Thursday, May 21, 2015

दादा नंगू शेम शेम



जून का महीना, जबरदस्त गर्मी, दोपहर का समय, जबरदस्त लू चल रही है। घर में दादा बसंत लाल और उनके पौत्र शौर्य हैं। शौर्य के माता पिता दोनों नौकरी पेशा, अपने अपने ऑफिस सुबह नौ बजे चले गए। शौर्य की दादी अपने बीमार भाई को देखने अंबाला गई है। दादा बसंत लाल रिटायर हो चुके हैं। दादा पोता की आपस में खूब पटती है। उम्र का अंतर बसंत लाल नहीं देखते और सारा दिन अपने पौत्र शौर्य के साथ बिताते हैं। उसको स्कूल छोड़ना, फिर दोपहर में स्कूल से लाना, उसके साथ खेलना, बगीचे में शाम को जाना और पढ़ाई में शौर्य की मदद करना। बसंत लाल का समय शौर्य के साथ कैसे बीत जाता है, खुद बसंत लाल को भी पता नहीं चलता। कई बार सोचते है कि शौर्य के बिना तो घर की दीवारें ही देखते रह जाते रिटायरमेंट के बाद। बच्चों से ही घर की रौनक होती है। दादा पोते की घनिष्टा के चलते बसंत लाल के पुत्र और पुत्रवधु निश्चिन्त हो कर नौकरी पर जाते और पूरा घर का प्रबंधन बसंत लाल और शौर्य की दादी के हाथ में था।

दोपहर के खाने के बाद बसंत लाल को झपकी आई और वे बिस्तर पर लेट गए। शौर्य की आंखों में मस्ती झलक रही थी, नींद कोसो दूर थी। कुछ देर तक खिलौनों के साथ खेलता रहा, फिर टीवी चला कर चैनेल बदले और बंद कर दिया। क्या करे क्या करे सोचते सोचते स्टोर रूम में घुस गया। कहां क्या पड़ा है, सामान इधर उधर किया। कुछ सामान पलट दिया, कुछ गिरा दिया। स्टूल पर चढ़ कर अलमारी के ऊपर वाली दराज़ में क्या रखा है, देखने लगा। हाथ से एक डिब्बा गिरा और नीचे फर्श पर खुल गया। पुराने डिब्बे में पुराने समय की फ़ोटो पड़ी थी, गिर कर ज़मीन पर फ़ैल गयी। शौर्य ने देखा कि डिब्बे में बहुत सारी फ़ोटो हैं। वह स्टूल से नीचे उतरा और फ़ोटो देखने लगा। आज के डिजिटल युग में कैमरे और मोबाइल फ़ोन में ही फ़ोटो संग्रह होता है। शौर्य भी मोबाइल फ़ोन में फ़ोटो देखता है। प्रिंट फ़ोटो देख कर शौर्य को उत्सुकता हुई और वह फ़ोटो वाला डिब्बा उठा कर दादा के पास आया।

"दादा ये क्या है, बताओ?"

दादा बसंत लाल जो झपकी लेते हुए सो गए थे, पोते शौर्य की आवाज़ से नींद से जागे। उम्र के इस पड़ाव पर दोपहर को थोडा आराम करना और झपकी लेना बसंत लाल की दिनचर्या है। बसंत लाल ने चश्मा लगाया और पोते शौर्य के हाथ में डिब्बा देख कर पूछा "यह क्या उठा लाए?"
"बताओ, दादू इसमें क्या है।" कह कर फ़ोटो का डिब्बा बिस्तर पर पटका। डिब्बा फिर से खुल गया और फ़ोटो बिखर गए। फ़ोटो देख कर दादा ने पूछा "इनको कहां से ले कर आए।"
"स्टोर में से। बताओ क्या है।"
"ये तो फ़ोटो हैं।"
"किसकी हैं।"
"आओ, ऊपर बिस्तर पर बैठो, देखते हैं किस किस की फ़ोटो हैं।"
फ़ोटो पुरानी थी। श्वेत श्याम फ़ोटो, जिन्हें कभी खुद बॉक्स कैमरे से बसंत लाल ने खींचा था। कुछ खुद बसंत लाल की शादी की फ़ोटो थी। कुछ बच्चों की। बसंत लाल और शौर्य फ़ोटो देखने लगे।
"शौर्य देखो यह फ़ोटो तुम्हारे पापा की है।"
"पापा की?" शौर्य ने दांतों तले उंगली दबा कर पूछा।
"तुम्हारे पापा हैं, ये फ़ोटो मैंने खींची थी जब तुम्हारे पापा तुम्हारे जितने छोटे थे।"
"पापा ने क्या पहना है?"
"पापा ने कमीज और निकर पहनी है।"
"किसकी कमीज निकर पहनी है। दादा आपकी, देखो कितनी बड़ी है।"
"पहले ऐसी बड़े बड़े खुले खुले कपडे पहनते थे। यह फ़ोटो देखो, इसमें हम सब नहा रहे हैं।"
"कौन कौन नहा रहा है। कहां नहा रहे हो?"
"यह फ़ोटो मसूरी के पास केम्पटी फॉल की है। वहां बहुत बड़ा झरना है। हम गर्मी की छुट्टियों में घूमने मसूरी गए थे। इस फ़ोटो में मैं हूँ, ये तुम्हारी दादी है, ये तुम्हारे पापा है। ये तुम्हारी दादी और ये तुम्हारी बुआ। हमने वहां पिकनिक की थी और नहाये थे। ये देखो, पीछे कोल्ड ड्रिंक्स की बोतलों का क्रेट पड़ा है। कोल्ड ड्रिंक्स की बोतल ठंडी करने के लिए पानी के झरने में रख देते हैं। पानी में ठंडी हो जाती हैं। फ्रिज की ज़रूरत ही नहीं पड़ती। यह कुदरती तरीका होता है।"
"इसमें तो पापा ने और आपने कपडे नहीं पहन रखे। दादी ने तो साड़ी पहनी है। बुआ ने भी फ्राक पहनी है।"
"पापा ने निकर पहनी है और मैंने भी निकर पहनी है। आप ध्यान से देखो।"
"हां दादू, ये किसकी फ़ोटो है।"
"यह फ़ोटो दादा दादी की शादी वाली फ़ोटो है। दादी दुल्हन बनी हुई है और दादा दूल्हा।"
"दादी की किससे शादी हो रही है?"
"दादी की शादी दादा से हो रही है।"
"शादी क्यों हो रही है?"

