Thursday, January 28, 2016

भूरी बिल्ली



डेविड पेशे से वकील है। वकालत कम और प्रॉपर्टी के धंधे में अधिक मन लगता है। जो भी थोड़ी बहुत वकालत करता है वह जमीन, जायदाद, प्रॉपर्टी के साथ जुड़े होते हैं। प्रॉपर्टी विशेषक या प्रॉपर्टी एक्सपर्ट के नाम से भी विख्यात है।

विनोद एक सफल व्यापारी है और डेविड की भांति उसका रुझान जमीन, जायदाद और प्रॉपर्टी में है। दोनों के एक रुझान ने एक दूसरे को काफी नजदीक कर दिया।

शुकवार दोपहर को डेविड ने विनोद को न्यू समर हिल चलने को कहा।
"हिल स्टेशन तो बीवी, बच्चों के साथ जाने में मज़ा आता है। बच्चे नानी के घर गए है, वापिस जाएं, अगले हफ्ते चलते हैं।" विनोद ने डेविड को अगले सप्ताह चलने की सलाह दी।
"विनोद भाई, एक जबरदस्त प्रॉपर्टी है, उसको देख लो। बीवी, बच्चों के साथ फिर अगले हफ्ते भी चल देंगे। यह तो अच्छा मौका है, आज रात चलते है, सुबह पहुंच कर कल दोपहर वापिस चलेंगे। रात तक वापिस जाएंगे। एक बार दिमाग में प्रॉपर्टी सेट हो जाए। चलते हैं सिर्फ मैं और तू।" डेविड ने विनोद को चलने को कहा।

विनोद के बीवी बच्चे नानी घर गए थे और प्रॉपर्टी के नाम पर वह राजी हो गया।
"डेविड मेरा ड्राईवर छुट्टी पर है, अपना ले लियो।"
"खुद ड्राइव कर लेंगे। चिंता कर।"
"डेविड रात को में ड्राइव नहीं करता, तुझे मालूम ही है।"
"ठीक है, ऐसा करते है, सुबह पांच बजे चलते हैं। छः घंटे का सफ़र है। ग्यारह बजे तक पहुंच जाएंगे। रात वहीँ रुक कर रविवार सुबह पांच बजे वापिसी करेंगे। ग्यारह बजे तक दिल्ली।"
"डेविड यह आईडिया बढ़िया है। सुबह-सुबह ट्रैफिक नहीं होता। ड्राइविंग का मज़ा आएगा और जल्दी भी पहुंच जाएंगे" विनोद डेविड की बात मान गया।

अगले दिन सुबह के ठीक पांच बजे डेविड अपनी कार लेकर विनोद के घर आया। विनोद तैयार था। दोनों न्यू समर हिल के लिए रवाना हो गए। हिमालय की तलहटी पर बसा एक छोटा सा हिल स्टेशन जहां पूरे वर्ष मौसम खुश नुमा रहता है। तो अधिक ठण्ड पड़ती है और अधिक गर्मी। इस कारण पूरे साल सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहता है। अधिक ऊंचाई पर नहीं है। चारों और से छोटी-छोटी पहाड़ियों से घिरा न्यू समर हिल में अक्सर बादल आंख मिचोली करते रहते हैं। बीच-बीच में धूप जाती है, फिर बादल और शाम के समय धुंध। इस अनुपम छटा के दर्शन के लिए सैलानियो की भीड़ उमड़ी रहती है। होटल और रिसॉर्ट्स खूब चलते हैं।

