Monday, January 25, 2016

पुराने दिन



रमन कार डीलर्स से फोन पर कारों के दाम मालूम कर रहा था। पत्नी राधिका चाय की ट्रे के साथ आई और सोफे पर रमन के साथ बैठ गई। चाय रमन के आगे रखी।
"चाय पी लो, सर्दियों में ठंडी जल्दी हो जाती है।"
फोन पर बात खत्म करके चाय का कप उठाया और पत्नी राधिका की ओर देखा।
"क्या बात है, ऐसे क्या देख रहे हो?"
"कुछ नहीं।"
"बात मत छुपाओ। जो दिल में है, जुबान पर ले आओ।"
रमन ने चाय की चुस्कियों के बीच राधिका से पूछा "कौन सी कार लें।"
"कार....?"
"हां भई कार बोला है।"
"मैंने मना किया था कि अभी कोई कार नहीं खरीदनी है, फिर कार की क्यों बात छेडी।"
"बिना कार के गुज़ारा नहीं होता। एक उधोगपति टैक्सी में सफ़र करे, शोभा नहीं देता। कार से हमारे स्टेटस का, स्तर का समाज को पता चलता है।"
"हमारे स्टेटस का सबको पता है। किसी को दिखाने से कोई अधिक या कम नहीं हो जायेगा। जो है, वही रहेगा। हमने खुद को देखना है, किसी को दिखाना नहीं है।" राधिका ने दो टूक कह दिया।
"दो कार थी, दोनों का एक्सीडेंट हो गया। अब कार को हाथ लगाने नहीं देती। एक कार बच्चों के पास, एक तुम्हारे पास। कार तो चाहिए।"
"अभी नहीं तो मतलब अभी नहीं।"
"मेरे स्टाफ के पास कारें हैं और मालिक के पास कार नहीं।"
"कार से मुझे कोई आपत्ति नहीं परन्तु कुछ समय रुक कर। दो कार आपके लिए थी, अब नहीं हैं, मुझे कार की परवाह नहीं है। आज एक है, कल दूसरी जाएगी। आपकी जान सबसे प्यारी है। आप दोनों एक्सीडेंट में बच गए। खरौंच तक नहीं आई। भगवान का शुक है। अतः कुछ दिन कार इस्तेमाल नहीं करो, वरना बच्चों की कार है, मेरी कार है, कोई मना है। बिलकुल नहीं, परन्तु कुछ दिन रुको फिर कार लेना।"

रमन कार खुद चलाता है। ड्राईवर सिर्फ राधिका और बच्चों के लिए ही रखा है। ड्राईवर के साथ मजबूरी में ही कभी कभार जाता है। एक रात पार्टी से रमन वापिस रहा था। रात के साढ़े बारह बजे थे। विपरीत दिशा से आती एक कार रोड डिवाइडर से टकरा कर उछली और रमन की कार से टकरा गई। जबरदस्त टक्कर हुई क्योंकि अचानक से विपरीत दिशा की कार जाए तो कोई भी नहीं बच सकता। एयर बैग ने रमन को बचा लिया, लेकिन कार छतिग्रस्त हो गई। पुलिस केस भी बना। दूसरी कार का मालिक हर रोज़ रमन के ऑफिस और घर के चक्कर काट रहा है कि समझौता कर लो ताकि कोर्ट के चक्कर और सजा से बचे। राधिका चाहती है कि एक शराबी को उसके किये की सजा मिलनी चाहिए। शराब पी कर कार चलाई, खुद की भी कार छतिग्रस्त हुई और रमन की भी। हालांकि भगवान का शुक है कि दोनों बच गए।

दूसरी कार को एक ट्रक कुचल गया। हुआ यूं कि खाली सड़क के किनारे कार रोक कर रमन झाड़ियों के पास पेशाब कर रहा था। पीछे से एक तेज रफ़्तार के ट्रक ने सड़क किनारे खड़ी कार को टक्कर मारी। कार के परखचे उड़ गए। ट्रक वाला भाग गया। रात का समय था। रमन ट्रक का नम्बर भी नोट नहीं कर सका।

