Wednesday, March 04, 2015

दुकान


वसंत कुंज मार्किट में एक दुकान बंद पड़ी थी। शटर की हालत खुद अपनी दास्तान बता रही थी कि मुद्दत हो गई है दुकान की सुध लिए हुए। शटर के बाहर पटरी पर सामान बेचने वाले तीन दुकानदारों ने अपनी दुकान जमा रखी थी। पहला दुकानदार लेडीज हेयर पिंस, क्लिप बेच रहा था। खूब चल रही थी उसकी दुकान, हर उम्र की महिलाएं दुकानदार को घेरे हुए थी। दूसरा दुकानदार मोबाइल कवर और एक्सेसरीज बेच रहा है। आजकल हर दूसरे दिन युवा लड़के, लड़कियां मोबाइल फ़ोन के लुक बदल देते है। उसकी दुकान भी खूब चल रही है। तीसरा दुकानदार सीडी बेच रहा है, हालांकि आज इंटरनेट से ही डाउनलोड कर लेते है, फिर भी लेटेस्ट फ़िल्म की पायरेटेड सीडी की जबरदस्त मांग है। तीनों दुकानदार अच्छा बिज़नस कर रहे है।

दुकान के आगे दो व्यक्ति अवलोकन कर रहे हैं। उम्र साठ साल की, नाम चुनीलाल और उनका लड़का विवेक उम्र तीस साल। कुछ देर सब कुछ देख कर चुनीलाल ने कहा।
"बेटे, इस दुकान को देख रहे हो।"
"पापा अपनी दुकान है। हमें कुछ करना चाहिए।"
"इसकी कीमत पता करते हैं।"
"इस मार्किट में कीमत पांच करोड़ से कम क्या होगी। पॉश इलाके की मार्किट। विदेशी लोगों में भी बहुत लोकप्रिय है। मैं जब भी यहां आता हूं, काफी लोग नज़र आते हैं।"
"रेट पता करते हैं। दो चार प्रॉपर्टी डीलर्स से बात करो, फिर सोचते हैं।"
पिता पुत्र दुकान और मार्किट के हालचाल देख कर चले गए।

दुकान की कीमत सात करोड़ आंकी गई। पिता, पुत्र दोनों की खुशियों का कोई ठिकाना नहीं था। सात करोड़ सुन कर दोनों पिता पुत्र प्रसन्न हो गए।
"पापा बिज़नस में डालने के लिए रकम बहुत है। आजकल बैंक के नखरे ज्यादा हो गए हैं।"
"बेटे, इस दुकान को निकाल देते हैं।"
"पापा, रेट अच्छे मिल रहे हैं। हमें देर नहीं करनी चाहिए।"
"इसको फाइनल कर दो।"

थोड़े दिन में दुकान का सौदा पौने सात करोड़ में हो गया। दुकान एक कंपनी जिसका नाम वनटूथ्री प्राइवेट लिमिटेड थी, के नाम रजिस्टर थी।
"पापा यह दुकान तो कंपनी के नाम रजिस्टर है, ट्रान्सफर कैसे होगी?"
"दुकान कंपनी के नाम रहेगी। कंपनी के शेयर खरीददार के नाम ट्रान्सफर हो जायेगे। हम डायरेक्टरशिप से हट जायेंगे और खरीददार नए डायरेक्टर बन जायेंगे।"
"पापा दुकान की फ़ाइल कहां है?"
"फ़ाइल मेरे लाकर में पड़ी है। सबसे नीचे वाली दराज में होगी।"

विवेक लाकर से फ़ाइल लाता है और पिता पुत्र की जोड़ी फ़ाइल को देखते है।
"पापा इस फ़ाइल के हिसाब से आप और चाचा बराबर के हिस्सेदार हैं।" विवेक ने पिता को कहा।
"बात यह है कि जब हमारे बिज़नस का बटवारा हुआ था तब यह दुकान मेरे हिस्से आई और एक प्लाट चमन के हिस्से गया। वह प्लाट भी एक कंपनी के नाम है। उसमें भी में और चमन बराबर के हिस्सेदार हैं। उस प्लाट की फ़ाइल चमन को दे दी और इस दुकान की फ़ाइल मेरे पास हैं।"
"पापा अब हमें क्या करना पड़ेगा?"
"चमन से बात कर लेंगे, वह साइन कर देगा। आखिर मेरे साइन की भी उसे कभी न कभी उस प्लाट के लिए ज़रुरत पड़ेगी।"

