Tuesday, October 27, 2015

गोविन्दस्तुति

गोविन्दस्तुति
कस्तूरीतिलकं ललाटपटले, वक्ष:स्थले कौस्तुभम्
नासाग्रे वर मौक्तिकं करतले वेणु करे कड्कणम् ।
सर्वागे हरिचन्दनं सुललितं कण्ठे च मुक्तावलि:
गोपस्त्रीपरिवेष्टितो विजंयते गोपाल चूडामणि ।।

जय हो जय हो उन गिरधर गोपाल की, जिन के मस्तक पर कस्तूरी का तिलक और वक्ष:स्थल में कौस्तुम मणि विराजमान है। नाक के अगले भाग में सुन्दर मोती चमक रहा है। कंकण-सुशोभित हाथ में बांसुरी शोभा पा रही है। सारा शरीर सुन्दर चन्दन से लिप्त है और गले में वैजयन्ती माला धारण किये जो गोपांननाऔं से घिरे हुए हैं।

Govinda Prayer

(Jai Jai Giridhar Gopala), Whose forehead is decorated with musk. There lies Kaustubham Pearl on his chest. A brilliant pearl is shining on the front portion of his nose.


Holding flute in His hands with Kangana. His whole body is smeared with fragrant sandal-paste. He is sporting necklace of pearls and is surrounded by Gopis. I salute Thee. 
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जगमग

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