Tuesday, March 01, 2016

दो बेडरूम



रविवार की सुबह रीना और राकेश बालकनी में बैठे चाय की चुस्कियां ले रहे थे। सुहाना मौसम, मार्च महीने की हलकी गुलाबी ठंडक का अहसास हो रहा था। पतली शाल ओढ़ी हुई थी दोनों ने।

अखबार वाले ने सटीक निशाना लगा के अखबार बालकनी में डाले। राकेश ने अखबार उठाये। रबड़बैंड खोल कर अखबार अलग किये और चाय के प्याले एक तरफ करके अखबार रखे।

"एक दम सटीक निशाना लगाते है ये अखबारवाले, मजाल है कि इधर का उधर हो जाए। पक्के निशाने बाज होते है।" राकेश ने अंग्रेजी का अखबार पढ़ने के लिए खोला।

"हमारी सरकार इन पर ध्यान नहीं देती। थोड़ी ट्रेनिंग इनको दे तो ओलम्पिक में मैडल पक्के ला सकते हैं।" कह कर रीना ने हिंदी का अखबार पढ़ने के लिए उठाया।

"एक कप चाय और हो जाए।"
"केतली में अभी गर्म चाय है। अभी चाय का कप बनाती हूं। बिस्कुट लोगे।"
"हां एक बिस्कुट हो जाए।'

रीना ने एक कप चाय राकेश के लिए और एक कप अपने लिए बनाया और जार में से बिस्कुट निकाले। चाय की चुस्कियों के साथ दोनों अखबार भी पढ़ रहे थे।

"राकेश इस आर्टिकल को पढ़ो, एक कपल दो बेडरूम।"
"बताओ क्या लिखा है?"
"तुम पढ़ो फिर बात करते हैं।"
राकेश ने आर्टिकल पढ़ा "रीना अगर यही करना है तो शादी क्यों की?"
"बिलकुल ठीक राकेश, जब पति पत्नी ने एक बेडरूम में नही सोना तब शादी का क्या औचित्य है। बूढे हो जाएं फिर भी एक बेडरूम में सोते है, यहां तो नव विवाहित जोड़े अगल-अलग कमरों में सो रहे हैं। सारा दिन तो ऑफिस में बीतता है और रात भी अलग तब शादी क्यों की?"
"मुझे लगता है यह एक बीमारी है। जो युवा दंपति ऐसा करते हैं अवश्य मानसिक रोगी हैं।"
"राकेश अजीबो अजीब तर्क लिखे हैं इस आर्टिकल में कि रात को ऑफिस का काम करना है, ईमेल भेजनी हैं। रीडिंग करनी है, अगले दिन मीटिंग के लिए कागज, डॉक्यूमेंट तैयार करने हैं, इसलिए अलग कमरों में सोते हैं। सारा दिन ऑफिस में, सुबह साढ़े सात आठ बजे घर से निकलते हैं ऑफिस जाने के लिए, रात को नौ, दस बजे घर आते हैं और आते ही अपने अलग-अलग कमरों में घुस जाते हैं कि काम करना है। दो पल घर में एक साथ नही रह सकते, अजीब बात है राकेश।"
"रीना तुम एक दम शत प्रतिशत ठीक कह रही हो कि यदि घर में भी साथ नही रहना तब शादी क्यों की।"
"जितना अधिक इंसान पढ़ लिख जाता है उतना सनकी हो जाता है। काम तो पूरी ज़िन्दगी करना है परंतु विवाह के बाद पति पत्नी की कुछ जरूरतें होती है उनको नज़र अंदाज किया तो रिश्तों में दरार आती है।"
"रीना आज हर युवती नौकरी करती है। सारा दिन ऑफिस में बीतता है। दूर-दूर ऑफिस होते हैं, आने जाने में समय लगता है, फिर कभी ऑफिस में भी देर तक काम करना पढता है। घर आकर दो प्यार के मीठे बोल पति पत्नी आपस में बोलते हैं तो सारी थकान मिट जाती है। एक नई स्फूर्ति का संचार होता है। इन छोटी-छोटी बातों से जीवन में मधुरता आती है और पति पत्नी का रिश्ता अधिक गाड़ा होता है।"
"राकेश जो तर्क आर्टीकल में लिखे है बहुत ही बेहूदा और बेकार के हैं। एक लड़की कहती है कि मुझे रात को पढ़ने की आदत है, पति साथ बेड पर हो तो पढ़ा नहीं जाता। मैडम जी को समझना चाहिए कि शादी से पहले और बाद के जीवन में रात-दिन का अंतर होता है। लड़के और लड़की दोनों की ज़िन्दगी का नया अध्याय आरम्भ होता है। पुरानी आदतों को छोड़ कर नयी आदतों को विकसित करना होता है। उसके बाद बच्चे, उनका लालन-पालन में समय बीतता है।"
"रीना ये जो तर्क दिए हैं वो उनके हैं जो लाखों रुपये महीने के कमाते हैं, उनका मकसद छोटी उम्र में चोटी पर पहुंचना होता है। पहले धीरे-धीरे उन्नति होती थी, पचास की उम्र के बाद जनरल मैनेजर बनते थे, आज छोटी उम्र में ही तीस की उम्र में शीर्ष पद मिलते है। अधिक और अधिक की लालसा में रात दिन एक करते है। ऐसे व्यक्ति ही ऐसा जीवन चुनते है जहां सिर्फ जीवन का केंद्र सिर्फ वे खुद होते हैं। मशीनी जिंदगी जीते है, उनको किसी की भावना, इमोशन की परवाह नही होती। वे खुद चौबीस घंटे काम में डूबे रहते है और अपने अधीन काम करने वालों से भी वही उम्मीद रखते है। इसी कारण उनके अधीन काम करने वाले शीघ्र नौकरी छोड़ देते हैं। रीना मैंने पिछली नौकरी भी इसीलिए छोड़ी थी। सारा दिन काम करने के बाद जब घर जाने का समय होता तब पांच दस मिनट पहले कहते कि यह काम आज अभी करना है। घर जाने से पहले और वो काम तीन चार दिन का होता था, समझते कि चुटकी बजाते काम हो जाएगा। जब मैंने एक दिन कह दिया कि कम से कम तीन दिन लगेंगे तब सबके सामने मुझे निकम्मा और कामचोर कहा। मुझे बहुत बुरा लगा, उस दिन तो कुछ नहीं कहा, लेकिन जब तीन दिन बाद रिव्यु मीटिंग में मुझे सबके सामने बुरा कहा। मैंने उसी समय निर्णय कर लिया था की वह नौकरी छोड़ दूंगा। मैंने दूसरी नौकरी ढूंढनी शुरू की। भगवान का शुक्र था कि मुझे एक महीने बाद नौकरी मिल गई थी। मैंने कम सैलरी में दूसरी नौकरी स्वीकार कर ली।"