चमनलाल चुनीलाल का बड़ा भाई है। दो साल पहले दोनों भाईओं का बिज़नस और प्रॉपर्टी का बटवारा हुआ था। पहले दोनों का सयुंक्त बिज़नस था। अब दोनों का अलग अलग काम, बिज़नस हो गया है।
अगले दिन चुनीलाल चमनलाल से मिलने उसके घर गया और कहा कि वनटूथ्री कंपनी के शेयर उसके नाम करदे। वह भी उसके प्लाट की कंपनी के शेयर ट्रान्सफर उसके नाम कर देगा, ताकी जिसके पास जो प्रॉपर्टी है, कागज़ भी उसके नाम हो जाए। चमनलाल कुछ देर सोचता रहा, पर उसने इनकार कर दिया। चुनीलाल मायूस वापिस चला गया। चुनीलाल की समस्या यह थी कि वह चमनलाल को खुल कर दुकान बेचने की बात बता नहीं सकता था। उधर चमनलाल को दाल में काला नज़र आ रहा था। चमनलाल सोचने लगा कि आखिर दो साल बाद चुनीलाल क्यों आया है? चुनीलाल बिना दुकान बेचने की बात बताये साइन करवाना चाहता था, लेकिन चमनलाल ने दो टूक मना कर दिया। चुनीलाल ने कुछ रिश्तेदारों की मार्फ़त चमनलाल को समझाने की कोशिश की पर उसे सफलता नहीं मिली।

"अब पापा कैसे करें? विवेक चिंतित हो गया।
सोचते हुए चुनीलाल ने कहा "बेटे अधिक फ़िक्र करने से कुछ मिलेगा नहीं। हर प्रश्न का उत्तर होता है। इसका भी होगा। जरूर कुछ रास्ता मिलेगा।"
पिता पुत्र रास्ता ढूंढने लगे। दुकान का खरीददार जल्दी कब्ज़ा देने के लिए दबाव बनाने लगा। जिस प्रोपर्टी डीलर ने सौदा करवाया वह भी चुनीलाल पर दबाव डालने लगा कि यदि सौदे से मुकरना है तो बयाने का दुगना देना होगा। प्रॉपर्टी के सौदे का पहला सिद्धान्त यही है कि यदि बेचने वाला सौदे से मुकरता है तो बयाने का दुगना देना होगा और अगर खरीदने वाला मुकरता है तो बयाना जब्त होता है और सौदा कैंसिल। चुनीलाल ने थोडा समय मांगा।

