Friday, January 15, 2016

लंच



रविवार की सुबह अनन्या का बुखार उतर गया। अनन्या और अनिरुद्ध दोनों पिकनिक और फाइव स्टार लंच के लिए उत्साहित थे। सुबह उठते ही दोनों ने हल्ला मचाना शुरू कर दिया। नीना ने डांट दिया कि सुबह लंच थोड़े करना है, दोपहर में लंच होता है, तभी चलेंगे। अभी शांति से घर बैठो, लेकिन बच्चे कहां मानते है। थोड़ी देर के लिए शांत हो गए और फिर आपस में खुसर पुसर करने लगे।

माताजी सुबह से ही बादाम का हलवा बनाने में व्यस्त थी। उनको कोई दूसरा काम नहीं सूझ रहा था। बच्चे दादी को सुबह से रसोई में व्यस्त देख और हलवे की भीनी सुगंध पर बार बार पूछते कि दादी कौन सा हलवा बना रही हो, बड़ी अच्छी सुगंध है।

"बादाम का हलवा है।" दादी ने इतराते हुए कहा।
"हमें दो।" दोनों बच्चे दादी से चिपक गए।
"मुझे छोड़ो, तुम रसोई से जाओ। मुझे तंग मत करो। जब बन जाएगा तब सबको मिलेगा। अच्छा अब तुम दादा के पास जाओ। जब से उठे हैं, सुबह से अखबार पढ़ रहे है। कोई काम नहीं करते।" कह कर दादी ने बच्चो को रसोई से विदा किया। बच्चे दादा के पास चले गए। वे बैठक में बैठे अखबार पढते हुए दादी की बातें सुन रहे थे। दादी को कुछ कह नहीं सकते इसलिए चुपचाप अखबार को बंद करके बच्चों के साथ खेलने लगे।

दादी का बादाम का हलवा बन गया और बड़े बूढो के बनाये नियम के अनुसार सबसे पहले ठाकुरजी को भोग लगाया। ठाकुरजी को भोग लगाने के पश्चात बाल गोपालों को आवाज़ दी।

"अनन्या, अनुरुद्ध जल्दी आओ, बादाम का हलवा बन गया है, कौन सबसे पहले खाएगा?"

दादी की आवाज़ सुन कर दोनों बच्चे फटाफट दादी के पास गए। दादी दो छोटी कटोरियों में अनन्या और अनिरुद्ध के लिए बादाम का हलवा लाई। दोनों बच्चे हलवा चखने के बाद बोले "दादी बहुत स्वाद है। यमी, आगे से हमें बादाम का हलवा दिया करो।"

दादा ने दादी की ओर देखा "हमने कौन सा गुनाह कर दिया कि हलवा पूछा ही नहीं?" दादा के स्वर में विनती भी थी और गुस्सा भी।

"जरूर मिलेगा, पर इंद्र के साथ। नाश्ते में सब को मिलेगा। पहला हक़ इंद्र का है जिसने इतनी बड़ी कामयाबी हासिल की और उसकी फरमाइश पर ही बादाम का हलवा बना है। आज सब एक साथ नाश्ता करेंगे। बादाम का हलवा इंद्र की पसन्द से बना है तो आप की पसन्द का भी ख्याल रखा है। दाल वाली कचौड़ियां बना रही हूं।"

इतना सुनते ही दादा ने कहा कि आज तो बिन मांगे मुराद पूरी हो रही है।

दादी ने चहकते हुए जवाब दिया कि बच्चों की ख़ुशी और कामयाबी से बढ़ कर कुछ नहीं। इंद्र की सफलता पर आज दिल नाचने को हो रहा है।
बच्चों ने इतना सुनते ही दादी को पकड़ लिया और दादी को गोल-गोल घुमाने लगे "दादी चलो नाचते है।"

दादी ने दोनों बच्चों के गालों पर एक एक हल्की सी चपत लगा कर दोनों को चूमा और कहा कि सारा समय शरारत में बिता दोगे या नहाओगे भी। फटाफट नहा लो, फिर नाश्ता करते हैं। पिकनिक पर जाना है कि नहीं, फाइव स्टार में लंच करना है कि नहीं। दादी की बात सुन कर दोनों बच्चे गोली की रफ़्तार से पहली मंज़िल चढ़ गए।

दोनों बच्चे अनिरुद्ध और अनन्या बहुत उत्साहित थे। नाश्ते के बाद रुक नहीं रहे थे। बार बार इंद्रजीत से पूछते कि चाचू कब चलेंगे। इंद्रजीत बारह बजे दोनों बच्चों को लेकर इंडिया गेट के लिए निकला। इंद्रजीत बच्चों को बोटिंग करवा देगा और थोडा इंडिया गेट पर घूम के दो बजे फाइव स्टार मिलेगा। नरेंद्र, नीना और माता-पिता घर से सीधे फाइव स्टार जाएंगे।

