Saturday, October 31, 2015

निवेदन

निवेदन 

त्वमादिदेव: पुरूष: पुराण:
त्वमस्य विश्वस्य परं निधानम् ।
वेत्तासि वेध्धं च परं च धाम,
त्वया ततं विश्वमनन्तरूपम् ।।

हे अनन्त रूपों वाले प्रभु इस सारे संसार का जाल आपका ही फैलाया हुआ है। आप ही इसके कारणरूप आदि देवता हो, आप ही पुराण पुरूष हो। इस संसार की सर्वश्रेष्ठ निधि हो। सब कुछ जानने वाले हो। प्राणियों का प्राप्तव्य परम धाम हो।

Submission 

O, God with innumerable images, the web of this world is created by you. You are the root cause God, you are life-giver. You are the best treasure of this universe. All knowing Lord, you are ultimate goal, of all creatures, which is worth attaining.


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