Sunday, December 07, 2014

शरण तुम्हारी

हुए हैं जब से शरण तुम्हारी, ख़ुशी की घड़ियां मना रहे हैं।
करें बयां क्या सिफत तुम्हारी, जबां में ताले पड़े हुए है।।
सुना था जैसा ही पाया तुम को, ख़ुशी बहुत भारी है हमको।
रहेंगें खिदमत में हम हमेशा, यही दिलों में ठाने हुए हैं।।
लिया मोहब्बत से नाम तुम्हारा, हुआ है रोशन यह दिल हमारा।
अँधेरे घर में चिराग रोशन, जिधर भी देखो दमक रहे हैं।।
बहार गुलशन की है गुलों से, हमारी शौहरत भी है तुम्ही से।
इसी वजह से ऐं दिलबर, तुम्हारे दर पर पड़े हुए हैं।।
की है महरबां की नज़र जो हम पर, निसार जिन्दगानी हो तुम पर।
तुम्हारे क़दमों पे ऐं मेहरबाँ, सर झुकाये पड़े हुए हैं।।
खवाहे हस्ती जहां से सारी, जो न हो उल्फत तुम्हारी।
उन्ही के देखो इस जहां में, जानों के लाले पड़े हुए हैं।।
करेंगे हर दम हम यादगारी, अगर इनायत हो तुम्हारी।
दस्त बस्ता ऐं गुरुदेव प्यारे, तुम्हे अरज यह सुना रहे हैं।।
हुए हैं जब से शरण तुम्हारी, ख़ुशी की घड़ियां मना रहे हैं।
करें बयां क्या सिफत तुम्हारी, जबां में ताले पड़े हुए है।।

(परंपरागत भजन)


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