इंडिया गेट पहुंच कर दोनों बच्चे अनन्या और अनिरुद्ध अति प्रसन्न हुए। सबसे पहले इंद्रजीत ने बोटिंग के लिए टिकट ली और पंद्रह मिनट बोटिंग का लुत्फ़ उठाया। बोट पर बच्चे बहुत खुश हुए, झुक कर पानी को हाथ लगाते और चाचू इंद्रजीत पर उछालते। बोटिंग के बाद इंद्रजीत दोनों बच्चों अनन्या और अनिरुद्ध के साथ इंडिया गेट के लॉन पर घूमते रहे और फिर दो बजे फाइव स्टार पहुंच गए। संयोग की बात रही कि दो मिनट के फासले में नरेंद्र, नीना माता-पिता के साथ फाइव स्टार पहुंच गए।

फाइव स्टार में तीन रेस्टॉरेंट थे, इसमें से एक शुद्ध शाकाहारी जो विदेशियों में भी बहुत लोकप्रिय है। रेस्टॉरेंट में भारतीयों के साथ काफी मात्रा में विदेशी भी थे। इंद्रजीत का परिवार शुद्ध शाकाहारी है, उन्होने शाकाहारी रेस्टॉरेंट चुना।

खाना खाते हुए पिता जी ने कहा "रिश्तेदारी में दो तीन शादियां फाइव स्टार में हुई तब आये थे। वैसे कभी हिम्मत नहीं हुई कि अंदर आएं। आज खुद कर लंच करने पर जो ख़ुशी हो रही है, उसको बताना शब्दों में मुमकिन नहीं है।"

"हां ये बातें बर्षों पुरानी हैं। उन की शादियों और रिश्तेदारों की याद गई।" माता जी ने कहा।

"हां, मुझे भी याद है, कॉलेज में पढ़ता था।" इंद्रजीत ने कहा तब नरेंद्र ने कहा "मैं स्कूल में पढ़ता था।"

सभी धीरे धीरे हंसने लगे।

"इंद्रजीत किस बात पर हंसा जा रहा है। कोई चुटकुला, जोक्स है तो मुझे भी सुनाओ।"

इंद्रजीत यह सुन कर चौंक गया। पीछे मुड़ कर देखा कि गुरुस्वामी खड़े थे। गुरुस्वामी को देख कर इंद्रजीत कुर्सी छोड़ कर खड़ा हो गया।

"सर, मेरी फैमिली से मिलिए। मेरे पापा, मम्मी, छोटा भाई नरेंद्र, भाभी नीना और भतीजा अनिरुद्ध, भतीजी अनन्या।"
गुरुस्वामी ने सबके साथ हाथ मिलाया और बच्चों के गाल पर हाथ लगा कर प्यार किया। "इंद्रजीत तुम्हारी फैमिली के साथ मिल कर बहुत अच्छा लगा। बर्षो से तुम हमारे साथ काम कर रहे हो, तुम्हारी पत्नी से तो पहले मिल चुके हैं, आज बाकी फैमिली से भी मुलाकात हुई।"

गुरुस्वामी ने अपनी पत्नी को आवाज़ दी और सबको अपनी पत्नी से मिलवाया।

"इंद्रजीत तुम तो घर का खाना पसन्द करते हो, आज फाइव स्टार का खाना टेस्ट कर रहे हो।" गुरुस्वामी ने एक जोरदार ठहाका लगाया।

"सर वो मेरे डायरेक्टर बनने की ख़ुशी में पार्टी है।"

इंद्रजीत की बात सुन कर गुरुस्वामी ने कहा "इंद्रजीत फिर तो मैं भी तुम्हारे साथ लंच करता हूं।" कह कर गुरुस्वामी पत्नी सहित इंद्रजीत के साथ बैठ कर लंच करने लगे।"

"इंद्रजीत यह लंच कंपनी की तरफ से, पूरा बिल कल कंपनी में डाल देना।"

इंद्रजीत के पिता ने गुरुस्वामी से पूछा कि इंद्रजीत की कोई पत्नी नहीं है, आप किस की बात कर रहे हैं।"

"घबराओ नहीं, इंद्रजीत शरीफ लड़का है, मैं इसकी तलाकशुदा पत्नी इंदु की बात कर रहा हूं।"

"आपने तो हमारे दिल की धड़कने तेज कर दी थी।" पिताजी ने हंसते हुए कहा।

हंसी के माहौल में लंच संपन्न हुआ। लंच के बाद गुरुस्वामी कुछ देर तक लॉबी में ऑफिस की बात करते रहे। बाकी परिवार होटल घूमता रहा।





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