Monday, March 21, 2016

सात वचन



विवाह समारोह में बारात बैंक्वेट हॉल के गेट पर नाच रही थी। बाराती पहले ही अंदर पहुंच कर खाना खाने में व्यस्त हो चुके थे। सिर्फ दूल्हे के मित्र और करीबी नाच में मस्त थे। एक तरफ दोनों परिवार के बीच मिलनी की रस्म निभाई जा रही थी और दूसरी तरफ बाराती खाना खाने के बाद रुक्सत ले रहे थे। सबको दूर-दूर जाना है और अगले दिन ऑफिस, दुकानों पर समय से पहुंचना है। दूल्हे के मित्र तो छुट्टी करके आराम कर लेंगे पर यह नसीब सबको प्राप्त नही होता।

राकेश और रीना भी खाना खाने के बाद हॉल के एक कोने में सोफे पर अधलेटे हुए आराम कर रहे थे। रीना की भाभी के भाई की शादी थी, अतः उन्होंने डोली के साथ ही वापिस जाना था। भाभी की सख्त हिदायत थी कि सभी परिजन विदाई तक साथ रहेंगे, जब पूरी बारात दुल्हन को लेने आई है तब सभी परिजन डोली ले कर जाएंगे। आते समय की शान जाते समय भी बरक़रार रहनी चाहिए।

रीना की भाभी सब परिजनों को एकत्रित कर रही थी जो आराम कर रहे थे।

"राकेश जीजू, आप आराम कर रहे हैं। अब डोली के बाद तसल्ली से आराम करना। चल रीना, आ जा, शुभ मुहूर्त फेरों का समय हो गया है। वेदी बन गई है। वहीँ चल कर बैठते हैं।"

रीना और राकेश वेदी के पास बैठ गए। धीरे-धीरे सभी परिजन एकत्रित हो गए।

"रीना यहां तो हम दोनों ही हैं और तो कोई नही।"
"राकेश भाभी को देखो, सब को एकत्रित कर रही है। बहुत मुश्किल होता है सबको एकत्रित करना, कोई इधर तो कोई उधर।"
"रीना पंडित भी नज़र नही आ रहा। कम से कम वो तो अपना काम शुरू करे। पंडित को देख कर सभी आ जाएंगे।"
"दूल्हा-दुल्हन के पास चलते हैं। उनके साथ कुछ बातें हो जाएं। खुद ही आपस में बातों में मशगूल हैं। थोडा उनको भी विचलित किया जाए।"

राकेश और रीना दूल्हा-दुल्हन के पास जाते हैं। रीना के भाई-भाभी भी वहीँ है। राकेश ने दूल्हे-दुल्हन को छेड़ते हुए कहा "अभी शादी की रस्में पूरी करनी हैं। फेरे लेने हैं, कुछ उनका मतलब मालूम है या आंख मूंद कर फेरे ले लोगे।"

"जीजू आप भी टांग खीचने में लग गए। देखो दोनों शर्मा गए कि किस स्कूल के प्रिंसिपल आ गए।"
"भाभी खैर मैंने तो हंसी में पूछ लिया, वैसे फेरों का और वचनो के बारे में शायद ही किसी को पता हो। पंडित क्या बोलता है कोई नही सुनता, शायद पंडित पूरी तरफ से अर्थ भी नही समझाते।"
"जीजू चलो आप ने बात शुरू की तो आप ही बता दो।"
रीना ने चुटकी ली "अब आपके सामने महा महिम महा पंडित महा विद्धवान श्री श्री श्री श्री श्री राकेश जी महाराज फेरों और वचनो की कथा करेंगे।"
"रीना की तो आदत है मेरी टांग खीचने में। खैर कोई बात नही, पति-पत्नी की अन्दर की बात है। प्यारी सी नौक-झौंक। अब में अर्थ सुनाता हूं।"

मंगल फेरे एक संतुष्ट और संपूर्ण विवाहित जीवन का आनंद लेने के लिए नींव का पत्थर हैं। सफेद चावल के पेस्ट के साथ दूल्हे और दुल्हन के द्वारा पवित्र अग्नि के चारों ओर सात छोटे हलकों के साथ इन के आशीर्वाद के लिए जाते हैं
धर्म: - जीवन में सच्चाई, पवित्रता और पोषण के लिए।
अर्थ: - धन और जीवन में समृद्धि के लिए।
मोक्ष: - जीवन में आध्यात्मिक शक्ति और आत्म संयम के लिए।
वृत: - जीवन में एक दूसरे के लिए निष्टा।
सर्वसुख: - सभी प्राणियों के अच्छे के लिए।
ऊर्जा: - जीवन में उपलब्धि और सफलता के लिए।
कर्म: - शारीरिक संपूर्णता, साझा परिवार और जीवन में घरेलू जिम्मेदारियों के लिए।

पथप्रदर्शक भगवान के साथ
पहला फेरा पोषण और समृद्धि के लिए है।
दूसरा फेरा ताकत और सफलता के लिए है।
तीसरा फेरा सच्चाई और निष्ठा के लिए है।
चौथा फेरा आनंद और खुशी के स्रोत के लिए है।
पांचवा फेरा संतान के लिए है।
छटा फेरा प्रकृति के उपहार के लिए है।
सातवां फेरा मन की पवित्र रोशनी के आधार पर स्थायी साहचर्य के लिए है।

सात वचनो का यह अर्थ है।
1. सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक, आध्यात्मिक, धार्मिक आदि जैसे सभी प्रमुख निर्णयों के लिए एक दूसरे से परामर्श करना।
2. अच्छे दोस्त बन कर, एक गहरी समझ विकसित करके, एक दूसरे के और परिवार के लिए प्रति दायित्व का निर्वाह करें।
3. एक दूसरे का, एक दूसरे के माता पिता और परिवार का सम्मान करें।
4. एक दूसरे के प्रति वफादार रहें।
5. परिवार और सामाजिक परंपराओं से मार्गदर्शित हो।
6. उनके परिवारों के बीच सामंजस्य बनाए रखें।
7. संकट और बीमारी के समय के दौरान मजबूत और शांत रहें।

"इसके साथ कथा संपन्न हुई। अब अगली परीक्षा पंडित जी की है कि क्या वे फेरों के समय गहराई से अर्थ समझाएंगे। यदि हम सच्चे मन से इनको कार्यन्वित करें तब पति-पत्नी का बंधन सात जन्मों तक गाड़ा रहेगा।"

तभी पंडित जी ने आवाज लगाई। "अब आप सब वेदी पर आ जाइये। फेरों और वचनों का अर्थ और महत्त्व समझ लिया, लेकिन दक्षिणा मैं ही लूंगा।"
"पंडित जी, आराम से तसल्ली के साथ विस्तार में विवाह की रीतियां संपन्न करवाइए। दक्षिणा दुगनी लीजिये।" राकेश ने कहा और सभी ने ठहाका लगाया। दूल्हा-दुल्हन ने एक दूसरे की ओर शरारत भरी मुस्कान से देखा।


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