Wednesday, December 09, 2015

हाथ जोड़ विनती करूं

हाथ जोड़ विनती करूं

हाथ जोड़ विनती करूं, सुण चित्त लगाए।
दास आ गयो शरण में, रखियो उनकी लाज।।
धन्य ढूंढोरो देश है, खाटू नगर सुजान।
अनुपम छवि श्रीश्याम की, दर्शन से कल्याण।।
श्याम श्याम मैं रटूं, श्याम ही जीवन प्राण।
श्याम भक्त जग में बड़े, उनको करूं प्रणाम।।
खाटू नगर के बीच में, बण्यो आप को धाम।
फागुन शुक्ल मेला भरे, जय जय बाबा श्याम।।
फागुन शुक्ल द्वादशी, उत्सव भारी होय।
बाबा के दरबार से, खाली जाय न कोय।।
उमापति, लक्ष्मीपति, सीतापति श्रीराम।
लज्जा सबकी राखियो, खाटू के श्रीश्याम।।
पान सुपारी इलाइची, इतर सुगंध भरपूर।
सब भक्तन की विनती, दर्शन देवो हज़ूर।।
मनमोहन तो प्रेम से, धरे श्याम का ध्यान।

श्याम भक्त पावे सदा, श्रीश्याम कृपा से मान।।
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