Sunday, November 09, 2014

मैं हमेशा यह सोचता हूं

मैं हमेशा यह सोचता हूं
जो नौकरी मुझे मिलती
वह राधेश्याम को मिल गई।
मैं हमेशा यह सोचता हूं
मेट्रो मैं बैठने की सीट मिलती
वह रामशंकर को मिल जाती।
मैं हमेशा यह सोचता हूं
जिस स्कूल में मेरे बच्चे पढ़ते
वहां गिरधारी लाल के बच्चे पढ़ते हैं।
मैं हमेशा यह सोचता हूं
जैसी लड़की की मेरे साथ शादी होती
वैसी के साथ अनोखे लाल की होती है।
मैं हमेशा यह सोचता हूं
जो प्रमोशन मुझे मिलती
वह बनवारी लाल को मिलती है।
मैं हमेशा यह सोचता हूं
जैसे मकान में मैं रहता
वैसे मकान में मुरारी लाल रहते हैं।
मैं हमेशा यह सोचता हूं
ऐसा क्यों मेरे साथ होता है
वैसा मेरे साथ ही होता है
मैं हमेशा यह सोचता हूं
ऐसा क्यों होता है. मेरे साथ क्यों होता है

मैं हमेशा यह सोचता हूं।
Post a Comment

विवाह उपरांत पढ़ाई

अनुप्रिया पढ़ने में होशियार थी। हर वर्ष स्कूल में प्रथम स्थान पर रहती थी। पढ़ाई के प्रति उसकी लगन कॉलेज में भी कम नही हुई। उसकी इच्छा दिल्ल...