Wednesday, March 30, 2016

ताक झांक



महीने का दूसरा शनिवार, राकेश के ऑफिस की छुट्टी है। हर रोज़ की तरह सुबह छः बजे बिस्तर छोड़ा, ब्रश किया और बालकनी में कुर्सी पर बैठ कर हवा से झूलती पेड़ों की टहनियां देखने लगा। रीना चाय बना कर लाई और दोनों बिस्कुट के साथ चाय की चुस्कियां लेने लगे।

"राकेश यह जो सामने वाली बिल्डिंग है, उसे बड़े ध्यान से देखो।"
"रीना कोई खास बात है तो बताओ?"
"देखो तो सही।"
"जैसे हमारी बिल्डिंग में फ्लैट है, बिल्कुल वैसे ही सामने वाली बिल्डिंग में फ्लैट हैं। सामने वाली क्या, हमारी सोसाइटी की सभी बिल्डिंग एक जैसे डिज़ाइन की हैं, बस दिशा का अंतर है। हमारे फ्लैट की बालकनी और सामने वाली बिल्डिंग की बालकनी आमने सामने है। दोनों बिल्डिंग के बीच में खाली स्थान है, जो कार पार्किंग के लिए इस्तेमाल होती है।"
"राकेश हमारे सामने वाले फ्लैट को देखो जिसकी बालकनी ठीक हमारी बालकनी के सामने है।"
"बताओ, कुछ खास बात है क्या? मेरे ख्याल से वह फ्लैट श्रीवास्तव का है, वो खुद तो रहते नही। पहले रहते थे पर अब तो अपने बच्चों के पास रहने गुड़गांव चले गए हैं।"
"उन्होंने फ्लैट किराये पर दे दिया है और लगभग दो महीने से किरायेदार रह रहे हैं।"
"सुबह ऑफिस के लिए जाते हैं और रात लौटते है, कौन रहता है, मालूम ही नहीं। बहुत नए लोग गए हैं।"
"राकेश अब बड़े ध्यान से देखो क्या सामने वाले फ्लैट के कमरे नज़र आते है?"
"दो कमरे है, जैसे हमारे हैं। अभी तो खिड़की, दरवाज़े बंद हैं।"
"क्या तुम कमरों के अंदर देख सकते हो?"
"बंद कमरों में क्या नज़र आएगा?"
"यदि खिड़की दरवाजे खुले हो तब?"
"रीना इतनी ताक झांक तो कभी की नही और ही कभी इस तरफ मेरा दिमाग चला कि बालकनी में खड़ा हो कर दूसरों के कमरे में देखूं कि क्या हो रहा है।"
"राकेश दिमाग तो मेरा भी इस तरफ नही चला। सुबह और शाम के समय बालकनी में बैठती हूं। दोपहर के समय भी धुले कपड़ो को उतारने के समय भी बालकनी में आना होता है। हाय हेलो बालकनी से सब करते हैं, लेकिन अब तो ध्यान से देखना होगा कि क्या वाकई कमरों के अंदर कुछ दिखता है?"
"कुछ कारण जरूर होगा जो तुम इस पर चर्चा कर रही हो?"
"सामने वाले फ्लैट में जो महिला रहती है वह कल मिलने आई। अपना परिचय दिया फिर कहने लगी कि सुना है आपने फ्लैट को बहुत बढ़िया तरह से डेकोरेट किया है और देखना चाहती है। मुझे कुछ समझ नही आया कि वह हमारा फ्लैट क्यों देखना चाहती है। औपचारिकता चलते चाय पूछी, वह झट से तैयार हो गई और बातें करने लगी। फिर फ्लैट देखने के बहाने बालकनी में कर अपना फ्लैट देखने लगी और कहने लगी कि यहां के फ्लैट बहुत बेकार हैं, बालकनी में खड़े हो जाओ तो सबके बेडरूम नज़र आते हैं। यह सुन कर मैं चौंक गई कि क्या कह रही है और वो भी मुझसे। मैंने तपाक से कह दिया कि कुछ नज़र नही आता। दिखाओ, कौन सा बेडरूम नज़र रहा है। वो कहने लगी कि अभी दरवाज़ा बंद है, खुले दरवाज़े में नज़र आता होगा। मुझे तो वह सनकी लग रही थी, मैंने कह दिया कि हमारी आदत किसी के बेडरूम में ताक-झांक की नही है। पिछले पंद्रह वर्षो से रह रहे हैं, ऐसी बात कभी किसी ने नही कही। अगर उसे शक है कि कोई उसके घर ताका-झांकी करता है तब अपने खिड़की दरवाज़े बंद करके रहे।"
"रीना अब तो अवश्य देखना होगा कि क्या उसके बेडरूम अंदर से नज़र आते हैं।"
"जब भी उसका दरवाज़ा खुलेगा, देखना जरूर है।"
"रीना दूरबीन भी स्टोर से निकालो, उसकी मदद से देखेंगे।"
"तुम्हे मजाक सूझ रहा है। मेरा दिल कह रहा है कि उसके सर में हथौड़ा मार दूं।"
"इतना गुस्सा ठीक नहीं, पहले दरवाज़ा खुलने का इंतज़ार करते हैं।"

