेरी मर्ज़ी बिना इस जहां में, एक पत्ता भी नहीं हिलता है।
तेरे बस में अँधेरे उजाले, मेरी नैया है तेरे हवाले।।

डूबतों को बचा लेने वाले, मेरी नैया है तेरे हवाले।।

(परंपरागत भजन)
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