समय बीतता जा रहा था परन्तु समस्या का कोई हल नहीं था, क्योंकि चमनलाल साइन करने को तैयार नहीं हुआ। चुनीलाल की परेशानी देख कर प्रॉपर्टी डीलर बसंतलाल ने चुनीलाल से कहा "देखिये सेठ जी, सौदे का समय बीत चुका है। आपके कहने पर समय सीमा भी बढ़ा दी। अब और अधिक समय नहीं दिया जा सकता है। खरीददार रकम के साथ तैयार है। अगर सौदा रद्द करना है तो दुगनी रकम दे दीजिये।"
"बसंतलाल सौदा तो खरा है। तुम मेरी परेशानी समझते हो।"
"सेठ जी बात साफ़ कीजिये, छुपाने से कोई फायदा नहीं।"
चुनीलाल बात समझ गया और बसंतलाल को पूरी बात बताई।
"सेठ जी, हम किस मर्ज़ की दवा हैं, आप जानते नहीं। हम अकेले काम नहीं करते। वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट, पुलिस सब हमारे संपर्क में हैं। कल सुबह ही कोई हल लेकर आता हूं।"
कह कर बसंतलाल चला गया और चुनीलाल की जान में अटकी सांस फिर चलने लगी। वायदे के मुताबिक बसंतलाल एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के साथ चुनीलाल से मिलने आया। चार्टर्ड अकाउंटेंट ने कंपनी वनटूथ्री की फ़ाइल को देखा और चुनीलाल से कहा की कंपनी की फ़ाइल पहले रजिस्ट्रार ऑफ़ कम्पनीज में देखना होगा कि फ़ाइल की क्या स्तिथि है। आपने कंपनी को लगभग सोलह साल पहले खरीदी थी और कोई बैलेंस शीट भी नहीं है आपके पास। इंटरनेट पर ऑनलाइन स्तिथि जांच लेते है, फिर होगा तो रजिस्ट्रार ऑफ़ कम्पनीज के दफ्तर जाकर फ़ाइल की जांच करनी होगी। ऑनलाइन जांच करने के बाद चार्टर्ड अकाउंटेंट ने बताया कि आप दोनों भाई कंपनी में कुछ नहीं हो। कंपनी के डायरेक्टर और शेयरहोल्डर मोनू चावला और सोनू चावला हैं।
"इन दोनों से कंपनी खरीदी थी। मोनू और सोनू दोनों भाई हैं। हमने शेयर ख़रीदे थे और डायरेक्टर बने थे। हमारे पास सभी कागज़, दस्तावेज हैं।" चुनीलाल कह कर हैरान और परेशान हो गया कि चार्टर्ड अकाउंटेंट क्या कह रहा है। दुकान हमारी और हम मालिक नहीं।
"सेठ जी, परेशान होने की कोई बात नहीं है। रजिस्ट्रार ऑफ़ कम्पनीज के ऑफिस फ़ाइल जांच लेते हैं, फिर कोई न कोई हल निकलेगा।" चार्टर्ड अकाउंटेंट ने चुनीलाल को तसल्ली दी।
अगले दिन चार्टर्ड अकाउंटेंट के साथ चुनीलाल ने रजिस्ट्रार ऑफ़ कम्पनीज के ऑफिस में दस्तावेजों का निरिक्षण किया। वहां कुछ नहीं मिला। चुनीलाल और चमनलाल के कोई कागज़ नहीं थे।
"ऐसा कैसे हो सकता है। हमने तो कागज़ जमा किये थे और जमा करने की रसीद भी हमारे पास है।"
"सेठ जी, आज से सोलह साल पहले कंप्यूटरीकरण नहीं हुआ था। भरे गए कागज़ फ़ाइल में लगाए नहीं जाते थे। अब उनको ढूंढना मुश्किल है। आजकल तो कंप्यूटर से ऑनलाइन दस्तावेज जमा होते है और तुरंत उनको देखा जा सकता है।"
"अब क्या किया जाये?" चुनीलाल ने पूछा।
"सेठ जी हर समस्या का समाधान होता है। हम किस लिए बैठे है। तुरन्त समाधान बताते है।"
"बताइये, बताइये।" अधीर होते हुए चुनीलाल ने कहा।
"एक समाधान है यदि आप सोनू और मोनू को जानते हैं और उनसे संपर्क कर सकते हैं तब तो बड़ा आसान समाधान है।" चार्टर्ड अकाउंटेंट ने कहा।
"यह कोई मुश्किल काम नहीं है, दोनों चट्टे बट्टे मेरे शागिर्द हैं। मेरे लिए काम करते हैं। अक्सर क्लब में मिलते हैं। आप बताये कि उनसे क्या करवाना है।" चुनीलाल के चेहरे के हाव भाव रंगत ही बदल गई।
"आज की तारीख में सोनू और मोनू कंपनी के मालिक हैं। यदि वो दोनों मान जाये तो शेयर ट्रान्सफर वोही कर दें, डायरेक्टरशिप से हट जाएं तब आप को कुछ नहीं करना होगा। कंपनी ट्रान्सफर हो जायेगी। बस मनवाना आपको पड़ेगा। कुछ रकम का लालच यह काम करवा सकता है। हमने तो कई ऐसे केस करवाये हैं।"
"ठीक है, मैं सोनू और मोनू चावला से बात करता हूं।" चुनीलाल के चेहरे पर ख़ुशी की लहर छा गई।
चुनीलाल ने अगले ही दिन दोनों को ऑफिस बुलाया। शाम के चार बजे दोनों भाई सोनू और मोनू चावला चुनीलाल के दफ्तर पहुंचे। दोनों को देख कर चुनीलाल कुर्सी से खड़ा हो गया और दोनों को गले लगा कर स्वागत किया।
"आओ लाले की जान मानसून।" चुनीलाल मोनू और सोनू को मानसून कहता था। दोनों भाई एक साथ हर जगह जाते थे इसलिए मोनू और सोनू मानसून के नाम से प्रसिद्ध थे। चुनीलाल को चहकते देख दोनों भाई समझ गए कि ज़रूर उसकी कोई गर्ज़ है वरना चुनीलाल मुफ़्त में किसी को गले नहीं लगाता है।

