Saturday, December 20, 2014

स्कूटर स्टार्ट


सुबह के सात बज रहे हैं। ऑफिस जाने की राजेश को जल्दी है। जल्दी उसको नहीं, सभी को है। बच्चों को स्कूल जाने की जल्दी है। छोटे बच्चों को उनकी माएं फटाफट तैयार कर रहीं है। किसी की रसोई से कुकर की सीटी बजने की आवाज़ आ रही है तो किसी के मां बाप बच्चों को जल्दी तैयार होने की आवाज़ लगा रहे हैं। नाश्ते रोटी के टिफ़िन पैक हो रहे हैं। दूर दूर ऑफिस हैं। एक, डेढ़ या फिर दो दो घंटे तक लग जाते हैं ऑफिस पहुंचने के लिए। हर घर में अफरा तफरी, शोर शराबा, चिक चिक हर सुबह की आम बात है। राजेश भी बाथरूम में ब्रश कर रहा है। प्रथम तल के फ्लैट में राजेश रहता है। तभी नीचे स्कूटर स्टार्ट करने की आवाज़ आई। किर किर, पर स्कूटर स्टार्ट नहीं हुआ। हल्की हल्की ठण्ड पड़नी शुरू हो गई है और स्कूटर स्टार्ट की शिकायत आम है। चाहे पुराने ज़माने के स्कूटर हों, जिनको टेड़ा कर के स्टार्ट करते हैं। पंद्रह बीस किक तो आम बात है फिर स्टार्ट होते हैं तो लंबी रेस दे कर स्कूटर गरम किया जाता है कि कहीं बंद न हो जाए। अब तो नए ज़माने के पुश बटन स्टार्ट स्कूटर आ गए, पर उनमे में भी एक बीमारी है। ठण्ड में बैटरी से देर में स्टार्ट होते हैं। किर किर की आवाज़ आती है। किक से ही सुबह सुबह स्टार्ट करना पड़ता है पर जब पुश बटन से स्टार्ट हो जाता है तो टांग को कष्ट कौन दे। टांग दुखती है। किर किर की आवाज़ कानों में चुभन की तरह परेशान करती है। किर किर की आवाज़ आ रही है। राजेश को तो कोई दिक्कत नहीं पर भूतल फ्लैट की मालकिन शवेता की आवाज़ आई "स्कूटर आगे जा कर स्टार्ट करो, यहां शोर मत करो।"

यह सुन कर दो बच्चों की खी खी कर हंसने की आवाज़ आती है।
शवेता का ग़ुस्सा बढ़ जाता है। "मुझे चिड़ा रहे हो। तुम्हारी मां से कहती हूं।"

तभी स्कूटर स्टार्ट हो जाता है और दोनों बच्चे स्कूटर पर बैठ कर स्कूल चले जाते हैं। दोनों बच्चे पड़ोस में पीछे के फ्लैट में रहते है। लड़का सूरज और लड़की चांदनी। दोनों स्कूल चले जाते हैं और शवेता जलभुन कर फ्लैट के अंदर जाकर सारा ग़ुस्सा पति शंकर पर उतारने लगी। "तुम इनका स्कूटर यहां से हटवाओ। हर रोज़ किर किर करके दिमाग खा जाते हैं।"

शंकर पड़ोस में उन बच्चों के घर जाता है पर खाली हाथ, बच्चों की मां ने दो टूक कह दिया कि बच्चों के पापा टूर पर गए है। उनसे बात करना इस बारे में। स्कूटर है तो स्टार्ट तो करेंगे। सब अपना स्कूटर स्टार्ट करते हैं।

शंकर छोटा सा मुंह लेकर वापिस आया पर शवेता से डांट खा गया कि बात करनी नहीं आती। कुछ नहीं हो सकता।

राजेश ने अगले कई दिन तक इस बात को नोट किया कि बच्चे हर रोज़ सुबह स्कूटर स्टार्ट करते और शवेता फिर सूरज और चांदनी को डांट लगाती परन्तु बच्चे खी खी करते स्कूल चले जाते। शवेता की नाराज़गी और डांट डपट से एक दिन तंग आ गया। एक दिन सुबह पत्नी रेवा से कहा "यह शवेता भी अजीब है, सारी दुनिया स्कूटर स्टार्ट करती है उसको बच्चों को नहीं डांटना चाहिए।"

"हर रोज़ स्कूटर स्टार्ट करते है। पांच मिनट से पहले तो स्टार्ट होता नहीं। किर किर की आवाज़ सर दर्द करती है। इसका कुछ हल तो निकलना चाहिए। पता नही स्कूटर ठीक क्यों नहीं करवाते।"
"तुम भी।"
"पर शवेता जैसे नहीं।"

अगली सुबह जब सूरज और बच्चे स्कूटर स्टार्ट कर रहे थे तो राजेश ने उन्हें समझाया कि सुबह सुबह स्कूटर को किक स्टार्ट करना चाहिए। इसके दो फायदे हैं। एक दो किक में स्कूटर स्टार्ट हो जायेगा और बैटरी की उम्र लंबी होगी नहीं तो बैटरी जल्दी ख़राब हो जायेगी। राजेश ने आराम से उनको समझाया तो सूरज और चांदनी राजेश को जी अंकल कह कर स्कूल चले गए।

अगली सुबह सूरज और चांदनी ने फिर स्कूटर स्टार्ट किया और किक नहीं लगाई। पुश बटन से स्टार्ट करने लगे। किर किर की आवाज़ सुन कर फिर शवेता घर से बाहर आई और बच्चों को डांटने लगी। बच्चे ने स्कूटर किक से स्टार्ट किया, बैठे और शवेता को नाक चिड़ा कर स्कूटर आगे बड़ा लिया। यह देख राजेश हंसता हुआ अंदर कमरे में आया।

रेव ने पूछा "क्यों हंस रहे हो?"
"शवेता चिढ़ कर बच्चों को डांट लगाती है वो भी जानबूझ कर स्कूटर स्टार्ट की आवाज़ से चिढ़ाते हैं। जाते जाते नाक चिड़ा कर गए हैं।"


रेवा भी हंस दी। सूरज और चांदनी राजेश को देखते तो किक से स्कूटर स्टार्ट करते नहीं तो पुश बटन की किर किर से शवेता को चिड़ा कर जाते।
Post a Comment

मौसम

कुछ मौसम ने ली करवट दिन सुहाना हो गया रिमझिम बूंदें पड़ने लगी आषाढ़ में सावन आ गया गर्म पानी भाप बन कर उड़ गया ...