एक महीने में दो कारों के एक्सीडेंट होने पर राधिका ने रमन को कार चलाने से रोक लिया। रमन भी कुछ डर गया। उसने देर रात की ड्राइविंग भी बंद कर दी। खुद भी कार नहीं चलाई। दो बीएमडब्लू कारों का सत्यानाश हो गया। कारें तो घर में और खड़ी है परन्तु राधिका ने कुछ समय रुकने के लिए कहा कि कभी-कभी बुरा समय होता है। कष्ट आया कार ने सहा, जान बच गई। इसमें ज़रूर ईश्वर की कोई मर्ज़ी छुपी हुई है। इसलिए एक पूजा ज़रूरी है।
"ठीक है राधिका माता की चौकी रखते है, फिर कार ले लेंगे।" रमन ने राधिका को सुझाव दिया।
"रमन किसी शुभ मुहूर्त में ही माता की चौकी रखेंगे। मैं पंडित जी से शुभ मुहूर्त निकालने के लिए कहती हूं।"
"ठीक है तब तक इंतज़ार करते हैं। थोड़े दिन और टैक्सी में सफ़र करते हैं।" रमन ने राधिका को देखा जो मंद मंद मुस्कुरा रही थी।
"ज़ालिम निग़ाहें, कातिलाना चेहरा।" कहते हुए रमन कमरे से बाहर चला गया।

टैक्सी में सफ़र करते हुए रमन को अच्छा लगता। बीच में टैक्सी छोड़ कर मेट्रो में भी सफ़र करने लगा। मेट्रो की भीड़ रमन को अच्छी लगने लगी। लोग क्या सोचते हैं? क्या बातें करते हैं? उनकी बातों को सुन कर लोगों को समझने की पहचान और अधिक हो गई। कॉलेज के युवाओं की हरकते देख उसे अपने कॉलेज के दिन याद गए। क्या उसके अपने बच्चे भी ऐसा करते होंगे? ऑफिस में काम करने वाले युवाओं की ज़िन्दगी को जाना। उनकी ज़िन्दगी और संघर्ष को समझा। संघर्ष तो उसने भी किया था कॉलेज की पढ़ाई के बाद व्यापार ज़माने में, परन्तु आज एक सफल उद्योगपति बनने के बाद रमन वो संघर्ष के दिन भूल चुका था। पुरानी दिनों और बातों को याद करके रमन का स्वभाव भी बदल गया। ऑफिस में जहां कोई स्टाफ ज़रा देर से आता तो छुट्टी काट ली जाती। अब रमन ने ऑफिस के कड़े सख्त नियमों में ढील दे दी और लचीली समय सारिणी को अपना लिया। सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक जब आओ, आठ घंटे की ड्यूटी दे कर घर जाओ। स्टाफ इस अभूतपूर्व परिवर्तन से खुश भी था और आश्चर्यचकित भी कि यह चमत्कार कैसे हुआ। खैर सभी खुश और प्रसन्न थे। अब रमन अपने बच्चों को भी कॉलेज मेट्रो से जाने की सलाह देता। राधिका के साथ भी मेट्रो का सफ़र करता।

रविवार को रमन ने राधिका को मेट्रो के सफ़र करने को कहा।
"आज कोई खास बात है जो मेट्रो की भीड़ में धक्के खिलवाने की ख्वाहिश है।"
"पुराने दिन याद करो जब मैं नौकरी करता था और शादी हुई थी। बस में सफ़र करते थे। इंडिया गेट, पुराना किला घूमने जाते थे। कभी बस में तो कभी ऑटो में। फिर नौकरी छोड़ व्यापार किया तब पहला स्कूटर लिया था। स्कूटर में बैठ कर घूमते थे।"
"याद है वो सब दिन तभी अपने हाथों से रसोई बनाती थी और टिफिन पैक करके देती थी।"
"हां, घर में अब कितने नौकर हैं, परन्तु टिफिन आज भी तुम ही अपने हाथों से बनाये खाना का पैक करती हो।" भावुक ही कर रमन ने राधिका को अपने समीप खींचा और राधिका रमन से सट कर गले मिली। रमन ने राधिका के गाल पर एक चुम्बन किया।
"मैं कुछ नहीं भूली हूं, आप भूल गए थे।"
"हां यह सच है कि पुराना संघर्ष का समय भूल गया था, शायद उसे याद करवाने के लिए भगवान ने दोनों कारों का एक्सीडेंट करवा दिया कि अतीत मत भूलो। आज टैक्सी और मेट्रो में घूम कर पुराना समय याद करता हूं और मुझे धरातल में एक बार पटकने के लिए भगवान् से नाराज़ नहीं बल्कि शुक्रिया अदा करता हूं।"
"यही फर्क है इंसान और भगवान में। जब हम उससे दूर जाते हैं वो किसी बहाने अपने नज़दीक बुलाने का कोई बहाना बना लेता है।"
"तो फिर चले, एक आम आदमी बन कर। उद्योगपति का चोला उतार कर।"