चुनीलाल ने दोनों भाइयों को बात बताई।
"चुनी भाई, काम तो कर देंगे। आखिर काम अनेक किये है तुम्हारे। दाम तो सुनाओ।" मोनू चावला ने कहा।
मोनू की बात सुन कर चुनीलाल ने आंख मार कर हाथ मिलाते हुए कहा। "नटखट हो, आदत बदली नहीं। बिना दाम के काम नहीं करते।"
"भूखे पेट भजन नहीं गोपाला।" सोनू ने चुटकी ली।
"दो लाख, एक एक दोनों भाई का।"
"चुनी सेठ, कम हैं। इसमें बात नहीं बनेगी।"
"अरे मानसून यारों से क्या पर्दा। खुद कहो।"
"पूरे दस लाख, पांच पांच का एक भाई।" मोनू और सोनू एक स्वर में बोले।
"ज्यादा ही बोल रहे हो, पर यारों के लिए दस लाख कुर्बान।"
"सेठ चुनी, कागज़ बनवा लो, जहां कहोगे, साइन कर देंगे।"

मोनू और सोनू चावला के साथ मीटिंग के बाद पिता पुत्र की जोड़ी ने बसंतलाल को फ़ोन किया और चार्टर्ड अकाउंटेंट से कागज़ी कार्यवाही पूरी करने को कहा और साथ हिदायत दी की यह काम जल्द से जल्द हो जाना चाहिए और साथ में किसी के कानों में भी बात नहीं पड़नी चाहिए। भनक किसी को न लगे। दीवारों के भी कान होते हैं।
एक सप्ताह में सभी दस्तावेज बन कर तैयार हो गए। पिछले सोलह सालों की बैलेंस शीट बनी। सभी फॉर्म और दस्तावेज रजिस्ट्रार ऑफ़ कम्पनीज में जमा किये गए। मोनू और सोनू ने साइन किये और दुकान और कंपनी पर खरीददार ने कब्ज़ा किया। दुकान के कब्ज़े के बाद तुरन्त खरीददार ने दुकान के आगे तीनो रेहड़ी वालों को हटाया और शोरूम बनाने के लिए काम शुरू किया।