ठीक ग्यारह बजे डेविड और विनोद न्यू समर हिल पहुंच गए।
"कहां चल रहे हैं, डेविड?" विनोद ने पूछा।
"विनोद, मॉल रोड से हट कर जो सड़क है, वहां एक पुरानी कोठी है। उसको दिखाने लाया हूं।" कह कर डेविड ने कार एक छोटी संकरी सड़क पर मोड़ ली, जहां कोठियां बनी हुई थी। शहर के रईस लोगों की कोठियां सुन्दर-सुंदर बनी हुई थी। केअर टेकर ही कोठियों की देख-भाल करते हैं। मालिक तो कभी-कभी रहने आते हैं। एक कोठी के बाहर गेस्ट हाउस का बोर्ड लगा हुआ था।
"विनोद इस कोठी में गेस्ट हाउस अभी शुरू हुआ है। ऊपर की मंज़िल मालिक ने अपने लिए रखी हुई है और नीचे के कमरे और लॉन सैलानियों के लिए। यह कोठी सैलानियों में बहुत लोकप्रिय है। यहां रह कर घर का अहसास होता है। होटल और घर का जो फर्क है, उसके लिए सैलानी ऐसी जगह को पसंद करते हैं।" कहते-कहते डेविड ने कार सड़क के अंत में रोकी। कार से उतर कर डेविड ने विनोद को कहा। "विनोद, इस कोठी को देखो। इस सड़क की यह अंतिम कोठी है। सड़क इस कोठी के गेट पर समाप्त हो जाती है। सबसे बड़ी कोठी है। बाकी कोठियां एक-एक एकड़ की हैं। यह कोठी ढाई एकड़ की है। कोठी के पीछे छोटी सी पखडंडी है जो नीचे तालाब को जाती है। एक अनोखा और नशीला वातावरण यहां का है।

विनोद ने गेट से उस कोठी का निरीक्षण किया। गेट पर धूल मिटटी और लंबी बेल की झड़ियां उगी हुई थी। अंदर लॉन की दशा भी ख़राब थी।
"डेविड लगता है, इस का कोई वली-वारिस नहीं है। वर्षो से उजाड़ पड़ी है।"
"ठीक कह रहे हो, वर्षो से कोई नहीं रहता है। कोई देख-भाल भी नहीं है, लेकिन इसका वारिस है।"
"कौन है इस उजड़ी कोठी का मालिक।"
"बन्दा तुम्हारे सामने है विनोद।"
"डेविड तुम्हारी कोठी है, तुम इसके मालिक हो?" विनोद आश्चर्चकित हो गया।
"इसमें हैरान होने की कोई बात नहीं। मैं ही इस कोठी का मालिक हूं।" डेविड ने छाती फुलाते हुए कहा।
"कभी जिक्र नहीं किया डेविड तुमने?" विनोद ने अपनीं नाराजगी जताई।
"तुरुप का पत्ता सही समय पर ही खोला जाता है। धीरे-धीरे सब बता दूंगा। चलो अंदर चलते हैं।" कह कर डेविड ने दरवाज़ा खोला। दरवाज़े को खोल कर जैसे ही डेविड ने कोठी में कदम रखा कि अचानक से ऊपर पेड़ पर बैठी एक बिल्ली ने छलांग लगाई और डेविड के कंधो पर कूदी। हतप्रभ डेविड औंधे मुंह जमीन पर गिरा। डेविड को गिरता देख विनोद घबरा गया। विनोद ने डेविड को सहारा देकर उठाया।
"क्या हुआ डेविड?"
"एक पत्थर जैसा कंधे पर पड़ा।"
"बिल्ली थी।" विनोद ने कहा और देखने लगा। बिल्ली गेट के पास बैठी थी। वह एक मोटी भूरे रंग की बिल्ली थी। बिल्ली उन दोनों को घूर कर देख रही थी। विनोद ने देखा उस बिल्ली की हरे रंग की आंख की पुतली थी और बड़ी बड़ी आंखों से टकटकी लगा कर लगातार देख रही थी। भूरी बिल्ली और हरी आंखें बड़ी डरावनी लग रही थी।
"डेविड यह बिल्ली तो खतरनाक लग रही है।"
"विनोद तुम एक बिल्ली से डर गए।"
'यार जिस तरह तुम्हारे कंधे पर कूदी और तुम औंधे मुंह गिरे, मुझे अजीब सा लग रहा है। आदमी कोई रहता नहीं कोठी में, बिल्ली रह रही है और वो भी डरावनी।"
"विनोद तुम डरपोक बहुत है। अरे भाई खाली मकान में बिल्ली, कुत्ते आशियाना बना लेते हैं।"

