Friday, September 18, 2015

गुरूदेव दया



गुरूदेव दया भंडार भरे, गुरूदेव हरे गुरुदेव हरे।
पतितों को भव से पार करें, गुरूदेव हरे गुरुदेव हरे।
गुरु घट घट की तुम जानत हो, और दीनों के प्रतिपालक हो।
गुरूदेव दया भंडार भरे, गुरूदेव हरे गुरुदेव हरे।

जब दया दृष्टि दिखलाते हो, तब तीनों ताप मिटाते हो।
दुःख सारे पल में दूर करे, गुरुदेव हरे गुरुदेव हरे।
गुरूदेव दया भंडार भरे, गुरूदेव हरे गुरुदेव हरे।

गुरु भक्ति भाव जगाते हो, और नाम का रंग चढ़ाते हो।
दीनों के हित अवतार भरे, गुरुदेव हरे गुरुदेव हरे
गुरूदेव दया भंडार भरे, गुरूदेव हरे गुरुदेव हरे।

मम हृदय माही निवास करो, अंतर में ज्ञान प्रकाश करो।
हो तीन पाप से आप परे, गुरुदेव हरे गुरुदेव हरे।
गुरूदेव दया भंडार भरे, गुरूदेव हरे गुरुदेव हरे।

जो गुरु चरणों कागुरु ध्यान धरे, वो जग में सुधा रस पान करे।
नाही पावे जन्म नाही मरे, गुरुदेव हरे गुरुदेव हरे
गुरूदेव दया भंडार भरे, गुरूदेव हरे गुरुदेव हरे।
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