लगभग एक महीने बाद चमनलाल के पुत्र विकास मार्किट में किसी काम से गया। उसकी नज़र दुकान पर गई। दुकान में काम हो रहा था। घर आ कर वो चमनलाल से बोला "पापा मार्किट की दुकान में काम चल रहा था। चुनी चाचा किस चीज की दुकान खोल रहे हैं।"
"विकास बेटे क्या बात कर रहे हो?" बेचैनी से चमनलाल ने विकास से पूछा।
"जो देखा, वही बता रहा हूं। दुकान में काम चल रहा था।"
"बेटे यह गंभीर बात है, पूरी जानकारी हासिल करो कि खुद चुनी दुकान बनवा रहा है तो ठीक, कहीं दुकान बेच न दी हो। पिछले दिनों खुद चुनी शेयर ट्रान्सफर की बात कर रहा था। मुझे पता नहीं क्यों ऐसा लग रहा कि चुनी ने दुकान न बेच दी हो।" चमनलाल की आवाज़ में आक्रोश था।
अगले दिन पिता पुत्र चमनलाल और विकास मार्किट जाकर पूछताछ करते है। कारीगर दुकान पर काम कर रहे हैं। चमनलाल कारीगरों से पूछताछ करते हैं। कारीगरों ने कहा कि जो पता करना है, मालिक से करना। उन्हें कुछ नहीं मालूम। थोड़ी देर में दुकान का नया मालिक, जिसने चुनीलाल से दुकान खरीदी थी, आया। आते ही उसने कारीगरों से बात की और एक कुर्सी पर बैठ कर कारीगरों को काम करता देखता रहा और कैसे काम करना है, बताने लगा। तभी चमनलाल विकास के साथ दुकान के अंदर आये और कड़क आवाज़ में बोले "दुकान में क्या हो रहा है?"
"आपकी तारीफ?" दुकानदार ने उलटा पूछा।
"वाह भाई वाह, दुकान के मालिक से पूछ रहे हो कि कौन हैं हम।" चमनलाल ने तेज आवाज़ में कहा।
"आवाज़ धीरे, तेज और जोर से बोलना मुझे भी आता है।" दुकानदार ने चिल्ला कर कहा तो सारे कारीगर भी काम रोक कर उनकी ओर देखने लगे। अब चमनलाल शांत स्वर में बोला।
"भाई साहिब इस दुकान में मेरा आधा हिस्सा है। अपने दुकान किससे खरीदी, जब मैंने बेचीं ही नहीं।"
"अगर आप की दुकान है तो इसके कागज़ दिखाइए।"
"ऑफिस में पड़े हैं। दिखा दूंगा।"
"दिखाओगे कैसे। जब दुकान खरीदी है तब सारे कागज़ तो मेरे पास हैं।"
चमनलाल और विकास दुकानदार की बात सुन कर वापिस चले गए।
"पापा अब क्या करें?"
"फ़ाइल निकालो ऑफिस जाकर। अभी दूध का दूध और पानी का पानी कर देते हैं।"
चमनलाल और विकास ने ऑफिस जाकर फ़ाइल देखी। फ़ाइल में सिर्फ शेयर सर्टिफिकेट थे, बाकी तो चुनीलाल के पास थे, क्योंकि बटवारे में दुकान चुनीलाल के हिस्से में गई थी, जो अब चुनीलाल ने बेच दी। दुकान पर नज़र चमनलाल की थी, इसलिए जब चुनीलाल ने प्रस्ताव शेयर ट्रान्सफर का रखा तब चमनलाल ने इनकार कर दिया था। अब क्या किया जाए, चमनलाल सोचने लगा। उसने चुनीलाल को फ़ोन किया और बहुत बिगड़ा कि दुकान कैसे बेच दी। अब चुनीलाल ने दो टूक कह दिया की दुकान उसके हिस्से की थी, वही असली मालिक था, इसलिए बेच दी। चमन को कोई अधिकार नहीं है कि इस विषय में कोई बात करे। चमनलाल को दुकान बेचने वाली बात हज़म नहीं हो रही थी। हांलाकि दुकान चुनीलाल के हिस्से की थी, परन्तु क्योकि शेयर ट्रान्सफर नहीं हुए थे, इस कारण वह खुद को आधा मालिक कह रहा था। चमनलाल ने कोर्ट में केस कर दिया और स्टे आर्डर मांगा। कोर्ट ने स्टे आर्डर कर दिया कि दुकान की यथा स्तिथि बनी रहे। दुकान में कोई काम नही हो सकता। दुकान का खरीददार सकते में आ गया कि यह क्या हो गया। उसने चुनीलाल से संपर्क किया कि भाई के साथ झगड़ा सुलटा ले और स्टे आर्डर को ख़ारिज करवाये। प्रॉपर्टी डीलर बसंतलाल ने भी चुनीलाल पर दबाव डाला। कोर्ट केस से चुनीलाल परेशान हो गया। उसने रिश्तेदार चंपक और नंदन से संपर्क कर चमनलाल को समझाने की बातचीत की। चंपक और नंदन दोनों रिश्तेदार चुनीलाल और चमनलाल की प्रॉपर्टी और बिज़नस के बटवारे के समय गवाह और मध्यस्त थे। उन्होंने भी चमनलाल को समझाया कि उनके सामने ही बटवारा हुआ था। दुकान चुनीलाल के हिस्से में और प्लाट चमनलाल के हिस्से में आये थे। दोनों भाई सहमत थे कि शेयर ट्रान्सफर थोड़े दिन में कर लेंगे। यदि शेयर ट्रान्सफर तब नहीं हुए तो अब कर ले। क्योंकि बटवारे के समय दुकान और प्लाट की कीमत एक बराबर थी, लेकिन आज दुकान की कीमत प्लाट से अधिक हो गई, इसी कारण चमनलाल अपना हक़ दुकान पर जमा रहा था। रिश्तेदारों चंपक और नंदन ने हाथ खड़े कर दिए कि अड़ियल चमनलाल को समझाना उनके बस का नहीं है। अब चुनीलाल बेबस हो गया।

