Monday, November 23, 2015

मैं बलिहारी दाता

मैं बलिहारी दाता

मैं बलिहारी दाता मेरे सतगुरु आयो मेरे वेडे।
नी मैं मन विच मन्दिर बना लिया,
नी मैं गुरूजी दा आसान ला लिया,
आन विराजो दाता मेरे सतगुरु आयो मेरे वेडे।

नी मैं गुरूजी नूं कौल बिठा लिया,
नी मैं दिल वाला हाल सुणा लिया,
बड़े दयालु दाता मेरे सतगुरु आयो मेरे वेडे।

ऐं दे दर उत्ते मौज बहारा,
संगत खड़ी हे बन के कतार,
झोलियां भर दो दाता मेरे सतगुरु आयो मेरे वेडे।

नी मैं नैना विच नीर बहा लिया,
नी मैं गुरूजी दा दर्शन पा लिया,
दर्श दिखायो दाता मेरे सतगुरु आयो मेरे वेडे।

जेरे सवेरे-शाम दर उत्ते आन दे ने,
उन्हां दे बिगड़े काम बण जान दे ने,
काज सवारी दाता मेरे सतगुरु आयो मेरे वेडे।
मैं बलिहारी दाता मेरे सतगुरु आयो मेरे वेडे।।


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