राकेश और रीना ने कुछ इंतज़ार किया पर उस फ्लैट का तो दरवाज़ा खुला ही खिड़की। नाश्ता करने के पश्चात राकेश अपने बाल कटवाने नाई के पास गया, वापिस कर नहाया और तौलिया सुखाने के लिए बालकनी गया और स्टैंड पर तौलिया सूखने के लिए रखा। सामने देखा कि फ्लैट का दरवाज़ा खुला है। राकेश चौकन्ना हो गया, देखने की कोशिश की परंतु कुछ नज़र नही आया। दरवाज़े के सामने का स्थान ही नज़र रहा था। राकेश ने रीना को बुलाया और दोनों देखने लगे। राकेश ने दूरबीन से भी देखा।

"रीना कुछ नज़र आया। दूरबीन से साफ़ नज़र रहा है। दरवाज़े के सामने खाली स्थान है, कुछ भी नहीं पड़ा हुआ है। फिर कमरा खत्म और दूसरे दरवाज़े के सामने फ्रिज रखा है।"
"मुझे भी कुछ नज़र नही रहा कि उस महिला को क्या आपत्ति है?"
तभी खिड़की खुली।
"रीना खिड़की खुल गई बस बेड नज़र रहा है। जब खिड़की खोली तो वो महिला कहां गई?"
"राकेश घर के नौकर ने खिड़की खोली है, देखो वो खिड़की की सफाई कर रहा है।"
रीना और राकेश अंदर कमरे में आते हैं।
"रीना आखिर वो महिला क्या चाहती है?"
"शक्की दिमाग की लग रही थी कि उसके बेडरूम में क्या हो रहा है, हम देखते है।"
"बकवास करती है, खुले दरवाज़ों में हर कोई झांक सकता है। कोई गोपनीय कार्य या फिर प्रेमालाप हर व्यक्ति खिड़की, दरवाज़े बंद करके करता है। खिड़की, दरवाज़ों पर पर्दे लगा कर रखो। खुले में कपडे बदलोगे तो हर कोई देखेगा।"
"अब यदि फिर आई ना अच्छी खबर लूंगी।"

दोपहर के समय रीना और राकेश लंच कर रहे थे कि वही महिला आई। शिष्टाचार वश रीना ने एक प्लेट उसके सामने बढ़ाई "लंच कीजिये।"
"मैं लंच करने नही आई, मैं यह पूछने आई हूं कि आपकी इतनी हिम्मत कि दूरबीन लगा कर हमारे बेडरूम में झांके।"

