Tuesday, October 06, 2015

सरस्वती वन्दना

सरस्वती वन्दना
या कुन्द्न्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता ।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना ।।
या ब्रह्माच्युतशड्करप्रभृतिभिर्देवैर्सदा वन्दिता ।
सा मां पातु सरस्वति भगवती नि:शेषजाड्यापहा ।।

जिनका चमेली के फूल के रंग जैसे चन्द्रमा और हिम के हार के समान गौर (सफेद और हलका पीला) वर्ण है, जिन्होने सफेद वस्त्र धारण कर रखे हैं, जिनका हाथ वीणा के सुन्दर दण्ड से सुशोभित है, जो सफेद कमल के ऊपर विराजमान हैं, ब्रह्मा, विष्णु, शिव आदि सर्वदेव जिनकी सदा स्तुति करते हैं, वे समस्त अज्ञान और जडता का नाश करने वाली भगवती सरस्वती मेरी रक्षा करें।

Saraswati Vandana


May Goddess Saraswati, who is fair like Jasmine Coloured moon and whose pure white garland (of pearls) is like frostly dew drops, who is adorned with radiant white clothese and on whose beautiful hand rests the Veena, whose seat (throne) is a white Lotus, who is always worshipped by Gods of the rank of Lord Brahma, Vishnu and Mahesha. The same deity (Divine Mother) Goddess Saraswati, who removes all the sluggishness (laziness), should protect me.
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