"बेटे तुम तो बहुत शरारती हो गए हो। सवाल ऐसा पूछा कि क्यों हो रही है। बेटे क्यों मत पूछ। बस हो गई यह देखो और फ़ोटो।" कह कर बसंत लाल ने शौर्य का ध्यान दूसरी फ़ोटो में लगाया और मन मन में सोचने लगे कि कई बार बच्चे ऐसे प्रश्न पूछते हैं जिनका जवाब देना मुश्किल है या बच्चों को जवाब दे कर संतुष्ट करना मुश्किल होता है। अब दादा की दादी से क्यों शादी हुई, किसी और से क्यों नहीं हुई। इसका जवाब हो केवल ऊपर बैठे नीली छतरी वाले के पास ही मिलेगा। मैं अब कैसे बताऊं कि क्यों हुई। बस समझ लो कि हो गई। आज कल तो प्रेम विवाह होते हैं। बसंत लाल की शादी के समय तो मां-बाप ने जहां तय कर दी, शादी कर ली।

"दादा इस फ़ोटो में बच्चा कौन है?"
फ़ोटो देख कर दादा बसंत लाल ने पोते शौर्य को बताया "इस फ़ोटो में दो बच्चे है। यह जो लड़का है, ये तुम्हारे पापा हैं और यह जो लड़की देख रहे हो, यह तुम्हारी बुआ है। यह फ़ोटो मेरे छोटे भाई की शादी पर खींची थी।"
"दादू आपका छोटा भाई कौन है?"
"मेरा छोटा भाई आपके पापा के चाचा हैं। वो कानपुर में रहते हैं।"
"कानपुर कहां है दादू?"
"कानपुर बहुत दूर है। ट्रेन मैं जाते हैं। आठ घंटे रेल गाड़ी में लगते है। रात को रेल में बैठो, सो जाओ, सुबह सुबह कानपुर जाता है।"
शौर्य ने एक फ़ोटो और निकाली और दादा से पूछा "दादू इस फ़ोटो में कौन सा बच्चा है।"

फ़ोटो देख कर दादा बसंत लाल चुप हो गए। फ़ोटो को देखते रहे लेकिन चुप रहे। फ़ोटो बहुत पुरानी थी। मुड़ी तुड़ी फ़ोटो, जो कोने से थोड़ी फटी हुई भी थी। फ़ोटो में एक छोटा बच्चा सिर्फ बनियान पहने एक पेड़ के नीचे खड़ा था।
"दादू इस बच्चे ने निकर, अंडरवियर कुछ भी नहीं पहना। कौन है यह नंगा बच्चा।"
"शौर्य यह फ़ोटो बहुत पुरानी है। इस बच्चे को पहचाने की कोशिश कर रहा हूं कि यह बच्चा कौन है।"
"दादा आपको तो सब मालूम है कि किस फ़ोटो में कौन है। बताओ दादू, इस फ़ोटो में नंगा बच्चा कौन है जिसने सिर्फ बनियान पहना हुआ है, निकर भी नहीं पहनी, अंडरवियर भी नहीं पहना।"

बसंत लाल बताने में हिचकिचा रहे थे। फ़ोटो खुद बसंत लाल के बचपन की थी, घर के बरामदे में नीम का पेड़ था। ऐसी ही गर्मियों के दिन थे। उन दिनों कूलर, एयर कंडीशनर घर में नहीं होते थे। दोपहर के समय घर के बरामदे में खेल रहे थे। शू शू करने के लिए निकर उतारी थी। नाली में शू शू करने के बाद बिना निकर पहने पेड़ के नीचे कंचे खेलने में व्यस्त हो गए थे। पिताजी ने तब फ़ोटो खींची थी। दादा पोते से यह बात छुपाना चाह रहे थे, कि फ़ोटो उनकी खुद की है।

"शौर्य पता नहीं कौन बच्चा है ये फ़ोटो में, हो सकता है, कोई पड़ोस का बच्चा रहा होगा। याद नहीं रहा कि कौन सा बच्चा है।"
"दादू मुझे याद गया, दादी एक दिन कह रही थी कि दादू की एक फ़ोटो बचपन की है, जिसमे दादू नंगे खड़े है। बताओ दादू ये फ़ोटो आपकी है न।" शौर्य मुस्कुरा रहा था।
बसंत लाल चुप रहे। परन्तु फ़ोटो देख कर शौर्य कहने लगा "दादू नंगू शेम शेम।"

दादू बसंत लाल सिर्फ मुस्कुराते रहे। शौर्य कह रहा था "दादू नंगू शेम शेम।"
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