Wednesday, September 02, 2015

डिनर

इंद्रजीत ने ऑफिस से निकल कर कार में बैठते इंदु को फ़ोन किया। इंदु ने कहा कि वह डिनर के लिए इंतज़ार कर रही है। इंद्रजीत ने पूछा कि कहां आना है?
"तुम्हारे ऑफिस के नज़दीक साकेत में होटल शेरटन मैं ही हैं, वहीँ जाओ।"
"पांच मिनट में आता हूं। पैदल भी पांच मिनट लगेंगे और कार में भी। कार लेकर आता हूँ, फिर घर वहीं से चला जाऊंगा।"
"ठीक है, हम नीचे लॉबी में तुम्हारा इंतज़ार कर रहे हैं।"

इंद्रजीत ठीक पांच मिनट में होटल शेरटन पहुंच गया। होटल की लॉबी में इंदु और स्टीफंस मिले। इंद्रजीत को इतनी उम्मीद नहीं थी कि इंदु और स्टीफंस दोनों बड़ी गर्मजोशी से मिलेंगे। हंसते हुए दोनों ने इंद्रजीत का स्वागत किया और रेस्टारेंट के लिए चले। रेस्टारेंट में कोने की टेबल पहले से ही आरक्षित थी। तीनों बैठ गए।

"और किसी ने भी आना है?" इंद्रजीत ने पूछा।
इंदु ने झट से जवाब दिया "डिनर एक दम निजी है। तुम्हे और स्टीफंस को एक दूसरे से मिलवाना था।"
"आज तीन बजे भी मिले थे।" इंद्रजीत ने कहा।
"इंद, वो कंपनी की मीटिंग थी। यह डिनर निजी है। स्टीफंस को मालूम है कि मेरी शादी हुई थी, एक बच्चा भी है। मगर शादी किस से हुई थी, वो कौन है, कैसा दिखता है। उसका व्यक्तित्व कैसा है। उसके लिए तुम्हे इंद डिनर पर खास तौर पर बुलवाया है। आज मीटिंग के बाद जब मैंने स्टीफंस को बताया कि तुम मेरे पहले पति हो तब स्टीफंस ने तुमसे मिलवाने के लिए कहा।"

इंद्रजीत कुछ पल चुप रहा। उसको सूझ नहीं रहा था कि बात कहां से और कैसे शुरू करे। इंदु ने चुप्पी तोड़ी "इंद क्या लोगो, कुछ शैम्पेन!"
इंद्रजीत मुस्कुरा दिया "स्टीफंस तुम लो, इंदु अगर तुम भी पीती हो तो आर्डर करो, परंतु मैं तो सूफी संत हूं, नो स्मोकिंग, नो ड्रिंकिंग और पूरा शाकाहारी। कहीं मैं आपके कबाब में हड्डी तो नहीं बन रहा हूं?"
"इंद्रजीत, क्या मैं भी तुम्हे इंद कह सकता हूं जैसे इंदु तुम्हे पुकार रही है?"
"बिल्कुल इंद ही कहो, छोटा और अच्छा लगता है। वैसे मुझे इंद नाम इंदु ने दिया। शादी से पहले जब कॉलेज में पढ़ते थे, तभी से इंद हूं। मुझे आज बहुत ख़ुशी हो रही है कि तलाक के बारह वर्ष बाद भी इंदु मुझे पुराने नाम से पहचानती है। मुझे भूली नहीं है।"
"इसमें भूलने वाली कोई बात नहीं, पांच वर्ष शादी की, तीन वर्ष कॉलेज के और कॉलेज शादी के बीच तीन वर्ष, लगभग ग्यारह वर्ष का साथ कोई निष्ठुर ही भूल सकता है, मैं तो तुम्हारी बीवी रही हूं।" इंदु ने एक हाथ स्टीफंस की ओर किया जो स्टीफंस ने मजबूती से पकड़ा और दूसरा हाथ इंद्रजीत की ओर बढ़ाया। इंद्रजीत ने हाथ पकड़ा परंतु धीरे से और पकड़ में नरमाई थी। इंद्रजीत कल था, स्टीफंस आज है।
स्टीफंस ने इंदु का हाथ पकडे हुए कहा "इंदु आज हम भी शाकाहारी भोजन करेंगे, क्या कहती हो?"
"बिलकुल ठीक, जैसा देश, वैसा भेष। इंद के साथ डिनर निम्बू पानी के साथ और वेजीटेरियन डिनर।" इंदु ने आर्डर देते समय इंद से पूछा "क्या लोगो?"
"आज तुम्हारी पसंद इंदु, मैं तो घिया, तोरी, टिंडा सब खा लेता हूं।"
"वो सब यहां नहीं मिलेंगी।"
"शायद भरवां टिंडा मिल जाए, नाम अजीब सा हो सकता है।"

