Monday, November 30, 2015

तुम्हें पा कर मैंने

तुम्हें पा कर मैंने

तुम्हें पा कर मैंने जहान पा लिया है।
जमीन तो जमीन, आसमान पा लिया है।।
निराशा के बादल अब छट गए हैं।
आशा की किरणें अब उदित हो गई है।
न उजड़ेगा अब कभी वह आशियाँ पा लिया है।
घोसला घर तुम्हे पा कर मैंने जहान पा लिया है।
तुम्हें पा कर मैंने जहान पा लिया है।
जमीन तो जमीन, आसमान पा लिया है।।


अब न तूफ़ान का भय है, न मंजिल की चिंता।
न डूबने का डर है और न मंजिल का खटका।
वह सच्चा गुरुवर मैंने अब पा लिया है।
तुम्हे पा कर मैंने जहान पा लिया है।
जमीन तो जमीन, आसमान पा लिया है।।

सतायेगी अब मुझे न गर्मी की तपन, और न जाड़े का ठिठुरना।
न वर्षा की टपतपन और न पतझड़ की पीड़न।
वह रहबर अज़ीम (महान मार्गदर्शक) मैंने अब पा लिया है।
तुम्हे पा कर मैंने जहान पा लिया है।
जमीन तो जमीन, आसमान पा लिया है।।

न मन में रहेगा अब किसी के प्रति ईर्षा और द्वेष-भाव।
और न घृणा, न छुआ-छूत और न कोई भेद-भाव।
बहती रहेगी सदा मन में दया, करुणा की बयार।
और रहेगा सब प्रणियों के प्रति सदा प्रेम और प्यार।
वह देव तुल्य सद्गुरु मैंने अब पा लिया है।
तुम्हे पा कर मैंने जहान पा लिया है।
जमीन तो जमीन, आसमान पा लिया है।।

रहेगी कभी न अब वह चित्त की चंचलता।
सतायेगी कभी न मुझे इस जग की ममता।
थी जुस्तजू (तलाश) जिस की वर्षो से मुझ को।
तुम्हे पा कर मैंने जहान पा लिया है।
जमीन तो जमीन, आसमान पा लिया है।।

खोजता रहा था दर दर वृन्दावन की गलियों में जिसको।
वह कन्हैया सा काबिल गुरु मैंने अब पा लिया है।
तुम्हे पा कर मैंने जहान पा लिया है।
जमीन तो जमीन, आसमान पा लिया है।।

जो रहता है प्राणियों में विद्यमान।
जो देता है सब को बल बुद्धि और ज्ञान।
जो रखता है प्रतिपल सब जीवों का पूर्ण ध्यान।
जो निर्बलों का बल है और बेजुबानों की जबान।
उस करुणामय दीनबंधु का जानन हार अब मैंने पा लिया है।
तुम्हे पाकर मैंने जहान पा लिया है।
जमीन तो जमीन, आसमान पा लिया है।।

जो जड़ और चेतन सब जीवों में विद्यमान है।
जिसके हैं रूप अनगिनत सर्वदा एक दूसरे से भिन्न-भिन्न।
पत्ता भी नहीं हिलता जिसकी इच्छा के बिन।
उस परम सत्य का मार्ग दर्शक अब मैंने पा लिया है।
तुम्हे पाकर मैंने जहान पा लिया है।
जमीन तो जमीन, आसमान पा लिया है।।

जो है सृष्टि का कर्ता धर्ता और उसका जीवन आधार।
जिस की लीला और महिमा का नहीं कोई अंत।
जिसका न होता जन्म है और न होता कभी विनाश।
पाते हैं वे नर उसे जो करते हैं उसे पाने का सत् प्रयास।
उस परम तत्व का पारखी अब मैंने पा लिया है।
तुम्हे पाकर मैंने जहान पा लिया है।
जमीन तो जमीन, आसमान पा लिया है।।


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