Saturday, March 07, 2015

सफ़र में धूप


सफ़र में धूप है
पसीने से तर बतर चल रहा हूं
सफ़र में बारिश भी है
पानी की तेज धार में भीगा चल रहा हूं
सफ़र में पतझड़ आई है
गिरे गिरे सूखे पत्तों को रोंदता जा रहा हूं
सफ़र में जाड़ा भी सता रहा है
ठिठुरता बचता राह पर चलता जा रहा हूं
मौसम पल पल बदलता रहता है
मैं उसी रफ़्तार से चलता जा रहा हूं
ज़िन्दगी भी एक सफ़र है

मैं झूलता जा रहा हूं
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