रमन और राधिका चल पड़े अपने पुराने अड्डे पर, जहां प्रेम से हाथ में हाथ डाले रोमांटिक पल व्यतीत करते थे। एक मुद्दत हो गई फिर से उन पलों को जिए हुए। व्यापार के चक्कर में प्यार को खो दिया। मेट्रो में खड़े हुए सफ़र किया और केंद्रीय सचिवालय उतर कर पहले बोटिंग की। राधिका ने शरारत से पानी को रमन के ऊपर उछाला। रमन ने भी राधिका के मुंह पर पानी के छींटे डाले। बोटिंग के समय दोनों की शरारत चलती रही। हंसते हुए मज़ाक करते हुए कुछ बीते दिनों को याद करते रहे।

बोटिंग के पश्चात रमन और राधिका इंडिया गेट के लॉन पर हाथ में हाथ डाले चलते रहे। पुराने दिन याद करते रहे। अपने इन पलों को कैमरे में कैद करते रहे। पैदल चलते अमर जवान ज्योति तक पहुंच गए।

चिल्ड्रन पार्क की और देख कर वो दिन याद आए जब बच्चों को बचपन में लाया करते थे।

"पुराना किला चले?" रमन ने राधिका से पूछा।
"फिर कभी, सब कुछ आज नहीं, कल की बातें थोडा-थोडा करके याद करेंगे, अभी घर वापस चलते हैं। एक लंबी सैर अमर जवान ज्योति से केंद्रीय सचिवालय तक फिर हो जाए।"

राधिका रमन का साथ चाहती थी जो उसके व्यापार की व्यस्तता के कारण नहीं मिल पाता था। अपनी ही धुन में चलते रहे।

"राधिका आज भी इंडिया गेट प्रेमी जोड़ों की पसंद है। हमारे समय भी था और आज भी।"
"हां, देख कर तो ऐसा लगता है कि आने वाले दिनों में भी रहेगा।" राधिका ने आस पास देखते हुए कहा।
'फैमिली पिकनिक स्पॉट भी वैसे ही है।" रमन ने चादरों पर बैठे पिकनिक मनाते लोगों को देख कर कहा।
"हम बनावटी जिंदगी जी रहे है। प्रकृति से दूर हो गया था। अब तुमने वापस मुझे राह दिखाई है।"

केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन से घर वापिस की मेट्रो पकड़ी। मेट्रो में घुसते ही सामने रमन के ऑफिस की स्टाफ रवीना एक युवक के साथ हंसती हुई चिपक कर बातें कर रही थी। रमन ने तो उसको नहीं देखा, वह राधिका के साथ बातें कर रहा था। रवीना अपने बॉस रमन को देख झेंप गई। उसने उठ कर सीट रमन को बैठने को दी। रमन ने उसे वापस सीट पर बिठा दिया।

"बैठो रवीना, आंटी से मिलो।" रमन ने राधिका को रवीना से मिलवाया।
"सर, आप मेट्रो में?"
"फिर कभी फुरसत में बताऊंगा, लंबी कहानी है। पहले इनसे मिलवाओ?"
"सर ये रितेश है।"
"रितेश कहां काम करते हो?"
"सर मैं एडवरटाइजिंग एजेंसी में काम कर रहा हूं।"
"गुड, वैरी गुड।"

अगले दिन ऑफिस में रमन ने रवीना को अपने केबिन में बुला कर रितेश और उसके सम्बन्ध के बारे में बात की। रवीना घबरा गई। रमन ने उसे प्यार से समझाया।

"रवीना तुम्हारी उम्र मेरे बच्चों जैसी है। अगर प्यार करती हो तो उसे आगे बढ़ाओ। विवाह की सोचो। परिवार में बात करनी हो, मुझे बताओ, मैं जो यथासंभव सहायता होगी करूंगा। अपने अनुभव से बात कर रहा हूं। तुम्हारी उम्र विवाह योग्य है। यदि विवाह नहीं करना चाहती तो छोड़ दो, ऐसे समय मत व्यतीत करो। संबंधो को मजबूत करो।"

रवीना ने बताया कि वे विवाह की और सोच रहे हैं पर उसकी तनख्वाह कम है। रमन ने कहा कि विवाह में पैसा नहीं देखना चाहिए। अगर मन मिल जाए तब देर नहीं करनी चाहिए। मुझे देखो जब मेरी शादी हुई थी तब मैं भी छोटी सी नौकरी करता था, बस में सफ़र करता था। आज उद्योगपति हूं पर कल आम आदमी था। लक्ष्मी तो चंचल है। आज इधर तो कल उधर।

रमन ने उसे और रितेश को एक साथ अपने घर आने को कहा। रविवार दोनों रमन के घर आए। रमन और राधिका ने उनका मन टटोला। उनके प्रेम को जान कर दोनों ने उनको विवाह की सलाह दी।

"यदि तुम्हारे परिवारों को कोई आपत्ति हो तो हम सहायता के लिए तैयार है।"

