Thursday, November 05, 2015

भोजन से पूर्व की प्रार्थना

भोजन से पूर्व की प्रार्थना

ब्रहमार्पणं ब्रह्म हविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम् ।
ब्रह्मौव तेन गन्तव्यं ब्रह्म कर्म समाधिना ।।

मख ब्रह्म से, ब्रह्माग्नि में, हवि ब्रह्म, अर्पण ब्रह्म है
सब कर्म जिसको ब्रह्म, करता प्राप्त वह जन ब्रह्म है


Prayer before Meals


In the practice of seeing Brahman (Absolute) everywhere as a form od sacrifice Brahman is the ladle (Big spoon), Brahman again is the oblation/offering; Brahman is the fire, Brahman itself is the sacrificer, thus Brahman itself constitutes the act of pouring the oblation into the fire. And finally Brahman is the goal to be attained by Him who is absorbed in Brahman as the act of such sacrifices.
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