यह सुन कर राकेश का गुस्सा सातवे आसमान पर पहुंच गया।
"मैडम शिष्टाचार गया भाड़ में, सबसे पहले तो तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई कि दनदनाते हमारे फ्लैट में घुस आई। दरवाज़ा खुला था तो इसका यह मतलब नही कि डोरबेल नही बजानी या दरवाज़ा खटखटाना नही, और आते ही लड़ना शुरू।"
"लड़ मैं रही हूं या तुम। एक तो दूरबीन से हमारे बेडरूम में झांकते हो और ऊपर से लड़ रहे हो।"
"मैडम जुबान संभाल कर। हम अपने फ्लैट में जो भी करें, हमारी मर्जी। हमें कोई नही रोक सकता। तुम अपने घर में जो भी करो, हमारी बला से। तुम्हे लगता है कि तुम्हारे घर में ताका-झांकी होती है तब खिड़की, दरवाज़े बंद रखो। खुले में तो कोई भी झांकता चला जाएगा।"
"मैं पुलिस में रिपोर्ट लिखवाउंगी।"
"ठहरो, पुलिस को मैं फोन करता हूं। यहीं बुलाता हूं।" कह कर राकेश ने 100 नंबर घुमाया और पंद्रह मिनट में पुलिस की गाड़ी गई। तब तक महिला के घर से तीन व्यक्ति और पड़ोस से सात व्यक्ति भी राकेश के घर एकत्रित हो गए। खूब बहस होने लगी। पुलिस ने आते सबको चुप करवाया।

"सब पढ़े लिखे अच्छे घरों से ताल्लुक रखते हो। बेहूदा गंवारों की तरह लड़ रहे हो।"
सब चुप हो गए।
"फोन किसने किया था?"
"मैंने।" राकेश ने कहा।
"कहिये, क्या बात है?"
इससे पहले राकेश कुछ कहता, उस महिला ने कहना चाहा परंतु पुलिस ने चुप करा दिया कि पहले फोन करने वाले की बात सुनी जाएगी फिर आपकी। आपको पूरी बात कहने का मौका मिलेगा। राकेश ने पूरी बात सुनाई कि किस तरह वह महिला कल पूरे फ्लैट का निरिक्षण कर गई थी। मैं सिर्फ देखना चाहता था कि क्या वाकई फ्लैट के अंदर कुछ नज़र आता है।
उस महिला ने कहा कि राकेश दूरबीन लगा कर झांक रहा था।

अब राकेश को गुस्सा गया। "देखिए जनाब, इसकी सीनाज़ोरी देखी। अपने दरवाज़े, खिड़की पर पर्दे तक नही लगाए और इलज़ाम मेरे ऊपर। यदि कोई गोपनीय कार्य करना है या प्रेमालाप तब खिड़की, दरवाज़े बंद करके करिए। ऐसे काम तो पर्दे के पीछे होते है। खुले में करोगे तब आता-जाता हर व्यक्ति ताक-झांक करेगा।

पुलिस ने उस महिला को कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि वे इस बात पर शिकायत करे। खिड़की, दरवाज़े बंद करके रखे। अपनी हिफाज़त खुद करनी होती है। खिड़की, दरवाज़े बंद होंगे तब किसी की हिम्मत नही होगी आपके घर झांकने की।

पुलिस दोनों पक्षों से सहमतिनामा पर साइन करवा के चली गई।

शाम को राकेश के पडोसी आए। "राकेश जी आपने बहुत बढ़िया काम किया जो पुलिस बुला कर उस महिला की बोलती बंद करवा दी। तीन दिन पहले मेरे घर भी ऐसे छान-बीन कर गई थी। दोपहर में फ़िल्म देखने गया था, अभी आया तब पता चला।"

"उस महिला का सोसाइटी में रहना खतरनाक है जो खुद ताक-झांक करती है और दूसरों पर इलज़ाम लगाती है।" राकेश ने कहा।
"बिलकुल ठीक, सोसाइटी की मीटिंग में मकान मालिक को बुलवा कर स्पष्ट कर दो कि यह किरायेदार सोसाइटी में नही रह सकता।"
अगले रविवार को सोसाइटी की मीटिंग में सर्व सम्मति से प्रस्ताव पारित हुआ कि किरायेदार से मकान खाली करवाया जाए। मीटिंग के बाद सभी सदस्य उस फ्लैट के आगे नारे लगाने लगे।

ताक-झांक नही चलेगी, नही चलेगी।

उस महिला ने अपने दरवाज़े, खिड़की बंद कर लिए।

सभी ठहाका लगा कर हंसने लगे।



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