"राकेश तुम आज बता रहे हो, पहले क्यों नही बताया?"
"तनाव तो आते जाते रहते हैं, तुम भी तनाव में जाती।"
"मुझे याद रहा है कि तुम थोड़े गुमसुम रहते थे। फिर नौकरी बदलने के बाद सामान्य हो गए, लेकिन इतनी बड़ी बात शेयर नही की।"
"एक दो बार सोचा कि बात करूं। जब बात करने की सोचता तब तुम्हारा हंसता चेहरा देख अपना तनाव भूल जाता था। यही जीवन है कि साथी का मुस्कुराता, हंसता चेहरा देख जीवन के दुःख भी सुख लगते है। तुम्हे चहकता देख मैं अपना तनाव भूल जाता था और प्रेणना मिलती कि इस मुश्किल घडी में पत्नी का साथ है तो मुश्किल की घडी भी टल जाएगी। बस यही सोच तुम्हे नहीं बताया।"
"हां राकेश यह तो बिल्कुल ठीक है कि कभी मैं उदास होती हूं जब शाम को तुम्हे मुस्कुराता देखती हूं तो मेरी भी थकान खत्म हो जाती है। तनाव भूल जाती हूं।"
"लेकिन ये जो दो बेडरूम वाले प्राणी हैं सिर्फ अपने अंदर सीमित होते हैं। ये सामान्य नहीं होते हैं। मेरी नज़र में वे असामान्य है और मानसिक रोगी हैं जिन्हें खुद से ज्यादा कुछ नहीं नज़र नहीं आता। विवाह का एक अर्थ होता है, यदि हम उनको नज़र अंदाज़ करेंगे तब हमसे परिवार नही बनेगा। विवाह के बाद पति पत्नी यदि हम बिस्तर नही हो सकते तब विवाह करने की क्या आवश्कयता है?"
"राकेश ऐसी जीवन शैली ही युवाओं का स्वास्थ्य बिगाड़ रही है। पहले दिल की बीमारियां साठ वर्ष के पश्चात होती थी, आजकल तीस, पैंतीस की उम्र में दिल की बीमारियों से ग्रस्त हो रहे है। चौबीस घंटे काम करेंगे तब स्वास्थ्य तो ख़राब होगा ही।"
"रीना आर्टिकल में लिखा यह तर्क भी गले से नीचे नहीं उतरता कि अलग बेडरूम में सोने से आपस की तकरार नही होगी और झगडे नहीं होंगे। कोरी बकवास आर्टिकल में लिखते हैं। जब आपस में मिलेंगे नही, एक साथ रहेंगे नही, कोई बातचीत नही होगी तब विचार कैसे मिलेंगे, एक दूसरे से बात कब करेंगे? कैसे एक दूसरे के दिल का हाल जान सकेंगे? तबियत खराब होगी तो पति या पत्नी को मालूम भी नहीं होगा कि कुछ हुआ है। यहां तबियत जितनी ख़राब हो, रीना तुम्हारा सिर्फ हाथ के स्पर्श से आधी तबीयत ठीक हो जाती है। सिर्फ मुस्कुरा कर दवा की एक गोली हाथ में देती हो, उसी से आधी बीमारी ठीक हो जाती है। यह तो प्रकृति का नियम है कि दुःख में हंसी के दो बोल सुख का अहसास दे जाते हैं।"
"राकेश पूरी पीड़ा हर लेते है।"
"रीना नौक-झोंक को पति पत्नी के बीच लगभग हर रोज़ होती है। सुबह तकरार होती है, शाम को तकरार प्यार में परिवर्तित हो जाती है। इस कारण अलग-अलग बेडरूम तो इस्तेमाल नहीं करते।"
"और क्या, बच्चे जब तक छोटे होते हैं मां-बाप के साथ बैडरूम शेयर करते है, जब बड़े होते हैं तब बच्चों को अलग बैडरूम दिया जाता है। पति-पत्नी बुड्ढे हो जाएं, बेडरूम तो एक ही रखते हैं।"
राकेश ने घडी देखी "रीना एक घंटे से हम इस मुद्दे पर चर्चा कर रहे है। अपने काम छूट जाएंगे।"
"उठो राकेश, छुट्टी का दिन ख़राब हो जाएगा। हम अपना घर देखें, जो अतिउत्तम है।"
"फिर भी दुनिया में क्या हो रहा है उसकी जानकारी होनी चाहिए।"
"बहुत जानकारी हो गई। अब घर के काम करें।"
रीना और राकेश मुस्कराहट के साथ उठते हैं।




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