Friday, October 16, 2015

हनुमानस्तुति

हनुमानस्तुति

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं,
दनुवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम ।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशम,
रघुपति प्रियभक्तं वातजातं नमामि ।।

अतुल बल के धाम, सोने के पर्वत (सुमेरू) के समान कान्तियुक्त शरीर वाले, दैत्यरूपी वन (को ध्वंस करने) के लिए अग्नि रूप, ज्ञानियों में अग्रगण्य, सम्पूर्ण गुणों के निधान, वानरों के स्वामी, श्रीरघुनाथ जी के प्रिय भक्त पवन पुत्र श्रीहनुमान जी को मैं प्रणाम करता हूं

Hanuman Prayer

Having Enormous power,
Body just like mountain of Gold,
Destroyer of forest of Demons.
Foremost amongst the scholars.
Treasure of all virtues,
King of monkeys,
Devout of Lord Sri Rama,

I pray to Vayu’s son Sri Hanumana.
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