रोज़ रोज़ की झिक झिक, कोर्ट केस से परेशान चुनीलाल ने दुकान वापिस लेने की पेशकश की।
"ठीक है साढ़े सात करोड़ दुकान के और ऊपर से पचास लाख रूपए जो दुकान को शोरूम बनाने में लगाए।" खरीददार ने कहा।
इतना सुन चुनीलाल कुर्सी से उछल पड़ा। "क्या साढे सात, मुझे तो पौने सात करोड़ मिले हैं।"
"मैंने तो साढ़े सात दिए हैं।"
दोनों लड़ने लगे। प्रॉपर्टी डीलर ने हाथ खड़े कर दिए। "देखो मेरा काम सौदा कराना था। मैंने करवा दिया। तुम्हें दुकान बेचनी थी, बिक गई और तुम्हे खरीदनी थी, खरीद ली।"
"एक तो कमीशन ली और ऊपर से पिछतर लाख रुपये रख लिये।"
"देखो हमने तो अपना काम किया है। सौदे में कमीशन प्रॉपर्टी डीलर का हक़ है। बाकी यहां तक रेट वाली बात है। यह तो हमारी कलाकारी है। सौदे के समय तुम दोनों को दाम मंज़ूर थे। अब क्यों बवाल है। बेचते समय पौने सात में खुश थे और खरीदते समय साढ़े सात में सौदा सस्ता लग रहा था। रेट की बात तो करो मत। बाकी रहा दुकान का मसला। जब कब्ज़ा लिया दिया था, तब शांतिपूर्व ढंग से दुकान का कब्ज़ा हो गया। बाद की प्रॉपर्टी डीलर कुछ नहीं कर सकता। कोर्ट कचहरी तुम दोनों भुगतो। इस में दलाल क्या करे। हमारी जिम्मेदारी सिर्फ कब्ज़े तक होती है।" कह कर प्रॉपर्टी डीलर बसंतलाल ने पल्ला झाड़ा।

कोर्ट में केस की सुनवाई शुरू हुई। चुनीलाल ने कोर्ट को कह दिया कि दुकान वनटूथ्री कंपनी के नाम है, इसमें चुनीलाल का कोई हिस्सा नहीं है। कंपनी के मालिक मोनू और सोनू हैं। रजिस्ट्रार ऑफ़ कम्पनीज के रिकॉर्ड के मुताबिक चमनलाल का कोई मतलब और हक़ नहीं है। चमनलाल ने झूठा केस दायर किया है। उस पर उपयुक्त दंड लगाया जाए। चमनलाल ने कागज़ कोर्ट को दिखाए कि मोनू और सोनू से कंपनी चुनीलाल और चमनलाल ने खरीदी थी और पचास प्रतिशत शेयर चमनलाल के पास हैं। शेयर ट्रान्सफर डीड और सर्टिफिकेट दिखलाये। चुनीलाल साफ़ मुकर गया कि बाकि पचास प्रतिशत शेयर उसने ख़रीदे थे। चुनीलाल ने कोर्ट को कहा कि रजिस्ट्रार ऑफ़ कम्पनीज ही हर कंपनी के दस्तावेज रखता है। वहां के पिछले सोलह सालों का रिकॉर्ड बताता है कि सोनू और मोनू ने कभी भी चुनीलाल को शेयर ट्रान्सफर नहीं किये।

कोर्ट ने रजिस्ट्रार ऑफ़ कम्पनीज के दस्तावेज देख कर केस ख़ारिज कर दिया, क्योंकि चमनलाल ने चुनीलाल के विरुद्ध केस दायर किया है और दुकान वनटूथ्री कंपनी के नाम है, जिसके मालिक मोनू और सोनू हैं, इसलिए चुनीलाल पर केस नहीं चल सकता। चमनलाल पुलिस में शिकायत दर्ज़ करवा सकता है।