तभी वेटर को आर्डर दिया। "इंदु प्लेन निम्बू पानी के बदले स्वीट साल्टेड सोडा लाइम का आर्डर दो। इंडियन शैम्पेन का मज़ा लो।" इंद्रजीत ने सलाह दी।
"इट्स ग्रेट।" स्टीफंस ने कहा।
आर्डर देने के बाद इंद्रजीत ने चुप रहने से बेहतर बात करना माना और स्टीफंस से पूछा "इंदु कैसी लगती है आपको?"
"इंदु बहुत अच्छी है। सुन्दर, आकर्षक और ख्याल रखने वाली।"
"इंदु के साथ पहली शादी है आपकी?"
"नहीं, मेरी तीसरी शादी है। पहली दो साल चली, दूसरी सिर्फ छः महीने। उसके बाद चार पांच साल तक मैंने शादी के लिए सोचा नहीं। पिता के व्यापार में व्यस्त हो गया। इंदु ने हमारी कंपनी ज्वाइन की। इसकी काम के प्रति लगन और जोश से मैं प्रभावित हुआ। मैंने इंदु को महत्वपूर्ण कार्य दिए और इंदु ने उनमें सफलता प्राप्त की। फिर नज़दीकियां हुई और मैंने एक सम्पूर्ण स्त्री को इंदु में पाया। आज चार साल हो गए है हमारे विवाह को।" स्टीफंस के कहने के अंदाज़ में गर्व था।

इतने में स्वीट साल्टेड लाइम सोडा गया। लाइम सोडा पीते हुए इंद्रजीत सोच रहा था कि भारत और अमेरिका की संस्कृति में बहुत अंतर है। भारत में भी आधुनिकता के नाम पर दूसरा तीसरा विवाह भी होता है, परंतु उनका अनुपात बहुत कम है, लेकिन अमेरिका में यह आम बात है। स्टीफंस ने तीसरी शादी की, दूसरी तरफ इंद्रजीत इंदु से तलाक के बाद दूसरी शादी की सोच सका। उस समय उसकी तनख्वाह कम थी, पद छोटा था और एक डर कि शायद फिर तलाक की सी नौबत जाए। आज पद भी है और अच्छी मोटी तनख्वाह भी, परंतु इच्छा नहीं दूसरे विवाह की।

खाना खाते इंदु ने इंद्रजीत से पूछा कि दूसरा विवाह क्यों नहीं किया। इंद्रजीत ने हंस कर कि शायद डर की वजह से नहीं किया दूसरा विवाह। डिनर आपसी बातों के साथ समाप्त हो गया। बातें करते हुए होटल की लॉबी में गए। इंद्रजीत को उम्मीद थी कि डिनर के समय जॉइंट वेंचर की बात भी होगी। खैर डिनर के समय तो नहीं परंतु लॉबी में इंदु ने इंद्रजीत से पूछ ही लिया।
"इंद क्या जॉइंट वेंचर से सम्बंधित कुछ बात कर सकती हूं।"
"अवश्य।" इंद्रजीत मुस्कुराते हुए बोला।
"तुम्हारा निर्णय कंपनी में कितना मायने रखता है।"
"इंदु, आखरी निर्णय और फैसला गुरुस्वामी और कनोडिया मिल कर लेते है। यह अवश्य है कि मेरे कहे को वो दोनों गंभीरता से लेते हैं। इतना तो मेरा मानना है।"
"इंद तुम दो बातों पर अड़ गए थे। तुम्हारा इतना अड़ियल रुख  पहले देखा नहीं।"
"बारह वर्षो में कई बातें बदल गई हैं। हां एक बात जो नहीं बदली मुझे लगता है वो तुम्हारी ज़िद अपनी बात को मनवाने वाली।"
"इतना गलत मत समझो मुझे इंद।"
"खैर छोड़ो इंदु इन बातों को, आज मैं और तुम जुदा हैं। नदी के दो छोर जो कभी नहीं मिलेंगे। जो पूछना है, बेधड़क पूछो।"
"जॉइंट वेंचर को लेकर तुम्हारा क्या नजरिया है?"
"एक बात तुम मान लो तो जॉइंट वेंचर हो जाएगा।"
"कौन सी।"
"हमारे बुनियादी ढांचें को हमारी पूंजी मान लो, जॉइंट वेंचर हो जाएगा। हिस्से में आधा आधा यानी फिफ्टी फिफ्टी पर हम सहमत हैं।"
"अंदर की बात बता रहे हो, कहीं कंपनी को पता चल गया तब।"
"कुछ नहीं होगा क्योंकि मैं आपके साथ डिनर पर हूं, यह बात मैं गुरुस्वामी और कनोडिया को बता कर आया हूं और मेरा तुम्हारे साथ का अतीत भी मैंने आज बता दिया हैं। गुरुस्वामी को मेरी निष्ठा पर भरोसा है। एक बात और गुरुस्वामी ने ही मुझे इजाजत दी है कि कंपनी का निर्णय तुम्हे बता दूं। हमारा निर्णय क्या है, मैंने तुम्हे अवगत करा दिया है। तुम्हारे निर्णय का हमें इंतज़ार रहेगा कल तीन बजे तक। मिलते हैं कल तीन बजे मीटिंग में।"


इंदु और स्टीफंस एक दूसरे को देख रहे थे। इंद्रजीत की कार चुकी थी। कार स्टार्ट करके इंद्रजीत ने कहा "इंदु अंतिम फैसला तुम दोनों को लेना है, मेरा कोई हस्तछेप नहीं है, परंतु एक सलाह है कि कुछ तुम मानो, कुछ हम माने। मेरा सिद्धान्त है, मानना मानना तुम्हारे हाथ में है।" कह कर इंद्रजीत ने कार आगे बढ़ा ली।


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