डेविड और विनोद लॉन पार करके कोठी की ओर बढ़ते हैं। दबे क़दमों से बिल्ली भी उनके पीछे चल रही है। डेविड ने कोट की जेब से चाबियों का गुच्छा निकाला। इससे पहले डेविड किसी चाबी से दरवाज़ा खोलता, विनोद का ज़रा सा हाथ लगा और चरमरा कर दरवाज़ा खुल जाता है। कमरे के अंदर एक बड़ी खिड़की से धूप रही है। कमरे को देख कर लग रहा था कि काफी समय से यहां कोई नहीं रह रहा। धूल मिटटी की परते जमी हुई थी।

"बहुत बड़ा कमरा है। ड्राइंग रूम लग रहा है।" विनोद ने कहा।
"ठीक पहचाना, ड्राइंग रूम है।" कह कर डेविड विनोद को नीचे के कमरे दिखाने के बाद ऊपर की मंज़िल में ले जाता है। ऊपर बेड रूम थे। एक कमरे का दरवाज़ा खोल कर अंदर गए तो दरवाज़ा अपने आप बंद हो गया। मुड़ कर विनोद ने देखा तो हैरान हो गया।
"डेविड कमरे का दरवाज़ा अपने आप बंद हो गया, कमाल है।"
"विनोद तुम्हारे हाथ से बंद हो गया होगा।"
"नहीं डेविड मैंने हाथ नहीं लगाया।" अभी विनोद ने सर्फ इतना ही कहा था कि उसकी चीख निकल गई। उसके पैरों के पास वही भूरी बिल्ली घूर कर देख रही थी।
"डेविड बिल्ली।" कह कर दरवाज़े को खोलने के लिए मुड़ा। दरवाज़े पर कोई डोर हैंडल नहीं था ही कोई चिटकनी।
"डेविड दरवाज़ा खोलो। डोर हैंडल कहां गया। विनोद के माथे पर पसीना गया। डेविड ने देखा और उसे भी ताज्जुब हुआ, फिर बिल्ली पर नज़र पड़ी। कमरे की खिड़की से धूप रही थी, उसे कोई बल्ब या ट्यूब लाइट नज़र नहीं आई। बहुत अधिक रौशनी नहीं थी। आधे उजाले और आधे अंधेरे में बिल्ली की आंखें चमक रही थी। एक डरावना माहौल हो चुका था। विनोद पूरी तरफ से घबराया हुआ था। डेविड भी हैरान हो गया कि कमरे का दरवाज़ा कैसे खुलेगा। बिल्ली ने डरावनी आवाज़ में म्याऊं कहा। म्याऊं की आवाज़ से डेविड भी घबरा गया। बिल्ली की और देखा जो अब खिड़की की ओर कूद गई। यह क्या बिल्ली कहां गई। खिड़की खुली हुई थी, शायद खिड़की से कूद गई हो, डेविड यही सोच रहा था। विनोद बुरी तरह से डरा हुआ था। वह दरवाज़े की ओर भागा। दरवाज़ा खोलने की कोशिश असफल रही। वह वहीँ गिर पड़ा। डेविड की नज़र विनोद पर पड़ी और खिड़की बंद होने की आवाज़ आई। कोई हवा नहीं चल रही, खिड़की कैसे खुली और कैसे बंद हुई। यह क्या खिड़की के पास एक औरत खड़ी है।