खरीददार खुश हो गया और दुकान पर काम फिर से शुरू करवाया। चमनलाल को झटका लगा, लेकिन उस की नज़र दुकान की बढ़ती कीमतों पर थी। चमनलाल ने पुलिस में धोखाधडी की दर्ज़ करवाई और चार्टर्ड अकाउंटेंट के खिलाफ इंस्टिट्यूट ऑफ़ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स में शिकायत कि उसने नियमों का उलंघन किया है और एक दिन में सोलह सालों की बैलेंस शीट साइन की। असली शेयर सर्टिफिकेट उसके पास हैं और डारेक्टर भी है परन्तु पिछले डायरेक्टर से बैलेंस शीट साइन करवाई। यह धोखाधड़ी है और उसका प्रैक्टिस लाइसेंस कैंसिल किया जाए, मेम्बरशिप समाप्त की जाए।

पुलिस में दायर शिकायत पर क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर मलिक ने जांच शुरू की। चमनलाल ने सोलह साल पहले जब चुनीलाल के साथ वनटूथ्री कंपनी खरीदी थी तब डायरेक्टर बनने के कागज़ रजिस्ट्रार ऑफ़ कम्पनीज में जमा कराये थे। सोलह साल पहले कंप्यूटर का ज़माना नहीं था। हस्तलिखित कागज़ की प्रतिलिपि और रजिस्ट्रार ऑफ़ कम्पनीज की हस्तलिखित रसीद की प्रतिलिपि चमनलाल के पास थी। इस दो दस्तावेज के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की।
चमनलाल ने मलिक पर दबाव डाला कि यह दस्तावेज सुरेश अकाउंटेंट के हाथों के बने हैं और वह आज भी चुनीलाल की  कंपनी में अकाउंटेंट है।
चुनीलाल ने मालिक पर रुपये से डोरे डाले।
"मलिक साब, पूरी बात मैंने आपको बता दी। मैं मानता हूं कि दस्तावेज असली हैं पर हक़ीक़त यह भी है कि मालिकाना हक़ सिर्फ मेरा है। प्लाट पर कागज़ी हिस्सा मेरा भी है पर मालिक चमनलाल ही है। अब आप ही माई बाप हैं। रिपोर्ट मेरे हक़ में लिख दो, जो कहोगे, वही होगा। बस रकम बोलिये, आपको मिलेगी।"
"सारा दिन चोर, उच्चको के बीच गुज़र जाता है। परिवार की तरफ ध्यान ही नहीं दे पाते। बच्चे बड़े हो रहे हैं। पुलिस की तनख्वाह में कहां अच्छी जगह बच्चों को सेटल कर सकते हैं। सोच रहा हूँ कि लड़का कनाडा में सेटल हो जाए तो उसकी ज़िन्दगी संवर जाएगी और अपना पिता होने का फ़र्ज़ पूरा हो जाएगा। हर पिता का सपना होता है कि उसका पुत्र अच्छे काम धंधे में लग जाए।" मलिक ने एक मोटी रकम का फरमान सुना दिया।
"फ़िक्र न करो मलिक साब, समझो आपका लड़का कनाडा चला गया।" चुनीलाल ने मलिक की पीठ थपथपाते हुए कहा।
"लेकिन आपका काम लड़के के कनाडा सेटल होने पर ही होगा। पुलिस से कोई हेराफेरी नहीं, नहीं तो आपकी हेराफेरी कोर्ट केस में, समझ गए न।" मलिक ने दो टूक कहा।
"मालिक साब, चुनीलाल की ज़ुबान पत्थर की लकीर है। कभी मिटेगी नहीं। लड़के का पासपोर्ट है।"
"पासपोर्ट है।"
"एक महीने के अंदर लड़का कनाडा होगा। आप निश्चिन्त रहें।"
"फिर आप भी निश्चिन्त रहें।"
घर आ कर विवेक ने पिता से पूछा "पापा, ज्यादा मांग रहा है। आप कैसे इतनी जल्दी मान गए।"
"कोर्ट और जेल से बचने का सौदा सस्ता समझो, बेटे। इन हालात में सब कुछ मानना होगा।"
