Saturday, January 10, 2015

तेरिया तूं जाण

मैं सोच सोच कर हारां, तेरियां तूं जाण मालिका,
तेरियां तूं जाण मालिका, तेरियां तूं जाण मालिका,
मैं सोच सोच कर हारां।

किस धातु से पवन बनी है, किस धातु से पानी,
कैसे रची तेज की रचना, भेद किसे न जाणी,
कैसे रच दिया सूरज तारा, तेरियां तूं जाण मालिका,
तेरियां तूं जाण मालिका, मैं सोच सोच कर हारां।

कैसे रची भूमि की रचना, कैसे शिखर बनाये,
कैसे नदी सरोवर रच कर, जल की धारा बहाये,
कैसे रच दिया सागर खारा, तेरियां तूं जाण मालिका,
तेरियां तूं जाण मालिका, मैं सोच सोच कर हारां।

कैसे रची बीज की रचना, कैसे वृक्ष बनाये,
कैसे फूल पत्ती बना कर, नाना भांती सुहाए,
कैसे फल विच रस तूने डाला, तेरियां तूं जाण मालिका,
तेरियां तूं जाण मालिका, मैं सोच सोच कर हारां।

नाना भांति जगत प्रांणी, नाना शक्ल बनाये,
मानव दानव देव दनुज, नर नारी कोई कहाए,
कोई बन गया सुत्त कोई नारी, तेरियां तूं जाण मालिका,
तेरियां तूं जाण मालिका, मैं सोच सोच कर हारां।

कैसे बादल बने आकाश में, करें गर्जना भारी,
कभी न टपके बूंद जमीं पर, कभी भर दे नदियां सारी,
कैसे बिजली का है चमकारा, तेरियां तूं जाण मालिका,
तेरियां तूं जाण मालिका, मैं सोच सोच कर हारां।

बगुला हंस बनाये उज्जवल, कागा कोयल काली,
लाल चोंच दी सुऐ को, पंखों में हरियाली,
कैसे मोर को तूने संवारा, तेरियां तूं जाण मालिका,
तेरियां तूं जाण मालिका, मैं सोच सोच कर हारां।

गन्ना मीठा, मिर्च तीखी, खारा नमक बनाया,
मिट्टी पानी एक सभी का, भेद किसे न पाया,
कोई मीठा, कोई तीखा खारा, तेरियां तूं जाण मालिका,
तेरियां तूं जाण मालिका, मैं सोच सोच कर हारां।
ज्ञानी ध्यानी धनी कोई, सेवक स्वामी बनाये,
भिक्षु, पीर फकीर किसी को शहनशाह बनाऐ,
तेरी मर्जी का यह नजारा, तेरियां तूं जाण मालिका,
तेरियां तूं जाण मालिका, मैं सोच सोच कर हारां।

मैं सोच सोच कर हारां, तेरियां तूं जाण मालिका,
तेरियां तूं जाण मालिका, तेरियां तूं जाण मालिका,

मैं सोच सोच कर हारां।

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