"यह कैसे हो सकता है? यह औरत कौन है? यहां कैसे आई? जब वे कमरे में आए थे तब कमरे में कोई नहीं था।" डेविड बुदबुदाता हुआ आगे बड़ा और खिड़की के पास आया। उस औरत को देख कर उसकी चीख निकल गई। उस औरत ने भूरे रंग की शाल पहन रखी थी। उसकी आंखें हरी थी।
"मिसेज खन्ना? डेविड बस इतना कह सका कि वह औरत भूरी बिल्ली बन गई और कूदी और पंजों को डेविड की आंखों में मारा। डेविड ने पीछे हटने की कोशिश कि परंतु असफल रहा। भूरी बिल्ली ने उसकी आंखे नौंच ली और दूर हट कर डेविड के ऊपर छलांग लगाई। डेविड खिड़की से नीचे गिर गया।

तीन दिन बाद विनोद को होश आया। हॉस्पिटल की दीवारों में कैसे पहुंच गया, वह तो डेविड के साथ कोठी देखने गया था। डेविड कहां है? अनेकों प्रश्न उसके दिमाग में घूमे। उसने हॉस्पिटल में पूछा।
"एक वृद्ध महिला उसे हॉस्पिटल छोड़ गई थी।" डॉक्टर ने बताया।
"कौन थी? क्या मैं उससे मिल सकता हूं?"
डॉक्टर ने बताया कि वह उसे हॉस्पिटल में एडमिट करवा के चली गई। फिर देखा नहीं।

विनोद की पत्नी और बच्चे नानी घर थे, इसलिए उनको विनोद के इस हादसे के बारे में कुछ नहीं पता था। विनोद ने उन्हें फ़ोन नहीं किया। हॉस्पिटल से वह उस कोठी पर गया। डरते हुए गेट को देखा। उसकी हिम्मत अंदर जाने को नहीं हुई। कोठी वीरान थी, वैसी हालात में। हिम्मत कर के पड़ोस की कोठी के केअर टेकर से मिला और कोठी की जानकारी हासिल करनी चाही। केअर टेकर को कोठी की अधिक जानकारी नहीं थी, तभी कोठी का मालिक गए। विनोद ने उस दिन की घटना बताई और कोठी की जानकारी चाही।
"विनोद उस कोठी में लगभग दो साल हो गए, कोई नहीं रहता। यह कोठी दिल्ली के एक बड़े व्यापारी मिस्टर खन्ना की है। तीन चार साल पहले उनकी मृत्यु हो गई। बच्चे विदेश में रहते हैं। कभी कभी मिसेज खन्ना आती थी पर दो साल से देखा नहीं।" मालिक ने उसे बताया।

"एक डरावनी भूरी बिल्ली देखी थी, जो डेविड को घूर रही थी।"

"बिल्ली का तो नहीं पता, लेकिन मिसेज खन्ना गोरी चिट्टी थी और अक्सर भूरे रंग की शाल पहना करती थी और उनकी आंखें भी हरी थी।" कोठी के मालिक ने बताया।

भूरी बिल्ली की बात सुन केअर टेकर जो पहाड़ का रहने वाला था और विनोद की बातें सुन रहा था, उसने विनोद को कहा। "साब जी जिन की किसी मौत कुदगती नही होती है, बिल्ली बन कर अपने मकान में अक्सर आते रहते हैं।"
विनोद ने पुलिस में रिपोर्ट लिखवाई क्योंकि डेविड का कुछ पता था डेविड की कार का। पुलिस ने पूरी कोठी की तलाशी ली। कोठी के पीछे डेविड की लाश पड़ी थी। उसका मुंह नुचा हुआ था। आंखें बाहर निकली हुई थी। बड़ी बेरहमी से चेहरा और आंखें को नोचा हुआ था। कार पास के खड्ड में गिरी मिली।

"साब जी, यह जरूर मिसेज खन्ना ही बिल्ली थी, जिन्होंने अपने कातिल से बदला लिया। बहुत खतरनाक बदला होता है साब जी।"

केअर टेकर का कहा विनोद के कानों में गूंज रहा था।


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