एक महीने के अंदर मलिक के लड़के को कनाडा रवाना कर दिया, तब मलिक ने चुनीलाल से कहा। "सारा दामोदर सुरेश अकाउंटेंट पर निर्भर है, क्योंकि उसके हाथ के लिखे कागज़ चमनलाल के पास हैं और हैंडराइटिंग भी मिलती है।"
"सुरेश अकाउंटेंट मेरे पास काम करता है। चमन और मेरे बिज़नस बटवारे से पहले वो सयुंक्त रूप से काम करता था, इसलिए उसके हाथ के लिखे कागज़ चमन के पास हैं। आप फ़िक्र न करें। जैसे आप कहेंगे, वो वही ब्यान देगा। जब आपका ख्याल रखा है। उसका तो पिछले सोलह साल से कर रहा हूं।"
"ठीक है उसे कल शाम को क्राइम ब्रांच के ऑफिस ले आना। ब्यान वहीँ दर्ज़ होगा। जैसा मैं कह रहा हूं, उसे समझाना कि निडर हो कर ब्यान दर्ज़ कराए। ऑफिस में सब होते हैं।"
अगले दिन सुरेश अकाउंटेंट को सुबह सब समझा दिया कि क्या ब्यान देना है। सुरेश ने चुनीलाल का नमक खाया था। समय समय पर चुनीलाल से एडवांस भी मिलता रहता था, जिसे तनख्वाह में एडजस्ट किया जाता था। सुरेश ने कभी वापिस नहीं किया। शाम को नमक का क़र्ज़ चुकाने का समय आ गया। क्राइम ब्रांच के ऑफिस में सुरेश ब्यान देने लगा। मलिक ने सुरेश के आगे कागज़ रखे। "सुरेश तुमने ब्यान अपने हाथों से लिखना है, क्योंकि तुम्हारी हैंडराइटिंग मिला कर रिपोर्ट तैयार करनी है।"
सुरेश ने ब्यान देना शुरू किया "मैं सुरेश कुमार ईश्वर को साक्षी मान कर कहता हूं कि मैं पिछले सोलह सालों से चुनीलाल चमनलाल एंड कंपनी में अकाउंटेंट की पोस्ट पर काम कर रहा हूं। कंपनी के एकाउंट्स के साथ इनकम टैक्स और रजिस्ट्रार ऑफ़ कम्पनीज का भी काम करता हूं। जैसा मालिक कहते हैं, प्राइवेट नौकरी में तो वैसा करना पड़ता है। आपने जो रजिस्ट्रार ऑफ़ कम्पनीज के कागज़ मुझे दिखाए, वो मेरे हाथ के बने है। चमनलाल और चुनीलाल के बिज़नस बटवारे से कुछ समय पहले, लगभग तो साल पहले बने थे। उस समय मुझे नहीं मालूम था कि बिज़नस का बटवारा होना है। चमन सेठ ने जैसा कहा, मैंने कागज़ तैयार कर दिए। मोनू और सोनू की जगह चमनलाल ने खुद को डायरेक्टर बनाने के कागज़ तैयार करवाए। जैसा चमन सेठ ने कहा, मैंने किया। मुझे अच्छी तरह याद है कि ये कागज़ लगभग दो साल पहले तैयार हुए तब सोलह साल पहले की रजिस्ट्रार ऑफ़ कम्पनीज की रसीद गलत होगी। जिस तरह मैंने कागज़ बनाए, उसी तरह रजिस्ट्रार ऑफ़ कम्पनीज में एक आदमी है जो पुरानी रसीद बुक रखता है जो कम्प्यूटराइजेशन से पहले की है। वो पैसों के बदले पुरानी रसीद काटता है।"


मलिक ने रिपोर्ट चुनीलाल के हक़ में लिख दी। चुनीलाल सभी तरह के अपराध से मुक्त हो गया और चंपक और नंदन के हाथों चमनलाल को सन्देश दिया "अपनी नज़र साफ़ करे, नहीं तो प्लाट का आधा हिस्सा मैं ले सकता हूं।"
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जगमग

दिये जलें जगमग दूर करें अंधियारा अमावस की रात बने पूनम रात यह भव्य दिवस देता खुशियां अनेक सबको होता इंतजार ...