Monday, November 02, 2015

परिपूर्णता

परिपूर्णता

ऊं पूर्णमद: पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते ।
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।

यह परमात्मा पूर्ण है। यह जगत भी उस ब्रहम से पूर्ण है क्योंकि यह पूर्ण उस पूर्ण ब्रहम से ही उत्पन्न हुआ है। उस पूर्ण ब्रहम में से पूर्ण को निकाल देने पर भी वह पूर्ण ही बाकी रहता है।

Absolute Whole


Om, That is whole, this is whole, from the whole, the whole becomes manifest. From the whole, when the whole is negated, what remains is again the whole.
Post a Comment

मौसम

कुछ मौसम ने ली करवट दिन सुहाना हो गया रिमझिम बूंदें पड़ने लगी आषाढ़ में सावन आ गया गर्म पानी भाप बन कर उड़ गया ...