रमन के स्वभाव में अभूतपूर्व परिवर्तन देख कर राधिका को प्रसन्ता हुई। उसे शादी के समय वाला रमन वापिस मिल गया।

"रमन कार कब ले रहे हो?" राधिका ने रमन को चाय का कप पकड़ाते पूछा।
चाय की चुस्कियां लेते हुए रमन ने जवाब दिया "ले लेंगे, जब आप की इजाजत होगी।"
"अब तो पूरी मंजूरी है, ले लो।"
"तुम तो कह रही थी कि पंडित जी से शुभ मुहूर्त निकलवाना है।"
"वो तो मैं तुम्हे थोड़े दिन रोकने के लिए कह दिया था। सारे दिन भगवान के हैं, जब ले लो। हर पल शुभ है। अपने विचार और कर्म अच्छे होने चाहिए, प्रभु तो हमारे साथ सदा रहते है।"

रमन राधिका को देखता रहा।
"ऐसे क्यों देख रहे हो?"
"मुझे चूना लगा दिया। भगवान के नाम पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट के धक्के दिलवा दिए।"
"तुम इस बहाने पुराने रमन तो बन गए, जो मेरी इच्छा थी।"
"अब इच्छा का पालन तो करना होगा।"
"क्या मतलब?"
"मतलब यह कि कार तो लेनी है। बीएमडब्लू कारों का तो कचूमर निकल गया। अब छोटी कार लूंगा। मारुती की दो कार लूंगा। दिखावा तो सिर्फ अपने मन की संतुष्टि है। लोगों का काम तो कहना है। कुछ भी कर लो, कुछ कुछ मीन मेख निकालते रहेंगे।"
"मुझे तो ऑडी कार दे रखी है। अपने लिए मारुती स्विफ्ट। ऐसा क्यों?'
"बस सदा जीवन उच्च विचार। इसी को अपना लिया है।"
"दो कारें अलग ब्रांड की लो। एक जैसी दो कारें?"
"एक ऑड नम्बर की और एक इवन नम्बर की। अभी सरकार ने ऑड इवन स्कीम चलाई। फिर दुबारा लागू कर दे, उससे निबटने के लिए दो कारें।"
"ठीक है तो अभी करो कार डीलर को फ़ोन। देर क्यों?"
रमन ने कार डीलर की फोन किया और दो कारें, एक सफ़ेद रंग की और दूसरी सिल्वर रंग की अगले दिन रमन के घर खड़ी थी।

कार खरीदने के बाद रमन ने शनिवार रात को माता की चौकी रखी। चौकी के बाद ग्रैंड डिनर, जिसके लिए उसने अपने सभी मित्रों, रिश्तेदारों और व्यापारियों और स्टाफ को आमंत्रित किया। डिनर के प्रबंध की जिम्मेवारी पत्नी राधिका और स्टाफ रवीना को दी।

माता की चौकी पर रमन और राधिका झूम कर नाचे। सब का स्वागत दिल खोल कर किया। सभी से मुंह पर एक सवाल था कि किस ख़ुशी में माता की चौकी रखी। दो घंटे की चौकी समाप्त होने पर रमन ने सब को संबोधित किया।

आप सब ने मेरे साथ माता की चौकी में माता रानी की आराधना की और माता रानी का आशीर्वाद लिया। आप ने एक प्रश्न पूछा कि किस अवसर पर मैंने माता रानी की आराधना की। इसके दो कारण हैं। पहला मेरी दो बीएमडब्लू कारों का स्वाह होना। मेरी दो कारें एक्सीडेंट में खत्म हुई। मुझे खरोंच तक नहीं आई। इसका शुक्रिया करने के लिए मैंने माता रानी की आराधना की। आप मुझे भला चंगा देख रहे हैं और अब मैं आपकी अपनी कारों की तस्वीरें दिखता हूं। छतिग्रस्त कारों की हालात देख कर सभी ने दांतों तले उंगली दबा ली, क्योंकि अधिकांश को इन एक्सीडेंट के बारे में नहीं मालूम था।

सभी खुसर पुसर करने लगे। तभी रमन ने घोषणा की कि दूसरा कारण है हमारी होनहार स्टाफ रवीना का रोका। रवीना की शादी उसके बहुत समय से रहे मित्र रितेश के साथ। माता रानी के आशीर्वाद से दोनों परिवारों को मैं आमंत्रित करता हूं कि वे रोका की रस्में पूरी करें। रवीना और रितेश की मंगनी हुई और सभी ने डिनर के लिए प्रस्थान किया।

रमन और राधिका अति प्रसन्न थे कि वे उन पुराने दिनों में लौट आए हैं जब वे सब की मदद को तत्पर रहते थे। अब जब साधन हैं तो उनको साकार किया। दो युवा दिलों को एक किया।


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